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यूपी को विकास पथ पर ले जाने को तैयार है सड़कों का विशाल नेटवर्क

आगरा से लखनऊ तक एक्सप्रेस-वे पर अक्टूबर से गाड़ियां दौड़ने लगेंगी

आगरा से लखनऊ तक एक्सप्रेस-वे पर अक्टूबर से गाड़ियां दौड़ने लगेंगी

June 3, 2016

अमेरिका ने सड़कें बनाई, सड़कों ने अमेरिका को। विकास की हकीकत बन चुके इसी फलसफे पर उत्तर प्रदेश को तरक्की की राह पर ले जा रहे हैं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव। दरअसल अमेरिका ने इसलिए तरक्की की क्योंकि वहां सड़कें पहले बनाई गईं। विकास के लिए सड़कें जरूरी हैं। यही काम उत्तर प्रदेश सरकार कर रही है। उत्तर प्रदेश की बागडोर संभालने के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने विकास कार्यों का जो पहला एजेंडा तैयार किया, उसमें सबसे आगे था प्रदेश के सभी जनपद मुख्यालयों को फोर लेन से जोड़ना। इसके साथ ही उन्होंने आगरा से लखनऊ तक एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरू कराया, जिस पर अक्टूबर से गाड़ियां दौड़ने लगेंगी। इस एक्सप्रेस-वे से सिर्फ आगरा या लखनऊ तक विकास नहीं होगा, बल्कि इससे जुड़ने वाले 10 जिलों में विकास की गति तेज हो जाएगी। दूसरी ओर, प्रदेश सरकार ने पूरे प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाया, जो पूरे प्रदेश को तरक्की की राह पर ले जा रहा है। यहां गौर करने वाली बात यह है कि जितनी तेजी से प्रदेश में सड़कों को अखिलेश सरकार बनवा रही है, उतनी तेजी से किसी और सरकार ने काम नहीं किया। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के अलावा बलिया से लखनऊ तक समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा गया है तो गाजीपुर, बलिया हाईवे पर काम चल रहा है।

बात यही खत्म नहीं होती है। सड़कों के विकास के माध्यम से अखिलेश सरकार ने प्रदेश के पिछड़ापन का दाग भी धुल दिया है। एक वक्त था जब हमीरपुर कालपी रोड को एशिया की सबसे घटिया सड़कों में से एक माना जाता है। आज उसकी सूरत बदल चुकी है। वर्तमान सरकार के प्रयासों से यह सड़क अब फोर लेन रोड में तब्दील हो चुकी। यह जानना भी रोचक होगा कि पहले महज 52 किमी लंबे हमीरपुर-कालपी मार्ग को पूरा करने में चार घंटे तक लग जाते थे, फोरलेन होने के बाद यही दूरी अब सिर्फ 45 मिनट में पूरी रही है।

43 जनपद जुड़ चुके हैं फोरलेन से

सड़कों के निर्माण से आवागमन तो आसान होता ही है, एक और महत्वपूर्ण बात होती आर्थिक विकास की। सड़कें बनने से कारोबार सुलभ हो जाता है। किसान और कारोबारी अपने उत्पाद दूसरे इलाके तक आसानी से पहुचा पाते हैं। यह सभी बातें सम्मिलित होकर अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती हैं। इसे ध्यान में रखकर प्रदेश के सभी जनपद मुख्यालयों को चार लेन मार्गों से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश 75 जनपद मुख्यालयों में से अब तक कुल 43 जनपद चार लेन मार्गों से जुड़ चुके हैं। हमीरपुर पहले ही कानपुर की ओर से जुड़ा हुआ है, अब इसे कालपी की ओर से भी जोड़ दिया गया है। इसके अलावा बदायूं-बरेली, बहराइच-भिनगा, बाबतपुर-भदोही फोर लेन जैसी कई परियोजनाओं का लोकार्पण हो चुका है। मेरठ-करनाल, उन्नाव-शुक्लागंज मार्ग पर फोर लेन चौड़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। उरई से पनवाड़ी की ओर का मार्ग उरई से मुहाना तक फोर लेन रोड किया जा रहा है। उरई-जालौन मार्ग को भी 4 लेन सीमेंट कंक्रीट मार्ग बनाने का निर्णय लिया गया है। इसी साल इलाहाबाद-जौनपुर-आजमगढ़ मार्ग, फैजाबाद-अकबरपुर-बसखारी मार्ग, भदोही-मिर्जापुर मार्ग और छिबरामउ-सौरिख-बिधूना मार्ग को भी फोर लेन कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बदायूं में बदायूं-बरेली फोरलेन मार्ग का लोकार्पण करते हुए। photo_uttamup.com

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बदायूं में बदायूं-बरेली फोरलेन मार्ग का लोकार्पण करते हुए। photo_uttamup.com

सैकड़ों पुलों का भी हो रहा निर्माण

बलिया में श्रीरामपुर घाट पर गंगा नदी पर 2544 मीटर लम्बे पुल का निर्माण शुरू हो चुका है। यह प्रदेश का सबसे लंबा पुल होगा। वर्तमान सरकार अब तक 224 बड़े, 213 छोटे और 63 रेलवे ओवरब्रिजों सहित कुल 500 पुलों का निर्माण करा चुकी है। इनमें गंगा नदी पर पांच, यमुना नदी पर सात, घाघरा नदी पर दो पुलों का निर्माण किया गया। इनके अलावा गंगा नदी पर 15, यमुना पर 12 और घाघरा नदी पर 4 पुल सहित कुल 31 पुलों का निर्माण प्रगति पर है।

कोर रोड नेटवर्क का निर्माण

सरकार की प्राथमिकता में महत्वपूर्ण मार्गों का एक कोर रोड नेटवर्क बनाना भी है। इसमें सभी नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और अन्य जिला मार्गों को शामिल किया गया। इस तरह कुल 24095 किमी लंबाई की सड़कों को कोर रोड नेटवर्क में शामिल किया गया है। कोर रोड नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण और चौड़ीकरण के लिए इस बार के बजट में मुख्यमंत्री ने 310 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 16677 किमी लंबाई में नए ग्रामीण मार्गों का निर्माण कराया जा चुका है।

Photo_ twitter.com/navneetsehgal3

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पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मार्गों का सौंदर्यीकरण

सड़कों की मरम्मत और उनके सौन्दर्यीकरण के जरिय वर्तमान सरकार पर्यटन को भी आकर्षित कर रही है। इसी क्रम में पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्गों का चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण व सौंदर्यीकरण के मद में बजट में 75 करोड़ रुपये की अलग से व्यवस्था की गई है। इसके अलावा 500 से अधिक आबादी की सभी बसावटों को भी संपर्क मार्ग से जोड़ा जा रहा है। वर्तमान सरकार प्रदेश की 500 से अधिक आबादी की सभी ऐसे बसावटों को संपर्क मार्ग से जोड़ने का काम कर रही है, जो अभी तक इससे वंचित थे। 500 से अधिक आबादी की अनजुड़ी 6221 बसावटों को संपर्क मार्गों से जोड़ने के लिए कार्य योजना बनाई गई है। इसमें 3693 पक्के मार्गों से जोड़ चुके हैं। 58 बसावटें जोड़ी जानी बाकी हैं, जिन्हें जून 2016 तक जोड़ा जाना प्रस्तावित है।

Photo_amarujala.com

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डॉ. राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना

अमूमन विकास के क्रम में छोटे गांव और बसावट पीछे छूट जाते हैं। लेकिन अखिलेश सरकार ने शहरों और बड़े गांवों में विकास कार्य तेज रखने के साथ ही उन गांवों को तरक्की के रास्ते पर लाने का काम किया है। वर्ष 2012 में समाजवादी सरकार के गठन के साथ गांवों के समेकित विकास के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना शुरू की गई। इसके अंतर्गत चयनित राजस्व ग्रामों की ऐसी सभी अनजुड़ी बसावटें, जिनकी आबादी 250 या उससे अधिक है, को पक्के संपर्क मार्गों से जोड़ा जा रहा है। वर्ष 2015-16 तक चयनित 7897 समग्र ग्राम में 7300 ग्राम संपर्क मार्गों से जोड़े जा चुके हैं। शेष 597 गांव भी अक्टूबर 2016 तक संपर्क मार्गों से जोड़ दिए जाएंगे। इसके अलावा मौजूदा वित्तीय वर्ष में भी 2100 समग्र ग्रामों का चयन कर उन्हें पक्के संपर्क मार्गों से जोड़ने का लक्ष्य है।

शहरों में यातायात की समस्या दूर करेंगे बाईपास

एक लाख से अधिक आबादी के शहरों में बाईपास के निर्माण के लिए वर्ष 2016-17 में 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के दुर्घटना बहुल क्षेत्रों की पहचान कर उनमें सुधार करने, मार्ग सुरक्षा कार्यों के लिए भी अलग से 70 करोड़ रुपये की बजट में व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। इससे शहरों में यातायात का दबाव तो कम होगा ही दुर्घटनाएं भी कम होंगी।

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बुंदेलखंड और पूर्वांचल पर विशेष जोर

प्रदेश में अपेक्षाकृत पिछड़े बुंदेलखंड और पूर्वांचल को विकास का प्रदेश सरकार विशेष रूप से ध्यान दे रही है। इस कड़ी में इन क्षेत्रों के विकास के लिए पूर्वांचल विकास निधि एवं बुंदेलखंड विकास निधि की योजनाओं के लिए वर्ष 2016-17 में क्रमशः 300 करोड़ और 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे पहले वर्ष 2015-16 में पूर्वांचल विकास निधि और बुंदेलखंड विकास निधि के लिए 325 करोड़ रुपये की बजट की व्यवस्था की गई थी। हमीरपुर-कालपी फोर लेन के निर्माण से पहले ही बुंदेलखंड में आवागमन कुछ सुधरा है तो अब समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पूर्वांचल के विकास की नई कहानी लिखने की ओर अग्रसर है।

भारत-नेपाल सीमा के 7 जिलों में सड़कों का निर्माण

भारत-नेपाल सीमा के सात जिलों में वर्तमान सरकार सड़कों का निर्माण करा रही है। इस परियोजना के लिए मौजूदा वित्तीय वर्ष में करीब 450 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। प्रदेश में सामरिक महत्व की भारत-नेपाल सीमा पर 7 जनपदों में 1621 करोड़ रुपये की लागत से 640 किमी लंबाई में मार्ग बनाने का के लिए भारत सरकार से पहले ही सैद्धांतिक अनुमोदन मिल चुका था। इस परियोजना के अंतर्गत 257 किमी लंबाई और 736 करोड़ रुपये की लागत के लिए प्रशासनिक अनुमोदन, वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है।

Photo_ twitter.com/navneetsehgal3

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1000 किमी. लंबाई में राज्य मार्गों का चौड़ीकरण

विश्वबैंक द्वारा 2450 करोड़ रुपये का ऋण और प्रदेश सरकार द्वारा 1050 करोड़ रुपये के अंशदान से लगभग 1000 किमी राज्य मार्गों के चौड़ीकरण की योजना भी प्रदेश में चलाई जा रही है। इसके तहत प्रथम चरण में वर्ष 2015-16 में विश्व बैंक परियोजना के अंतर्गत 260 किमी लंबाई में राज्य मार्गों का चैड़ीकरण करने का काम जारी है। दूसरी ओर, एशियन डेवलपमेंट बैंक से प्राप्त ऋण से प्रमुख जिला मार्गों का भी चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। एशियन डेवलपमेंट बैंक द्वारा 1870 करोड़ रुपये ऋण एवं प्रदेश सरकार द्वारा 800 करोड़ रुपये के अंशदान से लगभग 750 किमी प्रमुख जिला मार्गों के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण किया जाना है।

वर्तमान सरकार में बने ये प्रमुख मार्ग अब हैं विकास के पथप्रदर्शक

  • 80 किमी. लंबे बरेली-बदायूं मार्ग का निर्माण 244.34 करोड़ की लागत से
  • मुरादाबाद से संभल तक 35.71 किमी. लंबे मार्ग का निर्माण 136.33 करोड़ रुपये से
  • बहराइच से भिन्गा तक 33 किमी. लंबे मार्ग का निर्माण 191.75 करोड़ रुपये से
  • लखनऊ-कानपुर मार्ग से हरदोई मार्ग होते हुए सीतापुर मार्ग तक 22.45 किमी लंबे रिंग रोड का कार्य 308.02 करोड़ रुपये से
  • मूरतगंज से मंझनपुर तक 18 किमी. लंबे मार्ग का निर्माण 74.72 करोड़ रुपये से
  • इटावा-मैनपुरी-कुरावली 89 किमी. लंबे मार्ग का निर्माण 598.63 करोड़ रुपये से
  • सहादतगंज से नयाघाट 12.20 किमी. लंबे मार्ग का निर्माण 18.96 करोड़ रुपये से
  • वाराणसी से मोहनसराय कैंट मार्ग का शहरी करीब 11 किलोमीटर का निर्माण 31.27 करोड़ रुपये से
  • हापुड़ में दिल्ली मार्ग का शहरी भाग 9.60 किलोमीटर का निर्माण 38.75 करोड़ रुपये से
  • लखनऊ शहर में हजरतगंज चैराहे से विक्रमादित्य चैराहा होते हुए लोहिया पथ का चैड़ीकरण 78.04 करोड़ रुपये से

 

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