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डॉ. अम्बेडकर के सपनों को साकार कर रहे हैं सीएम अखिलेश यादव

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समाज के हर वर्ग के बीच स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा का सन्देश देने वाले बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के प्रयासों को भारत का कोई नागरिक नहीं भुला सकता है। उत्तर प्रदेश में उनके इसी सपने को साकार करने का काम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कर रहे हैं। जहां डॉ. राम मनोहर लोहिया और मुलायम सिंह यादव ने हमेशा दलित समाज के पक्ष में आवाज उठाई है। वहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दलितों के हित की तमाम योजनाएं तथा नीतियां उत्तर प्रदेश में लागू की हैं। उनके नेतृत्व में समाजवादी सरकार ने सामाजिक असमानता दूर करने और दलितों व पिछड़ों को विशेष अवसर देने के सिद्धांत पर हमेशा काम किया है। दलित भी यह समझते हें कि उनके हितों का संरक्षण समाजवादी सरकार के द्वारा ही सम्भव है। इस बात की तस्दीक डॉ. अम्बेडकर के पौत्र राज रत्न अम्बेडकर ने भी समाजवादी पार्टी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपना समर्थन देकर कर दी है। राज रत्न अम्बेडकर भारतीय बौद्ध महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष भी हैं।

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राज रत्न अम्बेडकर का सीएम अखिलेश यादव के प्रति झुकाव यूँ ही नहीं है। दरअसल उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में दलित, शोषित और वंचितों के उत्थान के लिए जितने कार्य हुए उतना पहले की सरकारों में नहीं हुआ। अखिलेश यादव एक संवेदनशील मुख्यमंत्री के तौर पर दलित समाज की उन्नति और प्रगति के लिए सतत प्रयत्नशील रहते हैं। वे इस बात पर बल देते हैं कि समाज में जब तक विषमता रहेगी, ऊँच-नीच का भेद रहेगा, तब तक प्रदेश को आदर्श प्रदेश नहीं बनाया जा सकेगा। इसलिए वे हर क्षण समग्रविकास की हर गतिविधि पर स्वयं नजर रखते हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मानना है कि दलित समाज का कल्याण उनके शिक्षित हुए बिना नहीं हो सकता है। बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर भी यही सिखाते थे कि समाज में अपना स्थान पाने के लिए शिक्षित होना बहुत जरूरी है।

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वहीं अन्य राजनीतिक दलों ने, चाहे वो बसपा हो या भाजपा, बाबा साहब के नाम का इस्तेमाल कर दलितों को वोट बैंक मानकर उनका शोषण ही किया। इसी हथकंडे का इस्तेमाल कर दलित की बेटी मायावती मुख्यमंत्री बन तो गईं लेकिन दलितों की भलाई और उन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने का कभी काम नहीं किया। अब तो उनकी पार्टी छोड़कर जाने वाले नेता भी कहने लगे हैं कि मायावती ‘दलित की बेटी’ नहीं ‘दौलत की बेटी’ हैं।

सुखद पहलू ये हैं कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी सरकारों ने हमेशा ही दलितों की मदद की। मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल में दलित समुदाय के बच्चों की शिक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। तब 167 लाख दलित बच्चो को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें दी गई। अनुसूचित जाति के पूर्वंदशम और दशमोत्तर कक्षाओं में अध्ययन करनेवाले छात्रों को छात्रवृत्तियां दी गईं। दलित समाज की बेटियों की शादी के लिए 10 हजार रुपये और उनके परिवारीजनों के इलाज के लिए 2 हजार रुपये की व्यवस्था की गई।

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प्रदेश में जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में दोबारा बहुमत की समाजवादी सरकार बनी तो दलित समाज की बेहतरी के लिए और बेहतर नीतियां और कार्यक्रम बनाए गए। अनुसूचित जाति व जनजाति को दशमोत्तर कक्षाओं में अध्ययनरत 2 लाख रुपये की आयसीमा तक के अभिभावकों के आश्रित छात्रों के लिए छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति नियमावली जारी की गई और उसके ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने की अनिवार्य प्रक्रिया आरम्भ की गई। दलित छात्रों को एकमुश्त अनुदान में 750 रुपये वार्षिक भुगतान की व्यवस्था भी की गई। सीएम अखिलेश यादव की सरकार में प्रदेश के अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा में प्रोत्साहन के लिए निःशुल्क आवासीय सुविधा प्रदान की गई। अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को आईएएस और पीसीएस की मुख्य परीक्षा हेतु कोचिंग व्यवस्था की गई।

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अखिलेश सरकार द्वारा जारी समाजवादी पेंशन योजना का सबसे ज्यादा लाभ दलितों को हुआ है। अखिलेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे तमाम गरीब परिवार हैं जिनके पास आय के उपयुक्त साधन नहीं हैं। इनमें दलितों की आबादी सर्वाधिक है। ऐसे परिवारों के जीवनयापन, आर्थिक एवं सामाजिक उन्नयन अखिलेश यादव ने ‘समाजवादी पेंशन योजना’  की शुरुआत की। इस योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया को 500 रुपये प्रतिमाह ई-पेमेंट के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। समाजवादी पेंशन योजना द्वारा प्रदेश स्तर पर 55 लाख परिवारों के तहत प्रत्येक परिवार के एक लाभार्थी को लाभान्वित किया जा रहा है।

लोहिया ग्रामीण आवास योजना का भी सबसे ज्यादा लाभ दलितों को हुआ है। गरीब परिवारों के लिए रोटी, कपड़ा की जरूरत के बाद सबसे जरूरी होता है मकान। अखिलेश यादव सरकार नि:शुल्क लोहिया आवास की सुविधा देकर उनकी इस जरूरत को भी पूरा कर रही है। ऐसे परिवार जिनकी सालाना आय 36000 रुपये से कम है, सरकार उन्हें लोहिया ग्रामीण आवास की सुविधा दे रही है। सुखद बात ये हैं कि इस योजना का लाभ भी ज्यादातर दलित और पिछड़ा वर्ग के परिवारों को मिल रहा है।

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जनेश्वर मिश्र ग्राम विकास योजना ऐसे गांवों का चयन किया गया। जिसमें गरीब और दलितों की आबादी ज्यादा रही है। जो ज्यादा पिछड़े रहे हैं। ऐसे गांवों का विकास कार्य इससे पहले की सरकारों ने नहीं किया था। इन चयनित ग्रामों में मुख्य रूप से सीसी रोड व नाली का कार्य कराने का काम हुआ। इस योजना के तहत तकरीबन 5 हजार से ज्यादा गांवों का विकास करने का काम हुआ है।

इस बार भी समाजवादी पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में सामाजिक समानता लाने पर बल दिया है। पार्टी के घोषणा पत्र के अनुसार विभिन्न प्रकार की सामाजिक समस्याओं एवं असमानताओं को दूर करने के लिए पार्टी आने वाले समय में ‘उत्तर प्रदेश सामाजिक न्याय आयोग’ का गठन किया जाएगा। जो दलितों और समाज के हाशिये पर रह रहे लोगों के उन्नयन व उत्थान के लिए काम करेगी। वहीं सरकार अपरिभाषित जनजातियों की जांच कराकर उनको परिभाषित सूची में लाने का कार्य भी करेगी।

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