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तत्काल राहत के साथ-साथ मुख्यमंत्री आखिलेश ने तैयार कर दिया है बुंदेलखंड को सूखे से उबारने का रास्ता

महोबा के गांव में खेत-तालाब अभियान का काम (http://hindi.indiawaterportal.org)

महोबा के गांव में खेत-तालाब अभियान का काम (http://hindi.indiawaterportal.org)

May 06, 2016

बुंदेलखंड के हालात किसी से छुपे नहीं हैं। ये स्थिति कोई आज की नहीं हैं, अलबत्ता यह इलाका पिछले 21 साल से सूखे की मार झेल रहा है। मेटोलोजिकल (सतही) सूखा तो यहां प्रतिवर्ष ही बना रहता है। यह सूखे की स्थिति है जब किसी निश्चत क्षेत्र में एक निश्चत समय अन्तराल में औसत वर्षा में आधे से अधिक की गिरावट आ जाती है, ऐसी स्थिति में जमीन की समह पर एकत्र पानी सूख जाता है। तालाबों, नालों का पानी सूख जाता है और कुओं तथा उथलें हैण्डपम्पों का जलस्तर नीचे चला जाता है। सूखे का सबसे बड़ा पहलू है यहां हाइड्रोलोजिकल (भूगर्भीय) सूखा। निरन्तर दस या इससे अधिक वर्षों तक मैट्रोलोजिकल तथा एग्रीकल्चरल सूखा एक साथ पडने के बाद यह स्थिति पैदा होती है। सूखे की इस स्थिति में भूगर्भ जलस्तर बहुत नीचे चला जाता है। सतही जल, कुएं, हैण्डपम्प सूख जाते हैं, नदियों तथा भूगर्भ का जलस्तर बहुत नीचे चला जाता है और भूस्खलन शुरु हो जाता है।

पर, एक सुखद पहलू यह है कि उत्तर प्रदेश की समाजवादी सरकार ने अपने विकास के एजेंडे में बुंदेलखंड की समस्या को दूर करने का जो काम किया है उससे फौरी तौर पर तो कुछ लाभ हो रहा है, लेकिन इससे से भी बड़ी बात यह है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यहां सूखे की समस्या दूर करने के लिए जो दूरगामी योजनाएं तैयार की हैं, वे इसी मानसून के बाद और आने वाले वर्षों में नए खुशहाल बुंदेलखंड की इबारत लिखेगी और दो दशक से विकास के नाम पर हाशिए पर छोड़ दिए बुंदेलखंड को रेगिस्तान और वीरान होने से बचाएगी।

नजीर बनी खेत-तालाब योजना

महोबा के गांव में खेत-तालाब अभियान का काम (http://hindi.indiawaterportal.org)

महोबा के गांव में खेत-तालाब अभियान का काम (http://hindi.indiawaterportal.org)

बुन्देलखण्ड क्षेत्र में वर्षा, जल संचयन हेतु 12.21 करोड़ रुपये की खेत-तालाब योजना स्वीकृत की गई है। इसके अन्तर्गत 2000 तालाबों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह योजना बुन्देलखण्ड के सभी जनपदों में संचालित की जा रही है। पिछले वर्ष जनपद महोबा में कृषि विभाग ने सिंचाई और भूगर्भ जल स्तर की गिरावट को दृष्टि में रखकर एक उम्दा परियोजना प्रस्ताव शासन को भेजा था। इस प्रस्ताव पर अखिलेश सरकार ने बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज के तहत 24 चेकडैम निर्माण की स्वीकृति के साथ 3.60 करोड़ की धनराशि मंजूर की। योजना तो अच्छी थी, पर 24 चेकडैमों के निर्माण से जहां लाख या सवा लाख घनमीटर वर्षाजल से अनुमानित 150 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई की जा सकती थी। वहीं इतनी ही धनराशि से 500 से 600 किसानों के खेतों पर तालाब बनाकर 7 से 8 लाख घनमीटर वर्षा जल एकत्र कर 1000 हेक्टेयर से अधिक असिंचित कृषि भूमि की सिंचाई का जरिया बनाया जा सकता था। सो प्रशासन ने जरूरत के अनुरूप शासन से प्रस्ताव में बदलाव का अनुरोध किया। धन स्वीकृत होते ही महोबा में खेत-तालाब नाम से व्यापक अभियान चलाया गया और सूख चुके तालाबों को पुनर्जीवित करने की कोशिशें तेज की गई। इसके बेहतर परिणाम प्राप्त हुए और योजना किसानों के लिये वरदान साबित हुई। इसके बाद तो बुंदेलखंड के दूसरे जिलों को भी महोबा की जटिल होती पानी की समस्या का समाधान खेत- योजना में नजर आने लगी है।

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मुख्यमंत्री जल बचाव अभियान

water body restoration in lalitpur

मुख्यमंत्री जल बचाव अभियान के अन्तर्गत नदियों के पुनर्जीवन व पुनरोद्धार के कार्य कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री जल बचाव अभियान के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड क्षेत्र में 10,705.74 लाख रुपये एवं पूरे प्रदेश में 87,197 लाख रुपये व्यय करके तालाबों पर कार्य कराया गया है। यह तो एक उदाहरण मात्र है बुंदेलखंड मे्रं पानी की समस्या दूर करने की सरकार के प्रयासों का है। राज्य सरकार द्वारा ऐसी तमाम योजनाएं अमल में लाकर और क्रियांवित कर बुंदेलखंड की लंबे समय से चली आ रही समस्या दूर की जा रही है। तत्काल राहत पहुंचाने के लिए बुंदेलखंड क्षेत्र में समाजवादी सूखा राहत सामग्री तथा खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत चार माह तक निःशुल्क खाद्यान्न वितरण के आदेशों सीएम की ओर से पहले ही जारी किया जा चुका है।

5,786 नए हैण्डपंप, 440 वाटर टैंकर की व्यवस्था

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जालौन में खेत तालाब योजना से जल संरक्षित तालाब (@CMOfficeUP)

पानी की किल्लत दूर करने के लिए बुन्देलखण्ड में 5,786 नए इण्डिया मार्का-2 हैण्डपम्पों की स्थापना के लिए 40 करोड़ रुपये जारी किए गए है। वहीं 440 वाटर टैंकर की खरीद के लिए 9.94 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए गए है। 07 जनपदों में 3,527 इण्डिया मार्का-2 हैण्डपम्पों की रिबोरिंग हेतु त्वरित आर्थिक विकास योजना के अन्तर्गत नियोजन विभाग द्वारा 20.85 करोड़ रुपये स्वीकृत कर हैण्डपम्पों की रिबोरिंग की कार्रवाई की जा रही है। समस्याग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति तथा पशुओं के चारे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए है। इसकी व्यवस्था हेतु 01 करोड़ रुपये प्रति जनपद के हिसाब से पूर्व में ही आवंटित किया जा चुका है। साथ-साथ 7 जिलों में सूखे के कारण रबी की फसलों की क्षति के मद्देनजर केन्द्र से 1261.04 करोड़ रुपये स्वीकृत करने का मुख्यमंत्री ने अनुरोध किया है।

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khet talab yojna

मुख्यमंत्री जल बचाव अभियान के अन्तर्गत नदियों के पुनर्जीवन व पुनरोद्धार के कार्य कराए जा रहे है। जनपद महोबा की चन्द्रावल नदी के पुनर्जीवन/ पुनरोद्धार हेतु विकास खण्ड चरखारी एवं कबरई में स्थित नदी व सहायक नालों पर 15 चेकडैम 615.89 लाख रुपये की लागत से निर्मित कराए जा रहे है। जनपद झांसी में लखेरी नदी एवं सहायक नालों पर विकास खण्ड गुरसराय एवं बंगरा में 29 चेकडैमों हेतु प्राप्त धनराशि 632.978 लाख रुपये के सापेक्ष निविदाएं आमंत्रित कर ली गई हैं। सिंचाई विभाग के तहत अर्जुन सहायक परियोजना से हमीरपुर, महोबा एवं बांदा जनपदों के लिए अतिरिक्त सिंचन क्षमता सृजित करने का काम किया जा रहा है। इसी प्रकार बाण सागर नहर परियोजना से मिर्जापुर एवं इलाहाबाद जनपद के लिए सिंचाई के साधन तैयार किए जा रहे हैं। इसी तरह, वाराणसी शहर में वरुणा नदी के चैनलाइजेशन एवं तटीय विकास की परियोजना का काम किया जा रहा है। इससे वरुणा नदी में पर्याप्त जल उपलब्ध रहेगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल प्राप्त हो सकेगा।

चल रही है 60 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाएं

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बुन्देलखण्ड पैकेज के प्रथम चरण में 12 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाएं एवं द्वितीय चरण में 48 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। पहले चरण के निर्माण हेतु स्वीकृत कुल राशि 91.63 करोड़ रुपये अवमुक्त की जा चुकी है। इन 12 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाओं में से 11 योजनाओं में कार्य पूर्ण कर पूरी तरह उपयोग में लाया जा चुका है। द्वितीय चरण में स्वीकृत 48 योजनाओं हेतु स्वीकृत सम्पूर्ण धनराशि 181.283 करोड़ रुपये अवमुक्त की जा चुकी है तथा 18 योजनाओं के कार्य पूर्ण कर उन्हें संचालित किया जा चुका है। सिंचाई के लिए बुन्देलखण्ड के 07 जनपदों में 17 निःशुल्क बोरिंग, 583 मध्यम गहरी बोरिंग, 276 गहरी बोरिंग व 59 रिचार्जिंग चेकडैम बनाने की कार्य योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है। इसके अलावा, 8098 डगवैल निर्माण के लक्ष्य के सापेक्ष 7926 परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं।

कोई नहीं रहेगा भूखे पेट

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मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने प्रदेश के सभी सूखाग्रस्त जनपदों में राहत एवं पेयजल आपूर्ति से सम्बन्धित कार्यों को युद्धस्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं। सूखे से प्रभावित जनपदों में चलाए जा रहे राहत कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सभी 07 जनपदों के 2.30 लाख अंत्योदय परिवारों को हर महीने समाजवादी सूखा राहत सामग्री का वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह निर्देश भी दिए कि किसी भी स्थिति में किसी भी व्यक्ति की भुखमरी से मृत्यु न होने पाए, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। भुखमरी से यदि किसी व्यक्ति की मौत होती है तो सम्बन्धित जिलाधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के अन्तर्गत बुन्देलखण्ड क्षेत्र में नियमानुसार अधिक से अधिक लाभार्थियों को चिन्हित किया जा सकता है।

ये काम भी महत्वपूर्ण

इसके अलावा, बुन्देलखण्ड के समस्त जनपदों के ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घण्टे विद्युत आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, बुन्देलखण्ड क्षेत्र के समाजवादी पेंशन योजना के पात्र लाभार्थियों को शत-प्रतिशत आच्छादित किया जा रहा है। वहीं मनरेगा के अन्तर्गत रोजगार मानव दिवसों को 100 से बढ़ाकर 150 मानव दिवस कर दिया गया है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र के 07 जनपदों में वर्ष 2015-16 में 160.88 लाख मानव दिवस सृजन के वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष 198.26 लाख मानव दिवस सृजित किए गए 2016-17 में बुन्देलखण्ड के 07 जनपदों में 3 मई, 2016 तक के लक्ष्य 7.66 लाख मानव दिवस सृजन के सापेक्ष 5.39 लाख मानव दिवस सृजित किए गए है।  किसानों को अपना उत्पाद बिक्री करने हेतु निकटतम बाजार की सुविधाएं सुलभ कराने के लिए बुन्देलखण्ड क्षेत्र में भारत सरकार की सहायता से 07 विशिष्ट मण्डियां तथा 133 ग्रामीण अवस्थापना केन्द्रों का निर्माण मण्डी परिषद द्वारा कराया जा रहा है।

 

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