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रंग लाई अखिलेश की कोशिशें, बिजली क्षेत्र में नई क्रांति के दौर में उत्तर प्रदेश

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April 13, 2016

बिजली क्षेत्र में नई क्रांति के दौर में उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मानना है कि यूपी में बिजली का इंतजाम सब जगह हो जाए तो उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार की वापसी तय है। सरकार भले ही किसी की बने, लेकिन उत्तर प्रदेश में हर जगह बिजली पहुंचाने का उनका सपना क्या यूं ही तैयार हो गया? निश्चित तौर पर इसका जवाब नहीं में है। साल 2012 से ही उत्तर प्रदेश में बिजली की आपूर्ति को बढ़ाने के लिए समाजवादी पार्टी ने जिस ठोस नीति के साथ काम करना शुरू किया, उसी का नतीजा है कि मुख्यमंत्री अब बिजली के सहारे सत्ता की नई ऊंचाई छूने की तैयारियों में जुट गए हैं। पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों की जगह सौर ऊर्जा अपनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि धरती और हमारा कल दोनों सुरक्षित रहे। वैसे भी प्रदेश में हर जगह बिजली पहुंचाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सीएम ने ऊर्जा विभाग के बजट को 9000 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 66 हजार करोड़ रुपये कर दिया है।

विद्युत उपलब्धता दोगुनी से अधिक

सरकार की कोशिशों का ही नतीजा है कि प्रदेश में औसत बिजली की उपलब्धता वर्ष 2007 में 5700 मेगावाट, वर्ष 2012 में 8400 मेगावाट तथा 2016 में 13500 मेगावाट रही है। अक्टूबर 2016 में यह उपलब्धता बढ़कर 17500 मेगावाट हो जाएगी। इस तरह विगत 65 वर्षों (आजादी से 2012 की अवधि) में जितनी विद्युत उपलब्ध थी, वह वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अक्टूबर 2016 तक में ही लगभग 9000 मेगावाट से अधिक हो जायेगी। इस तरह सरकार के वर्तमान कार्यकाल में विद्युत उपलब्धता बढ़ाकर दोगुनी से अधिक हो जायेगी। फरवरी 2012 में औसत प्रतिदिन विद्युत आपूर्ति 193.6 मिलियन यूनिट थी जो फरवरी 2016 में 249.6 मिलियन यूनिट हो गयी। अब बिजली की उपलब्धता 11 हजार मेगावाॅट से बढ़ाकर 21 हजार मेगावाॅट करने की तैयारी है।

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बिजली सप्लाई में 30 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि

बिजली के पारंपरागत  स्रोत को मजबूत बनाने के साथ राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का काम तेजी से किया है। वहीं सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का नतीजा हुआ है कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में सौर ऊर्जा का उत्पादन पहले के मुकाबले 10 गुना बढ़ा है। जून 2012 में औसत प्रतिदिन बिजली सप्लाई 239.6 मिलियन यूनिट थी, जबकि जून 2015 में 303.9 मिलियन यूनिट को बिजली सप्लाई सुनिश्चित की गई, बिजली सप्लाई में 30 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि  हुई है। इतना ही नहीं, प्रदेश में 2012 में जहां 8500 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था, वहीं अक्टूबर 2016 तक 17500 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो सकेगी। वहीं पिछले एक वर्ष में प्रदेश में 30 लाख से अधिक परिवारों को बिजली कनेक्शन दिए गए हैं। ये परिवार आज तक बिजली से महरूम थे।

और अब अक्टूबर से 24 घंटे बिजली की तैयारी

मुख्यमंत्री ने अक्टूबर 2016 से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों को 16 घंटे तथा महानगरों को 24 घंटे की सुचारू विद्युत आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। इससे जहां प्रदेश में उद्योग-धन्धों एवं कृषि कार्य को पर्याप्त बिजली मिलेगी, वहीं राज्य के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्र रौशन होंगे। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सरकार बड़े पैमाने पर विद्युत उत्पादन, पारेषण एवं वितरण क्षेत्र में बुनियादी सुविधाआंे का विकास कर रही है।

9 ट्रांसमिशन उपकेंद्रों को चालू किया गया

मार्च 2016 तक 9 ट्रांसमिशन उपकेंद्रों को चालू कर एक नया आयाम स्थापित किया है। इससे बिजली कटौती की समस्या दूर होगी। 09 ट्रांसमिशन ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर में 765 केवी, बुलन्दशहर के सिकन्दराबाद में 400 केवी, लखीमपुर खीरी के निघासन में 220 केवी, उन्नाव के मौरावां में 132 केवी, जालौन के उरई में 132 केवी, औरैया में 132 केवी, संतकबीरनगर के नाथनगर में 132 केवी, कौशाम्बी के भरवारी में 132 केवी और हापुड़ के पिलखुआ में 132 केवी के उपकेंद्र स्थापित किए गए है। इन उपकेंद्रों की स्थापना से विद्युत व्यवस्था में गुणात्मक बदलाव आएगा। साथ ही लो-वोल्टेज की समस्या से निदान मिलेगा और विद्युत आपूर्ति में सुधार होगा।

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एलईडी बल्ब से खपत हुई कम

इसके अलावा, बिजली की खपत कम करने के लिए एलईडी बल्बों के वितरण को प्रभावी बनाया गया है। एलईडी बल्बों के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर बिजली की खपत में करीब आठ फीसदी तक कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है। अब सस्ती एलईडी ट्यूब लाइट बाजार में उतारने की तैयारी है। इस ट्यूब लाइट की कीमत 100 रुपये से कुछ ज्यादा रखने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही प्री-पेड मीटरों के इस्तेमाल को प्रभावकारी बनाते हुए बिजली चोरी रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए है। इन सभी कार्यक्रमों के दूरगामी परिणाम दिखने भी लगे है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में बिजली आपूर्ति में काफी सुधार हुआ है। प्रदेश सरकार ने खेतों में सिंचाई और अस्पतालों में समुचित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अलग से फीडर स्थापित किए हैं।

अप्रैल से कम हुआ बिजली बिल

यूपी के डेढ़ करोड़ से ज्यादा शहरी बिजली उपभोक्ताओं को अप्रैल से बिजली बिल कम देंगे। बिजली बिल पर लगने वाले दोहरे रेग्युलेटरी सरचार्ज से उपभोक्ताओं को निजात मिल गई है। अब केवल एक सरचार्ज ही देना होगा।

मुख्यमंत्री की उम्मीद के पीछे ये भी हैं वजहें

  • प्रदेश को निजी क्षेत्र की बारा, ललितपुर व श्रीनगर विद्युत परियोजनाओं से 4000 मेगावाट तथा राज्य सेक्टर की अनपरा डी-परियोजना से 1000 मेगावाट बिजली अक्टूबर, 2016 से मिलने की आशा है।
  • तहसील स्तर पर 2014-15 में 33/11 के0वी0 के कुल 201 नये विद्युत वितरण उपकेन्द्रों का निर्माण कराया जा रहा है, जिनमें से 108 केन्द्र पूर्ण हो चुके है।
  • वर्ष 2016 तक सभी को बिजली उपलब्ध कराने के लिए 23 हजार करोड़ रुपये से ऊर्जा सेक्टर के ढांचे का सृदृढ़ीकरण किया जा रहा है।
  • उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लि0 (राज्य सरकार का उपक्रम) की प्रथम सुपर क्रिटिकल इकाई 8 * 660 मेगावाट हरदुआगंज तापीय विस्तार परियोजना-।। कासिमपुर अलीगढ़ का शिलान्यास किया जा चुका है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्माणाधीन अन्य परियोजनाओं में 1 * 660 मेगावाट पनकी (कानपुर) सुपर क्रिटिकल तापीय विद्युत परियोजना तथा 2*660 मेगावाट ओबरा सी (सोनभद्र) प्रगति के विभिन्न चरणों में है।
  • 2 * 660 मेगावाट करछना (इलाहाबाद) सुपर क्रिटिकल तापीय विद्युत परियोजना। 2 * 660 मेगावाट जवाहरपुर (एटा) सुपर क्रिटिकल तापीय विद्युत परियोजना।
  • सरकार द्वारा सयुंक्त क्षेत्र में दो परियोजनाएं – एनटीपीसी के साथ 2 * 660 मेगावाट मेजा (इलाहाबाद) में सुपर क्रिटिकल तापीय विद्युत परियोजना तथा दूसरी एनटीपीसी और नेवेली लिगनाइट के साथ के 3 * 660 (1980) मेगावाट घाटमपुर (कानपुर देहात) सुपर किटिकल तापीय विद्युत परियोजना संचालित की जा रही है।

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