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यूपी पुलिस की ट्विटर सेवा: शिकायतों का रियल टाइम समाधान, जवाबदेही, पारदर्शिता भी

डिजिटल सीएम अखिलेश की बड़ी पहल, उत्तर प्रदेश बना देश का पहला राज्य जहां ट्विटर से भी दर्ज होगी एफआईआर

2016-09-08

 

08 September, 2016

एक समय में जो भूमिका अखबारों और टीवी चैनलों की होती थी, वह अब सोशल मीडिया की हो चुकी है। मौजूदा दौर में सोशल मीडिया लोगों के जीवन का न सिर्फ अंग बन गया है, बल्कि लोग यहां मनोरंजन, वाद-विवाद और सूचनाओं का आदान-प्रदान भी करते हैं। विभिन्न स्तरों पर तो यह समस्याओं का रियल टाइम समाधान, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने और कार्यक्रमों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने का सबसे कामयाब माध्यम साबित हुआ है। जहां तक कानून व्यवस्था की बात करें तो पिछले कुछ वर्षों से अपराध के पैटर्न में बदलाव आया है, वहीं सूचना प्रौद्योगिकी खासतौर पर सोशल मीडिया में उनका बेहतर समाधान भी नजर आया है। उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने इसे बखूबी पहचाना है। भारत में डिजिटल सीएम के रूप में अलग पहचान बना चुके अखिलेश यादव ने इस कड़ी में अब यूपी पुलिस को सोशल मीडिया की ट्विटर सेवा से लैस करने की घोषणा की है। इसके माध्यम से लोग न सिर्फ घर बैठे पुलिस थानों में अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें, बल्कि ट्विटर पर दर्ज होने वाली शिकायतों का रियल टाइम समाधान और जिम्मेदारों की जबावदेही भी सुनिश्चित होगी।

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एक रिसर्च के अनुसार भारत में करीबन 20 प्रतिशत लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। ‘पीव रिसर्च सेन्टर’ द्वारा किए गए अध्ययन के मुताबिक, भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों में से 65 प्रतिशत ने बताया कि वे फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स का उपयोग करते हैं। वहीं Internet and Mobile Association of India की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में मोबाइल इंटरनेट यूजर्स की संख्या 159 मीलियन है, जो 2017 तक 300 मीलियन हो सकती है। और लगभग हर मोबाइल उपभोक्ता अपने स्मार्टफोन पर फेसबुक और ट्विटर का उपयोग करता है। ऐसे में आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में पुलिस की ट्विटर सेवा अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।

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आठ सितंबर से शुरू यूपी पुलिस की ट्विटर सेवा से अब आपको अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए न तो थाने के चक्कर लगाने पड़ेंगे और न ही शिकायतों पर हुई कार्रवाई के बारे में जानकारी के लिए दरोगा, एसपी से पैरवी करने की जरूरत होगी। इस सेवा को शुरू करने के साथ उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां ट्विटर के माध्यम से लोग पुलिस से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। हालांकि बेंगलुरू के कुछ हिस्सों में ये सुविधा मौजूद है, लेकिन पूरे प्रदेश में इसे लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य हैं।

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इस सेवा के जरिए राज्य के किसी भी जिले से की गई कंप्लेन पर 5 मिनट के अंदर कार्रवाई की जाएगी। देरी होने पर यूपी पुलिस ट्विटर कंट्रोल रूम से एसपी को री-ट्वीट करके जवाब मांगेगी। एसपी जिम्मेदार थानाध्यक्ष को मामला फॉरवर्ड करेंगे, फिर थानाध्यक्ष मौके पर टीम भेजेंगे। पूरी सूचना वापस एसपी को दी जाएगी। एसपी इस सूचना को यूपी पुलिस को फॉरवर्ड कर देंगे। फीडबैक को ट्वीट पोस्ट करने वाले को पुश किया जाएगा। यह प्रक्रिया सतत चलेगी और मामले का निस्तारण तुरंत करने में मदद मिलेगी। ट्विटर कंट्रोल में सर्वर में डैश बोर्ड प्लेटफॉर्म होगा। सभी शिकातयें इसमें सेव होती जाएंगी। जिसे हर अधिकारी अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड से संबंधित शिकायत को देख सकेंगे। सर्च ऑप्शन के जरिये जिले में शिकायतों के आंकड़े से लेकर उसके प्रकार और कार्रवाई संबंधी जानकारी उपलब्ध रहेगी।

डीजीपी के जनसंपर्क अधिकारी एडिश्नल एसपी राहुल श्रीवास्तव की मानें तो इस वक्त भी यूपी पुलिस के ट्विटर हैंडल पर रोजाना करीब 500-1000 शिकायतें आती हैं। अब ट्विटर सेवा शुरू होने पर शिकायतें भी बढ़ेंगी। ऐसे में सॉफ्टवेयर के जरिये इनका रिकॉर्ड बनाया जाएगा। साथ ही शिकायतों की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी। जबतक इन्हें निस्तारित नहीं किया जाता, इनका स्टेटस इनकम्प्लीट बताएगा। इससे जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय हो सकेगी। वहीं, ट्विटर पर अक्सर फैलाई जाने वाली अफवाहों पर भी इस सॉफ्टवेयर के जरिए नजर रखी जाएगी।

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कैसे काम करेगी पुलिस की ट्विटर सेवा

  • लोगों को बस अपनी शिकायत लिखकर यूपी पुलिस के ट्विटर हैंडल से उसे टैग करना होगा।
  • इसके बाद ट्विटर के माध्यम से ही शिकायत को सम्बन्धित जिलों में भेजा जायेगा।
  • हर शिकायत का एक कोड होगा, जिसके आधार पर शिकायत पर हो रही कार्रवाई का पता लगाया जा सकेगा।
  • इससे तुरंत पता लग सकेगा कि किस जिले में मुख्यालय से कितनी शिकायतें भेजी गईं और कितनी देर में उनका समाधान किया गया।
  • शिकायतों की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी।
  • जब तक शिकायत का निपटारा नहीं होगा तब तक उसका स्टेटस इनकम्प्लीट बताएगा।
  • ट्विटर पर फैलाई जाने वाली अफवाहों पर भी पुलिस सॉफ्टवेयर की मदद से नजर रखेगी।
  • शिकायतों का जल्द और समयबद्ध निस्तारण करने वाले जिलों को पुरस्कृत भी किया जायेगा।

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इससे पहले भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी इस दिशा में मॉडर्न कंट्रोल रूम से लेकर सर्विलांस और सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे कई पहल किए हैं। हाल में ही यूपी पुलिस ने अपनी वेबसाइट को नए कलेवर में लॉन्च किया है। साथ ही सोशल मीडिया के हैंडल्स फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप और इंस्टाग्राम को भी लॉन्च किया था। दरअसल सोशल मीडिया के जरिये यूपी पुलिस की खास मकसद जनता के दिलों से जुड़ना है। इसके अलावा वाट्सएप के जरिए अपनी लोकेशन मॉर्डन कंट्रोल रूम में भेज सकते हैं। इसकी मदद से पुलिस को रिस्पॉन्स देने में समय नहीं लगेगा।

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ये तो रही यूपी पुलिस की नई पहल की। लेकिन इसके अलावा अखिलेश सरकार में यूपी पुलिस ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों हासिल की हैं। यूपी पुलिस ने इन चार सालों में प्रो एक्टिव पुलिसिंग एवं कम्युनिटी पुलिसिंग पर विशेष बल दिया। इससे अपराधों में कमी के आई है। संवेदनशील स्थलों पर अब तक 406 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। प्रदेश के 262 थानों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना हेतु कार्यवाही की जा रही है। 15 नवम्बर 2012 को स्थापित वूमेन पावर लाइन 1090 प्रदेश के इतिहास में यह एक नयी मिसाल है। इस सेवा को और प्रभावी बनाने के लिए वीमेन सिक्योरिटी एप 1090 सेवा भी प्रारम्भ की गयी है। अब अखिलेश सरकार प्रदेश स्तरीय पुलिस इमरजेन्सी प्रबन्धन प्रणाली (पीईएमएस) डायल 100 परियोजना का आगाज करने जा रही है। डायल 100 परियोजना शुरू होने पर ग्रामीण इलाकों में 15 मिनट और शहरों में सूचना मिलने के दस मिनट के भीतर पुलिस घटनास्थल पहुंचेगी।

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इन सभी कार्यक्रमों के पीछे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की युवा और उर्जावान सोच है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के व्यक्तिगत ट्विटर हैंडल @yadavakhilesh पर काफी सक्रिय हैं। इस आठ सितंबर 2016 तक उनके 14 लाख 13 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स हो चुके हैं। इसके जरिए आम लोगों को न केवल मुख्यमंत्री से कनेक्ट करने का सजह रास्ता मिल गया है, बल्कि खुद अखिलेश सूचनाओं और जानकारियों पर तत्काल प्रतिक्रिया और निर्देश जारी कर रहे हैं। वह खुद दूसरे माध्यमों से साथ-साथ सोशल मीडिया के जरिये जहां लोगों से सीधे जुड़े रहे हैं, वहीं उनकी समस्याओं का त्वरित निस्तारण भी कर रहे हैं।

पिछले साल यानी 31 अगस्त 2015 की बात है। लखनऊ में शाम करीब छह बजे अलीगंज निवासी छात्रा इंजीनियरिंग कॉलेज की तरफ से पैदल आ रही थी। इसी दौरान बाइक सवार तीन लड़कों ने उससे छींटाकशी शुरू कर दी। छात्रा ने अपने साथ हुई घटना को ट्विटर पर पोस्ट किया। सीएम ऑफिस ने तत्काल इस शिकायत को संज्ञान में लेते हुए एसएसपी राजेश कुमार पांडेय को कार्रवाई के आदेश दिए। आनन-फानन तीन शोहदों को दबोचकर छात्रा के घर पर पेश किया गया।

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Photo_ pradesh18.com

गाजियाबाद के एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली महिला के साथ गाड़ी चेकिंग के नाम पर एक सिपाही ने अभद्रता की। जिससे आहत होकर महिला ने इसका वीडियो ट्विटर पर शेयर किया और सीएम अखिलेश यादव को टैग कर मदद की गुहार लगाई थी। वीडियो शेयर करने के बाद मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए पुलिस को अपना रवैया सुधरने का निर्देश दिया।

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एक बुजुर्ग टाइपिस्ट से पुलिस की बदसलूकी के मामले में यूपी सरकार ने बेहद काबिल-ए-तारीफ कदम उठाया। सोशल मीडिया से जानकारी पाते ही सीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर डीएम राजशेखर और एसएसपी ने पीड़ित के घर जाकर नया टाइपराइटर दिया और बदसलूकी के लिए माफी भी मांगी। सीएम के निर्देश पर आरोपी दरोगा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया।

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स्नैपडील की दीप्ति सरन का फरवरी में गाजियाबाद में अपहरण हो गया था। सोशल मीडिया पर चर्चा होते ही मुख्यमंत्री ने घटना का संज्ञान लिया और गाजियाबाद पुलिस को तत्काल एक्शन लेने के निर्देश दिए। साथ ही राज्य पुलिस मुख्यालय को दीप्ति का पता लगाने के पूरे ऑपरेशन पर नजर रखने को कहा। नतीजतन दीप्ति की सकुशल वापसी हुई और आरोपी दबोचे गए।

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