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अक्षय ऊर्जा के जरिए सीएम अखिलेश ने तैयार किया बुंदेलखंड की आर्थिक प्रगति का रास्ता

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बुंदेलखंड पिछले एक दशक से सूखे से जूझ रहा है। इतने लंबे समय तक आपदा से पीड़ित होने से निश्चित तौर पर वहां की समस्याएं भी विकट हैं, पर सुखद संकेत यह है कि उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार की ओर से बुंदेलखंड के लिए चलाई जा रही योजनाओं से भविष्य में यह क्षेत्र आर्थिक विकास की राह पर तेजी से बढ़ सकता है। यह संभव होने जा रहा है उत्तर प्रदेश सरकार की सोलर पावर पॉलिसी 2013 से। चूंकि बुंदेलखंड में पर्याप्त भूमि है और अच्छी मात्रा में सौर विकिरण प्राप्त होती है, इसलिए यह सौर ऊर्जा क्षेत्र के लिए आदर्श स्थान है। सोलर पावर पॉलिसी के तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी क्षेत्र की मदद से अक्षय ऊर्जा में इजाफा करने और ग्रिड सोलर पावर में 500 मेगावॉट तक का इजाफा करने का लक्ष्य रखा है। इसका सर्वाधिक फायदा बुंदेलखंड क्षेत्र को हो रहा है। सोलर पावर पॉलिसी के तहत सरकार बुंदेलखंड में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजना बना रही कंपनियों को रियायत दे रही है। अब तक सरकार ने सौर ऊर्जा के लिए कई निजी कंपनियों के साथ बिजली खरीद समझौते (पीपीए) किए हैं।

दुनिया में सौर ऊर्जा के बड़े इस्तेमाल को देखते हुए उत्तर प्रदेश में भी इस पर लगातार काम हो रहा है। इसके लिए सौर ऊर्जा और रूफटॉप सोलर फोटोवाल्टाइक पावर प्लांट नीति लागू की प्रदेश में सोलर पार्क बनाने के लिए राज्य सरकार ने जमीन उपलब्ध करवाई है। इस तरह सौर ऊर्जा योजनाओं के मामले में देश भर में यूपी सबसे आगे है।

बुंदेलखंड क्षेत्र में सात जिले शामिल हैं। लगातार सूखे की वजह से ड्राई जोन कहे जाने वाले इस क्षेत्र में बंजर भूमि और कम कृषि उत्पादन जैसी समस्याओं के साथ लोगों को पेयजल की समस्या से भी दो चार होना पड़ रहा था। ऐसे में सरकार ने अपने बजट का मुंह बुंदेलखंड की ओर मोड़ा और इस क्षेत्र में पानी समस्या दूर करने के साथ दूरगामी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया। इसमें अक्षय ऊर्जा से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष जोर दिया गया। इसके फलस्वरूप न सिर्फ बुंदेलखंड की मौजूदा दिक्कतें दूर हो रही हैं, बल्कि ऐसे कार्यक्रमों की बदौलत वर्षों से पिछड़पन का अभिशाप झेल रहे इस क्षेत्र की आर्थिक प्रगति का भी रास्ता तैयार हो गया है।

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बुंदेलखंड में कृषि और सौर ऊर्जा पर खास फोकस

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यहां विभिन्न समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एक मूल योजना तैयार की है। सरकार ने स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए कृषि और सौर ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे कि लोगों का पलायन रोका जा सके और दीर्घावधि विकास की रफ्तार को मजबूत बनाया जा सके। इसके अलावा खनन क्षेत्र भी ध्यान दिया जा सकता है। वहीं, उत्तर प्रदेश में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अगले कुछ वर्षों में कई कंपनियों से लगभग 40,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने का अनुमान है।

1200 हेक्टेयर में सोलर प्लांट्स स्थापित करने की सम्भावना 

उत्तर प्रदेश में अक्षय ऊर्जा संभावनाओं के दोहन के लिए रूपरेखा नाम से एसोचैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने इस मकसद के लिए बुंदेलखंड में लगभग 1200 हेक्टेयर भूमि की पहचान की है, जिसमें ज्यादातर भूमि बंजर और गैर-कृषि भूमि है। बुंदेलखंड में ललितपुर, झांसी, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और चित्रकूट जिले शामिल हैं। जनवरी 2016 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड के जालौन जिले में 50 मेगावॉट क्षमता के विद्युत संयंत्र का उद्घाटन किया था।

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अक्षय ऊर्जा नीति से दूर होगा यूपी का बिजली संकट

एसोचैम की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्षय ऊर्जा नीति से न सिर्फ पूरे यूपी में बिजली की समस्या दूर होगी, बल्कि बुंदेलखंड का संकट भी दूर होगा और वह विकास की मुख्यधारा से जुड़ेगा। एसोचैम के राष्ट्रीय महासचिव डीएस रावत ने यह अध्ययन पत्र जारी करते हुए कहा कि ‘‘उत्तर प्रदेश में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये सम्पूर्ण संसाधन क्षमता पर आधारित अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास के लक्ष्यों से युक्त एक स्पष्ट कार्ययोजना बनाना लाजमी है।’’ उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 तक सौर ऊर्जा से 10 हजार 697 मेगावाट, बायोमास पुनरुत्पादन से 3500 मेगावाट तथा लघु पन बिजली परियोजना से 25 मेगावाट समेत कुल 14 हजार 194 मेगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इस प्रकार सौर ऊर्जा क्षेत्र की वास्तविक सम्भावनाओं के अनुकूलतम दोहन के लिये बहुत बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी।’’

एसोचैम के सुझावों पर अमल

एसोचैम ने प्रदेश सरकार को सुझाव दिया कि प्रदेश की अक्षय ऊर्जा नीति ऐसी हो जो नेट मीटरिंग, छतों पर सौर संयंत्र लगवाने के लिये फीड-इन टैरिफ, ग्रिड एकीकरण तथा निकासी, पुनर्संरचित तथा प्रवर्तनीय अक्षय खरीद दायित्व (आरपीओ) जैसे जटिल पहलुओं पर सार्थक योजना पेश करती हो। एसोचैम ने प्रदेश सरकार को ‘कुकिंग एनर्जी मिशन’ (पाक ऊर्जा अभियान) शुरू करने और एक ऐसी राज्यस्तरीय कार्ययोजना लागू करने का भी सुझाव दिया, जो शहरी तथा अविद्युतीकृत ग्रामीण घरों में बिजली पहुंचाने के लक्ष्यों पर आधारित हो। ये वे ही सुझाव हैं, जिस पर प्रदेश सरकार काम कर रही है।

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अखिलेश सरकार ने बनाई कम लागत, ज्यादा निवेश की नीति

बुंदेलखंड और पूर्वांचल में सौर ऊर्जा की परियोजनायें स्थापित करने पर सब स्टेशन तक अथवा इन्टरकनेक्शन प्लान्ट तक पारेषण लाइन का समस्त व्यय प्रदेश सरकार द्वारा उठाया जा रहा है, इससे परियोजना की लागत कम हो रही है और अधिक निवेश हो रहा है। सरकार ने व्यवस्था की है कि सोलर फार्म जिसमें एक से अधिक संख्या सोलर पावर परियोजनाओं की स्थापना होंगी, उसमें कुल पूंजी निवेश 500 करोड़ रुपये से अधिक होने पर विशेष प्रोत्साहन केस-टू-केस के आधार पर दिये जाएं। इस नीति के अंतर्गत स्थापित होने वाले सभी सोलर पावर प्लांट को औद्योगिक इकाई मानते हुए उसे राज्य की औद्योगिक नीति 2012 की के अंतर्गत सभी सुविधाएं दी जा रही हैं।

जगमग हो रहा बुंदेलखंड

जहां तक बुंदेलखंड की बात है तो यूपीनेडा और एनएचपीसी लिमिटेड ने मिलकर बुंदेलखंड सौर ऊर्जा लिमिटेड नामक संयुक्त उपक्रम गठित किया है। इससे माध्यम से नेडा के पास ग्राम परासन जनपद जालौन में उपलब्ध 112.32 हेक्टेयर भूमि पर 50 मेगावाट क्षमता की सौर पावर परियोजना की स्यापना की गई है।

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रूफटॉप सोलर पावर पॉलिसी

राज्य सरकार पहले ही निर्वाध विद्युत आपूर्ति के लिए निजी ⁄सरकारी भवनों और औधोगिक प्रतिष्ठानों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों औउ भवनों की छतों पर रूफटॉप सोलर फोटोवोल्टाइक पावर प्लान्ट्स की स्थापना करा रही है। इन प्लांटों से उत्पादित बिजली का उपयोग बिल्डिंग में उपभोक्ताओं द्वारा किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार तो इस से एक कदम आगे निकल रही है और इस के लिए वह नैट मीटर सिस्टम शुरू कर रही है. इस सिस्टम से उत्पादक अपनी छत पर पैदा की गई बिजली को ऊर्जा वितरण कंपनी को बेच सकेगा. इस व्यवस्था के लागू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा बेचने वाला देश का पहला राज्य बन सकता है.

सौर ऊर्जा उपकरण सस्ते

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सौर ऊर्जा के उपकरणों को वैट से मुक्त करने का एलान किया है। इससे सौर ऊर्जा उपकरणों की कीमत में 5 फीसदी तक कमी हुई है। पहले सौर ऊर्जा के उपकरणों की खरीद पर 5 फीसदी वैट देना होता है। यानी 100 रुपये की सोलर टॉर्च की कीमत में 5 रुपये वैट जुड़ा होता  था। वैट मुक्ति के बाद अब 5 हजार रुपये कीमत वाले सौर ऊर्जा के गीजर की कीमत 250 रुपये तक कम हो गई है। वैट के दायरे से सौर ऊर्जा परियोजना में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के साथ ही सौर ऊर्जा से चलने वाले पंखे, लाइट, गीजर और चूल्हे समेत दर्जन भर से ज्यादा उपकरण सस्ते हो गए हैं। अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में ऐसी योजनाओं से न सिर्फ बुंदेलखंड का विकास होगा, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश का भी भला होगा। साथ ही प्रयावरण संरक्षण से विशेष सहायता मिलेगी।

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