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5 करोड़ पौधे लगाकर एक बार फिर इतिहास रच रहे सीएम अखिलेश

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July 11, 2016

दुर्लभ संयोग ही तो है ये जब एक ओर पूरी दुनिया विश्व जनसंख्या दिवस मनाकर बढ़ती आबादी की जरूरतों पर मंथन कर रही है तो ठीक उसी मौके पर उत्तर प्रदेश में आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरा-भरा पर्यावरण देने के लिए इतिहास रचा जा रहा है। कहते भी तो हैं- एक वृक्ष सौ पुत्र समान। पर्यावरण को संवारने और उसके संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश में पिछले चार वर्षों में बेहतरीन काम किए गए हैं। इससे पहले ही पिछले वर्ष एक ही दिन में दस अलग-अलग स्थानों पर 10 लाख से अधिक पौधे लगाकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को यूपी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने का सम्मान प्राप्त हुआ था, अब क्लीन यूपी, ग्रीन यूपी अभियान के तहत 11 जुलाई को पूरे उत्तर प्रदेश में 6161 जगहों पर 24 घंटे के दौरान 5 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाकर नया विश्व कीर्तिमान बनाया जा रहा है।

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मुख्यमंत्री अखिलेश ने यादव कानपुर देहात के रसूलाबाद से इस अभियान की शुरुआत की। जबकि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव लखनऊ के कुकरैल में पौधे लगाकर इस अभियान का हिस्सा बने। पौधे लगाये जाने को लेकर वन विभाग की ओर से प्रमुख सचिव वन संजीव सरन ने बताया कि यह अभियान 11 जुलाई को सुबह 10 बजे से शुरू हुआ। अभियान के तहत 24 घंटों में 6161 जगहों पर पांच करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है। इस पूरे अभियान की निगरानी द एनर्जी एंड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट दिल्ली (टेरी) और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के ऑडिटर की ओर से की जा रहा है। वन विभाग के सचिव सुनील कुमार ने बताया कि इस अभियान में कई किस्म के पौधे लगाये जायेंगे, इन पौधों को तीन से 12 फुट नीचे रोपा जायेगा। इसके लिए दो लाख से अधिक मजदूरों को लगाया गया है। पौधे लगाने से पहले और बाद में इसकी मानिटरिंग भी की जाएगी।

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उत्तर प्रदेश सरकार की ऐसी कोशिशों को ही नतीजा है कि प्रदेश में फारेस्ट कवर लगातार बढ़ रहा है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 2015 में यूपी में फॉरेस्ट कवर 112 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। वहीं, 261 वर्ग किलोमीटर ग्रीन कवर भी बढ़ा है। मुख्य सचिव प्रवीर कुमार ने कहा- 11 जुलाई को एक कीर्तिमान स्थापित होने जा रहा है। एक ही दिन पांच करोड़ पौधों का रोपण किया जाएगा। पिछली बार 7 नवंबर, 2015 को जब पौधरोपण हुआ था, तब 10 लाख 53 हजार पौधे लगाए गए थे। इस बार फिर 5 करोड़ पौधे लगाने का अभियान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रेरणा से शुरू हुआ है और इसको काफी अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश में 21 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। इस तरह से हरितक्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि हुई है। प्रवीर कुमार ने कहा कि पौधारोपण के दौरान पूरी तरह से पारदर्शिता बरती जा रही है। इसमें 950 नर्सरी की मदद ली जा रहा है। इतने बड़े पैमाने पर पौधे लगाकर बनाए जा रहे विश्व कीर्तिमान के चलते गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम भी यूपी में मौजूद रहेगी। वह इस पर नजर रखेगी। इस टीम ने गड्ढों का वेरिफिकेशन कर लिया है।

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इस अभियान के तहत मुख्यतः शीशम, सागौन, नीम, कंजी, अर्जुन, इमली, गूलर, महुआ, जामुन जैसी प्रजातियों के साथ-साथ बेल, बहेड़ा, हरड़, पीपल, पाकड़ आदि परम्परागत प्रजातियों के पौधे भी लगाए जा रहे हैं। लगाए जा रहे 5 करोड़ पौधों द्वारा भविष्य में किए जाने वाले कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन का आकलन टेरी के माध्यम से कराया जा रहा है। वहीं कार्यक्रम में जनसहभागिता सुनिश्चित करने के लिए हर रोपण स्थल को एक शिक्षण संस्थान या स्वयंसेवी संस्थान से जोड़ गया है ताकि पौधों का विकास और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इसके अतिरिक्त पूरे प्रदेश में आम नागरिकों, सैन्य व अर्ध सैन्य बलों और एनसीसी कैडेटों, एनएसएस स्वयंसेवकों, ग्रामीणों तथा अन्य लोगों को भी इस अभियान का अंग बनाया गया है। इसी क्रम में 4 जुलाई को प्रदेश के समस्त विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण के संबंध में शपथ भी दिलाई गई थी।

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ग्रीन यूपी, क्लीन यूपी अभियान के तहत अखिलेश सरकार इससे पहले भी कई उल्लेखनीय कार्य कर चुकी है। हर जनपद में हरित पट्टियों का विकास, ईको पर्यटन नीति लागू करना, कई शहरों में साइकिल टैक्स का निर्माण पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में अहम कदम साबित हुए हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देशन में राज्य सरकार के कार्यक्रमों का ही नतीजा है कि राज्य पक्षी सारस और राष्ट्रीय जलीय जीव डाल्फिन की संख्या में बढोतरी हो रही है।

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इतना ही नहीं प्रकृति के साथ जीव- जंतुओं के संरक्षण की दिशा में भी अखिलेश सरकार की ओर से विशेष प्रयास किए गए हैं। 20 मार्च 2016 को पूरे उत्तर प्रदेश में विश्व गौरैया संरक्षण दिवस के अवसर पर कार्यक्रमों का आयोजन कर गौरैया को लुप्त होने से बचाने की दिशा में अहम प्रयास किए गए। वहीं यूपी में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर के बर्ड फेस्टिवल का आयोजन किया गया। बर्ड फेस्टिवल के अवसर पर हर जनपद में आयोजित बर्ड वाचिंग में सर्वाधिक व्यक्तियों द्वारा पक्षियों को देखने पर इस अभियान को भी लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान दिया गया है। वहीं सरकार कछुओं और घड़ियाल के संरक्षण की दिशा में बेहतरीन काम कर रही है।

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