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रथयात्रा स्पेशल : प्रगति के साथ प्रकृति का ख्याल रख कर अखिलेश ने देश को दिया विकास का अनूठा एजेंडा

akhilesh

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12 November 2016

दिल्ली, लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में आसमान में छाया जहरीला धुंध इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। वर्षों से वातावरण के साथ किए जा रहे खिलवाड़ और पर्यावरण संरक्षण की अनदेखी के जबाव में प्रकृति की यह स्पष्ट चेतावनी है। इस वर्ष फरवरी के अंतिम सप्ताह में चीन की राजधानी बीजिंग में प्रदूषण के भयावह स्तर को दृष्टिगत करते हुए आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी। स्कूल, कॉलेजों की भी छुट्टी करनी पड़ गई। दरअसल  चीन की मियू नदी में इतना अधिक दूषित तेल प्रवाहित किया जा रहा था कि एक दिन उसमें आग लग जाने से पूरी नदी ही सुलगने लगी और आसमान जाग्रीले धुंए से भर गया। भले ही भारत में ऐसे हालात अभी नहीं हुए हैं, लेकिन जिस तरह से प्रकृति की अनदेखी हो रही है, उसमें कई-कई दिनों आसमान में धुंध छा जाना बड़ी चेतावनी है। जन सामान्य का इसे लेकर जागरूक होने तो बेहद आवश्यक तो है ही, साथ ही सरकारी मशीनरियों को भी प्रभावी कदम उठाने पड़ेंगे। यहां एक बात भी समझने की जरूरत है कि इसके लिए एक देश या राज्य में ही सिर्फ सार्थक पहल होना जरूरी नहीं है, बल्कि हर एक को- चाहे वो कोई देश, राज्य, क्षेत्र या समाज हो, आगे आना होगा। क्योंकि प्रकृति को होने वाले नुकसान का असर व्यापक होता है। एक जगह हो रहे पर्यावरण प्रदूषण से दूसरा स्थान भी प्रदूषित होता है।

Clean UP Green UP

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राहत की बात यह है कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार बनने के बाद से इस दिशा में ठोस कार्य किए जा रहे हैं। प्रगति के साथ प्रकृति का ख्याल रखने को अखिलेश यादव ने प्रदेश के विकास का अपना मूल मंत्र बनाया है। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने प्रदेश के विभिन्न शहरों में साइकिल टैक्स बनावाए तो मुफ्त ई-रिक्शा वितरण कर प्रदूषण रोकने का काम किया है। दूसरी और पॉलीथिन के उपयोग पर पाबंदी लगाकर भी आने वाले पीढ़ियों के लिए बेहतरीन आबोहवा देने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है। अखिलेश सरकार की इन कोशिशों का ही नतीजा है कि प्रदेश में फारेस्ट कवर लगातार बढ़ रहा है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार 2015 में यूपी में फॉरेस्ट कवर 112 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है। वहींए 261 वर्ग किलोमीटर ग्रीन कवर भी बढ़ा है। इसके अलावा मेट्रो को बढ़ावा दे कर भी उन्होंने यातायात से होने वाले प्रदुषण को रोकने की अहम पहल की है. तो सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे कर पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

 

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दरअसल पर्यावरण को संवारने और उसके संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश में चार वर्षों से लगातार बेहतरीन काम हो रहे हैं। क्लीन यूपी, ग्रीन यूपी अभियान के तहत 11 जुलाई 2016 को जहां पूरे उत्तर प्रदेश में 6161 जगहों पर 24 घंटे के दौरान 5 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाकर विश्व कीर्तिमान बनाया। तो उससे पहले भी पिछले वर्ष एक ही दिन में दस अलग-अलग स्थानों पर 10 लाख से अधिक पौधे लगाकर यूपी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने का गौरव भी हासिल किया।

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जनसामान्य की सुविधाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल करते हुए लखनऊ, आगरा और नोएडा में साइकिल ट्रैक्स का निर्माण कराया गया है। मकसद यह है कि उत्तर प्रदेश की जनता को यातायात का स्वास्थ्यप्रद और सबसे सस्ता माध्यम मिल सके। साथ ही शहरों में बढ़ रहे प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। तो दूसरी ओर, निःशुल्क ई रिक्शा वितरण योजना के रूप में भी पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण दूर करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की गयी है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मकसद रिक्शा चालकों की सेहत का ख्याल रखते हुए वातावरण को बेहतर बनाया जा सके।  पर्यावरण और जन सामान्य के स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में पॉलीथिन के कैरी बैग, पॉलीथिन के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस आदेश के तहत राज्य में न सिर्फ पॉलिथीन के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है, बल्कि उसके निर्माण, आयात, खरीद और प्लास्टिक कैरी बैग के सभी प्रकार के भंडारण पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

Romti River Front

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इसके  अलावा लखनऊ में जनेश्वर मिश्र पार्क का निर्माण भी प्रकृति को सँवारे की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है. तो दूसरी और उद्घाटन का इंतजार कर रही गोमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना लखनऊ के बाशिंदों को स्वच्छ और हराभरा गोमती तट मुहैया कराएगी। यहां गोमती नदी में प्रदूषण दूर करने के लिए सरकार ने ऐसे प्रयास किये हैं कि नदी में सीवेज का पानी नहीं गिरे। दूसरी ओर अखिलेश सरकार आने के महज दो साल में ही यानी 2013 तक 10ए000 गांवों में सौर ऊर्जा पहुंचाई गई। जबकि उससे पहले वर्ष 2010.11 में यह आंकड़ा 5000 था जो बढ़कर सिर्फ दो साल में 15000 हो गया। तीन वर्षों में पूरे प्रदेश में सौर ऊर्जा का उत्पादन पहले के मुकाबले 10 गुना हो गया है।

वर्तमान दौर में जब पूरी दुनिया में राजनीतिक दलों के बीच सतत विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा भी अहम होता जा रहा है तो ऐसे में भारत और भारत की सबसे बड़ी आबादी वाले उत्तर प्रदेश में यह मसला भी अहम हो जाता है। निश्चित तौर पर अखिलेश यादव इस दिशा में प्रभावी कदम उठाकर प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दे रहे हैं, लेकिन जनमानस को भी इससे जुड़कर पर्यावरण संरक्षण में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करना होगा। वक्त की यह मांग भी है।

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