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नैनो टेक्नोलॉजी, जियो टेक्सटाइल से बनेंगी अब यूपी में सड़कें

प्रकृति के साथ प्रगति को नया आयाम दे रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

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15 December 2016

टेक्नोलॉजी बढ़ने के साथ दुनिया भर में विकास कार्यों के तरीके भी बदल रहे हैं। साथ ही पर्यावरण को लेकर चिंताओं ने भी विकास कार्यों की रूपरेखा  में बदलाव लाये हैं। आज से 20, 30 या 50 वर्ष पहले तक सरकारें विकास का जो एजेंडा बनाती थीं, उसमें और आज के दौर में बहुत फर्क आया है। विकास अब फौरी राहत की बात नहीं रह गया है, बल्कि उसे दीर्घकालिक फायदेमंद होना भी जरूरी है। इससे भी ऊपर पर्यावरण संरक्षण का ख्याल रखना भी विकास एजेंडे का अहम् हिस्सा है। जैसे-जैसे ग्लोबल वार्मिंग की चिंताएं दुनिया भर में बढ़ रही हैं विश्व बैंक, यूनेस्को  सहित तमाम बड़ी संस्थाएं विभिन्न देशों और राज्यों को इस दिशा में सोचने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

वर्ल्ड बैंक के मिलेनियम गोल में पर्यावरण आधारित विकास पर खास जोर दिया जा रहा है। विभिन्न देश इस पर अमल कर रहे हैं, लेकिन में भारत में इस दिशा में अभी प्रभावी काम कम ही हो रहे हैं। सौभाग्य से उत्तर प्रदेश इस दिशा में कदम बढ़ा चुका है। पर्यावरण इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद यूपी में ‘प्रगति और प्रकृति’ के एजेंडे पर काम किये जाने लगे हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार ने अब प्रदेश में ऐसी सड़कों के निर्माण की ओर कदम बढ़ाया है, जिससे प्रकृति का ख्याल भी रखा जा सके और सड़कों को बनाने में लागत कम आये। साथ ही लम्बे समय तक उनके मरम्मत की जरूरत न पड़े। दरअसल अखिलेश सरकार ने कोल्ड मिक्स, वेस्ट प्लास्टिक, नैनो टेक्नोलॉजी और जियो टेक्सटाइल का प्रयोग कर सड़क निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया है।

उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में कुल 5127 किमी. लम्बी 645 सड़कों के उच्चीकरण और चौड़ीकरण की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इस सड़कों का निर्माण इस नई टेक्नोलॉजी से किया जायेगा। इस क्रम से अखिलेश सरकार प्रदेश में कोल्ड मिक्स टेक्नोलॉजी से 514 किमी., वेस्ट प्लास्टिक टेक्नोलॉजी से 562 किमी., नैनो टेक्नोलॉजी से 531 किमी. तथा जियो टेक्सटाइल से 54 किमी. सड़क का निर्माण करने जा रही है। इन टेक्नोलॉजी से सड़क निर्माण होने पर जहां एक ओर पर्यावरण के संरक्षण में सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर जनमानस को लम्बे समय तक सुगम आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी।

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कोल्ड मिक्स टेक्नोलॉजी के अनेक फायदे हैं। कोल्ड मिक्स द्वारा सड़क निर्माण का कार्य सर्दी में तथा बरसात के मौसम में भी किया जा सकता है। यह तकनीक पर्यावरण के अनुकूल है तथा किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं होता है। ग्लोबल वार्मिंग को देखते हुये यह अत्यन्त लाभदायी है। जबकि हॉट मिक्स से सड़क निर्माण में प्रति किमी। लगभग 1500 से 2000 लीटर ईंधन की खपत होती है। कोल्ड मिक्स टेक्नोलॉजी से इसकी बचत होती है। कोल्ड मिक्स के कार्य में किसी प्रकार के स्किल्ड लेबर की जरूरत नहीं होती है तथा यह आम लेबर के भी अनुकूल है।

हॉट मिक्स द्वारा कार्य में लगभग 170 डिग्री सेन्टीग्रेट तापमान पर बाइंडर की हीटिंग होती है जिससे लेबर के स्वास्थ्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है जबकि कोल्ड मिक्स में जरा भी हीटिंग नहीं होती है। एक अनुमान के अनुसार कोल्ड मिक्स द्वारा निर्मित सड़क हॅाट मिक्स से निर्मित सड़क के मुकाबले लगभग 50 प्रतिशत ज्यादा दिन तक चलती है। हॉट मिक्स से बनी सड़क को कम मेन्टीनेन्स की भी जरूरत होती है।

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दूसरी ओर वेस्ट प्लास्टिक टेक्नोलॉजी से सड़क के निर्माण से प्लास्टिक कचरे की समस्या से काफी हद तक निजात पाई जा सकती है। नगालैंड में लगभग 150 किलोमीटर लंबी सड़क इसी तकनीक से बनायी जा चुकी है। अब उत्तर प्रदेश सरकार भी जल्द ही बेकार प्लास्टिक और बिटुमेन मिश्रित सड़कों का निर्माण शुरू करने जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से बनी सड़कों की ‘मार्शल स्टैबिलिटी वैल्यू’ (सड़क की गुणवत्ता का मानक) बढ़ जाती है। ये सड़कें जलजमाव जैसी समस्याएं भी झेल जाती हैं। सड़कों के टूटने की दर काफी कम है और बरसात के पानी से इनमें गड्ढे नहीं बनते। सड़कों पर भारी वाहनों के चलने से भी ये नहीं धंसतीं। ऐसी सड़कों में बिटुमेन का फीसद अपेक्षाकृत कम होता है,जिससे सड़क बनाने की लागत कम हो जाती है। सड़क के रख-रखाव पर कम खर्च होता है और वे पराबैंगनी किरणों के दुष्प्रभाव से भी बची रहती हैं।

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जहां तक नैनो टेक्नोलॉजी से सड़क के निर्माण की बात है, तो इससे बनने वाली सड़कों पर नमी का असर नहीं होगा और सड़कें इस टूट-फूट से मुक्त रहेंगी। ऐसी सड़कों के 15 साल तक रखरखाव की जरूरत नहीं होगी। नैनो टेक्नोलॉजी से बनी सड़कों के अंदर पानी का रिसाव नहीं हो पाता। नैनो टेक्नोलॉजी के उपयोग से सरकार केवल सड़क निर्माण का खर्च तो कम होगा ही, उसकी मरम्मत का खर्च भी कम हो जायेगा।

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इसी तरह जियो-टेक्‍सटाइल के उपयोग से बनाई गईं सड़कें भी बारिश, ठण्ड से प्रभावित नहीं होती हैं। जियो-टेक्‍सटाइल एक मजबूत सिंथेटिक फेब्रिक है, जिसका सामान्‍य तौर पर सिविल इंजीनियरिंग कंस्‍ट्रक्‍शन प्रोजेक्‍ट जैसे हाईवे या बांध में मिट्टी को स्थिर रखने और कटाव को रोकने के लिए किया जाता है। कई बार बाढ़ के दौरान भी नदी का कटाव रोकने के लिए जियो बैग्स का इस्तेमाल किया जाता है। यह टेक्‍नोलॉजी पर्यावरण हितैषी है और इससे सड़कों की उम्र को बढ़ाती है और देखरेख लागत भी कम आती है।

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