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अब गन्ने की उपज में इतिहास बनाने की ओर बढ़ा यूपी

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July 20, 2016

समाजवादी पार्टी के चिंतक प्रो. राम गोपाल ने फरवरी 2013 को अपने एक वक्तव्य में महात्मा गांधी को उदृध करते हुए कहा था कि जब तक जब तक गांव का विकास नहीं होगा, गांव में रहने वाले किसान सम्पन्न और समृद्ध नहीं होंगे। तब तक भारत के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। यह बात गन्ना किसानों पर भी लागू होती है। अखिलेश सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों के चलते प्रति क्विंटल गन्ने में चीनी के रिकॉर्ड उत्पादन के बाद उत्तर प्रदेश अब गन्ने की उपज में भी इतिहास रचने की ओर है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में महाराष्ट्र को पछाड़ की चीनी परता यानी एक क्विंटल गन्ने से बनने वाले चीनी के मामले में यह उपलब्धि हासिल की है। गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में ये उपलब्धियां निश्चित तौर पर किसानों की समृद्धि और खुशहाली का रास्ता खोलेंगी। उत्तर प्रदेश के करीब 41 लाख किसान गन्ने की खेती करते है। जबकि 20 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। यहां ये जानना जरूरी है कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। चीनी परता में नंबर 1 बनने से उत्साहित राज्य सरकार अब प्रदेश में गन्ना उत्पादन को नया मुकाम देने की कोशिशों में जुटी है। ऐसे में गन्ने की उपज में लंबी छलांग लगाने से किसानों की आमदनी तो बढ़ेगी ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। सरकार का लक्ष्य प्रदेश गन्ने की औसत उपज 600 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 1000 क्विंटल करना है।

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उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए सभी जनपदों में एक-एक गांव गोद लेकर वहां उन्नतिशील गन्ना खेती का मॉडल विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने भी प्रदेश के नौ गांवों को गोद लेकर उन्हें गन्ना के पैदावार के मामले में माॅडल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। परिषद के वैज्ञानिक गांवों में जाकर किसानों को गन्ना की आधुनिक व उन्नतशील खेती के लिए प्रशिक्षित करेगी। किसानों को उन्नत गन्ना प्रजातियों के बीज, जैविक खाद मुहैया कराया जाएगा। यहां तक कि किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। ट्रेंच विधि से गन्ना की बुवाई तथा बीमारियों से बचाव के लिए यूपीसीएसआर की टीम संसाधनों से भी मदद करेगी। जरूरत पड़ने चीनी मिलों की भी मदद ली जाएगी।

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उत्तर प्रदेश में किसानों की बहुलता है। ऐसे में उनकी समृद्धि उत्तर प्रदेश की आर्थिक मजबूती के लिए बेहद मायने रखती है। इस बात को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बहुत अच्छी तरह समझते है। यही वजह है कि पिछली समाजवादी सरकारों की तरह उनकी सरकार भी किसानों पर विशेष ध्यान दे रही है। बात गन्ना किसानों की हो तो यह और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नकदी फसल होने के नाते गन्ने की पैदावार का राज्य की अर्थव्यवस्था और विकास से सीधे नाता होता है। गन्ने का उत्पादन कृषि के साथ-साथ उद्योग क्षेत्र के विकास से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। ऐसे में गन्ने की पैदावार बढ़ा किसी भी प्रदेश की समृद्धि का भी परिचायक है। ऐसे में चीनी पतरा में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद अब गन्ने की पैदावार में रिकॉर्ड वृद्धि की ओर उत्तर प्रदेश सरकार के बढ़ते कदम को अखिलेश सरकार की अहम उपलब्धियों में माना जाने लगा है।

 

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