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अखिलेश यादव की सरकार के कामों का नहीं कोई मुकाबला

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उत्तर प्रदेश में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसके लिए करीब हर पार्टी कमर कस तैयार हो चुकी है। उत्तर प्रदेश का इतिहास बताता है कि यहाँ कभी भी एक पार्टी को लगातार दो बार जीत हासिल नहीं हुई। अखिलेश यादव की अगुआई में इस समय प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार है। 2012 में जब ये सरकार बनी थी तो किसी ने नहीं सोचा था कि एक नौजवान मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश की जनता का पहरुआ बन जाएगा और गरीब आदमी से लेकर किसान तक के दिलों पर राज करेगा।

भाजपा के पास अभी तक न तो कोई मुख्यमंत्री का चेहरा है और न ही कोई प्लान। यही नहीं अब तो भाजपा ने नोटबंदी कर गरीब आदमी की जेब में हाथ डाल उसको कंगाल बना डाला है। बसपा की मायावती अब खुद का अंतिम सहारा बची है। जितने बड़े नेता थे बसपा के वो या तो भाग चुके हैं या भाग रहे हैं। पैसों से टिकट बेचने वाली मायावती का आज अस्तित्व खत्म होने की कगार पर आ गया है। जैसे लोकसभा के चुनाव में बसपा अपना खाता नहीं खोल पाई थी क्या पता इस बार विधानसभा के चुनाव में भी वही हालत फिर हो जाए।

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अखिलेश यादव ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस के गठबंधन के साथ 300 से ज्यादा सीटें जीत रही हैं। दरअसल उनमें ये विश्वास उनकी सरकार में हुए जबरदस्त विकास कार्यों से आया है। अखिलेश सरकार में किसानों के उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँच सकें, इसके लिए लखनऊ, सैफई, मैनपुरी, कासगंज, कन्नौज और हापुड़ में किसान बाजार स्थापित किए हैं। आज यूपी का किसान खुश है, क्योंकि अखिलेश यादव ने जो वादा उनसे किये थे वो सब उन्हें मिला।

उत्तर प्रदेश में 70 फीसदी लोग खेती पर निर्भर हैं इसलिए खेती-किसानी को लेकर समाजवादी पार्टी ने राज्य के किसानों के लिए अपने घोषणा पत्र में तमाम वादे किये। उन्हें पूरा करने की बारी आई तो उसे भी अखिलेश ने निभाया। किसानों के उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुँच सकें, इसके लिए लखनऊ, सैफई, मैनपुरी, कासगंज, कन्नौज और हापुड़ में किसान बाजार स्थापित किए जा रहे हैं। झांसी में किसान बाजार स्थापित किया जा चुका है। किसानों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं देने तथा उनकी समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 को किसान वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2015-16 को भी किसान वर्ष के रूप में मनाया गया था।

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खेत-खलिहान में तभी फसलें लहलहाएंगी जब उनकी सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिले। समाजवादी सरकार ने किसानों के परिपेक्ष में सिंचाई के महत्व को बखूबी पहचानते हुए ऐसा प्रबंधन किया है, जिससे अधिक से अधिक किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जा सके। पूरे प्रदेश में सभी नहरों, माइनरों एवं राजवाहों की सिल्ट सफाई कराके पानी को टेल तक एवं टेल से खेत तक पहुंचाया गया है। पूरे प्रदेश में समाजवादी पार्टी की वर्तमान सरकार द्वारा 12.43 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है। इसके साथ ही समाजवादी सरकार ने किसानों को मुफ्त सिंचाई उपलब्ध करवाकर उनके लिए खेती करना आसान बना रही है। बुंदेलखंडमें नहरों द्वारा 6.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तथा राजकीय नलकूपों/टैंकों/बोरवेल के माध्यम से 4.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुलभ कराई गई है।

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शिक्षा के अलावा पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में खेलों से सम्बन्धित युवाओं का भी विशेष ध्यान रखा जिनमे नयें खिलाड़ियो को प्रोत्साहन देने के लिए लड़के-लड़कियों का चयन स्कूल स्तर से ही प्रारम्भ करने, खिलाड़ियों को छात्रावास में मुफ्त भोजन की व्यवस्था करने व प्रदेश एवं देश में विभिन्न खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को नौकरी में प्राथमिकता देने जैसी घोषणाओं को भी मुख्यमंत्री ने निभाया है। आप जिस क्षेत्र में नजर डाल दीजिये, अखिलेश यादव का समर्पण नजर आएगा। जो वादे या घोषणाएं की, उन्हें तो निभाया ही, हमेशा प्रदेश और यहाँ के लोगों के विकास के बारे में भी सोचा। इस पर काम किया। एक्सप्रेस वे, आगरा-लखनऊ हाईवे, दुग्ध उत्पादन की कामधेनु, मिनी कामधेनु योजनाएं, क्लीन यूपी, ग्रीन यूपी प्रोजेक्ट के तहत एक दिन में 10 लाख से ज्यादा पौधे लगाकर रिकॉर्ड बनाना, समाजवादी पेंशन, राम मनोहर लोहिया आवास योजना, 108 समाजवादी एंबुलेंस सेवा जैसी ढेरों योजनाएं लोगों की जिंदगी में खुशियाँ बिखेर रही हैं।अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, अन्तरराष्ट्रीय फुटबाल स्टेडियम आदि खेल को बढ़ावा देने की दिशा में सराहनीय प्रयास हैं।

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हाल ही में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों से बात करने पर सबका ये कहना था कि प्रदेश में जितने काम इस सरकार में हुए हैं, उतने कभी किसी सरकार में नहीं हुए। लोग इसका श्रेय अखिलेश यादव को देते हैं। उनका कहना है कि अगर कोई और व्यक्ति मुख्यमंत्री होता तो शायद इतने काम न हो पाते। इसलिए की नजर में आने वाले चुनाव के बाद वो अखिलेश यादव को ही मुख्यमंत्री के रूप में देखना पसंद करेंगे।

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