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उत्तरप्रदेश में कानून-व्यवस्था की नई परिभाषा ‘यूपी 100’ 

Chief Minister Akhilesh Yadav along with Cabinet Ministers Rajendra Chaudhry and Ahmad Hasan looks at the Live CCTV footage at the modernPolice control room in Lucknow on April 12, 2015.

उत्तरप्रदेश की कानून-व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए सीएम अखिलेश यादव ने जो सपना देखा था वो शनिवार यानि 19 नवंबर को हकीकत में तब्दील हो जाएगा। उस हकीकत का नाम डायल-100 है, जो अब ‘यूपी 100’ हो गया है। परियोजना के प्रमुख सूत्रधार और गृह विभाग के सलाहकार प्रोफेसर वेंकट चेंगावल्ली का मानना है कि प्रत्येक जिले में 100 नंबर की सुविधा पहले से ही सेवारत है। ऐसे में जब पूरे राज्य के लिए एक ही केंद्र है तब उसका नाम ‘यूपी-100’ होना चाहिए। परियोजना का प्रमुख उद्देश्य राज्य के नागरिकों को त्वरित एवं एकीकृत आपातकालीन सुविधा प्रदान करना है।

लखनऊ में कंट्रोल रूम

उत्तरप्रदेश की 22 करोड़ जनसंख्या को एक जगह से सुरक्षा देना चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेकिन सरकार ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए गोमती नगर विस्तार में यूपी-100 कंट्रोल रूम बनाने का फैसला लिया। पूरे प्रदेश में किसी भी जगह से 100 नम्बर डायल करने पर टेलीफोन कॉल सीधे इस केन्द्र को प्राप्त होगी। इस केंद्र से 4,800 पीसीआर वाहन जीपीएस (ग्लोबल पीजीशनिंग सिस्टम) से जुड़े रहेंगे। जिससे यह पता चल जाएगा कि पीड़ित व्यक्ति की लोकेशन क्या है, साथ ही यह भी पता चल जाएगा कि पुलिस का कौन सा वाहन पीड़ित के सबसे करीब है। इस तरह से नजदीकी पीसीआर वैन फौरन पीड़ित के पास पहुंच जाएगा और उसकी मदद करेगा। यह केंद्र चौबीस घंटे सातों दिन काम करेगा।

आगरा और वाराणसी में सब स्टेशन

लखनऊ में केंद्रीय मास्टर को-ऑर्डिनेशन सेंटर स्थापित किया गया है। जबकि आगरा और वाराणसी में सब स्टेशन बनाया गया है यानि अगर किसी वजह से लखनऊ सेंटर की सेवा में बाधा आती है तो बनारस और आगरा सेंटर ऑटोमेटिक ऑन हो जाएंगे। यानि पब्लिक सर्विस में कोई बाधा नहीं आएगी।  परियोजना में प्रदेश के 75 जिलों में अत्याधुनिक उपकरणों से लैस कुल 4800 वाहन होंगे। इनमें 3200 चार पहिया वाहन एवं 1600 दोपहिया वाहन हैं।

एसएमएस, फोन, सोशल मीडिया से दर्ज करा सकेंगे शिकायत

प्रदेश के किसी भी क्षेत्र से लोग अपनी समस्याएं न सिर्फ टेलीफोन से बल्कि एसएमएस, ईमेल, सोशल मीडिया के जरिए भी दर्ज करा सकेंगे। इस केंद्र में पीड़ित व्यक्ति से प्रतिक्रिया प्राप्त करने की व्यवस्था है। यानि जब तक पीड़ित के मामले का पूरी तरह से समाधान नहीं हो जाता है, उसके प्रकरण को बंद नहीं किया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में पुलिस के पहुंचने का समय 20 मिनट जबकि शहरी इलाकों में 10 मिनट होगा।

जनसुविधा की कई सेवाएं यूपी 100 से अटैच

यूपी-100 सेवा से जन सुरक्षा की सभी सेवाएं जैसे फायर सर्विस, हाईवे पुलिस, एकीकृत यातायात प्रबन्ध, स्मार्ट सिटी सर्विलांस, महिला पावर लाइन जैसी योजनाएं भी इंटरकनेक्ट होंगी। यानि अब आप किसी तरह की समस्या होने पर 100 नंबर की सहायता ले सकेंगे।

वेल ट्रेंड 25 हजार कर्मचारी देंगे सेवा

परियोजना को प्रभावी बनाने के लिए 25 हजार वेल ट्रेंड कर्मचारियों को लगाया गया है। जो पीड़ित को मुश्किल वक्त में भरपूर मदद करेंगे। इस सेवा के अंतर्गत प्रदेश के सभी 75 जनपदों के नागरिकों को जन सुरक्षा की आपातकालीन सेवाएं प्रदान की जाएंगी। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत आपातकालीन सेवा यूपी 100 राज्य के 75 जिलों, 689 शहरों व कस्बों और 1,07,452 गांवों में निवास करने वाली 22 करोड़ जनसंख्या को सेवा प्रदान करेगी। राज्य स्तरीय डायल-100 के को और प्रभावी बनाने के लिए एक एप्लीकेशन भी तैयार कराया गया है। इस एप्लिकेशन में लोगों की पर्सनल डिटेल दर्ज की गई है। साथ ही इसमें लोकेशन लोकेटर की भी सुविधा भी दी गई है। ऐसा इसलिए किया गया है कि ताकि आपातकालीन स्थिति में बटन दबते ही पुलिस आपके पास पहुंच सके।

– वृजनन्दन चौबे, गेस्ट राइटर

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