Uttar Hamara logo

मोदी सरकार में आम जनता बेहाल, पूंजीपति मालामाल

modi

Image_Catch News

30 October 2016

वादा तो था अच्छे दिन लाने का, अच्छे दिन आए, लेकिन पूंजीपतियों के न कि आम जनता के। मोदी सरकार के दो साल के कार्यकाल पर नजर दौड़ाएं तो यही दिखाई देता है। सबसे पहले मोदी सरकार के दो बजटों पर निगाह डालते हैं। 2015 के बजट में मोदी सरकार ने घोषणा की थी कि प्रत्यक्ष करों में कटौती के कारण सरकारी खजाने को 8415 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, वहीं अप्रत्यक्ष करों में बढ़ोतरी से 23,383 करोड़ का लाभ हुआ। इसके बाद 2016 में प्रत्यक्ष करों में कटौती के कारण 1060 करोड़ रुपये का घाटा और अप्रत्यक्ष करों में वृद्धि से 20,670 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। इन दोनों का आंकलन करें तो सामने आता है कि इन दो वर्षों में अप्रत्यक्ष करों में 44,053 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है, जबकि प्रत्यक्ष करों में 9,375 करोड़ की कमी आई है।

अच्छे दिन अमीर घरानों के, न कि गरीब जनता के

आइए अब जानते हैं कि इससे किसा नफा-नुकसान हुआ है। हम सभी जानते हैं कि अप्रत्यक्ष कर आमतौर पर जनसामान्य चुकाता है। जबकि प्रत्यक्ष कर मुख्य रूप से कारपोरेट घराने, पूंजीपति और अमीर वर्ग देते हैं। एक बात ये भी है कि जो जितना अमीर होगा, उसे कानून के मुताबिक ज्यादा कर देना होगा। अब बजट के आंकड़ों की पड़ताल करते हैं। अप्रत्यक्ष करों में फायदे से साफ है कि आम जनता से ज्यादा कर वसूला जा रहा है और प्रत्यक्ष कर में कमी आने का मलतब है कि मोदी सरकार ने पूंजीपतियों और धनिक वर्गों को प्रत्यक्ष करों में भारी छूट दी है। स्पष्ट है कि अच्छे दिन अमीर घरानों के आए हैं, न कि गरीब और आम जनता के।

modi_farmers

Image_Catch News

अप्रत्यक्ष करों से भी बढ़ रही महंगाई

दरअसल, एक ओर मोदी सरकार ने तमाम पूंजीपतियों को विभिन्न करों, शुल्कों आदि से पहले ही भारी छूट दे रखी है। तो दूसरी ओर आम मेहनतकश लोगों की पसीने की कमाई पर सेंध मारी जा रही है। वहीं अप्रत्यक्ष करों में लगातार की जा रही बढ़ोतरी से महंगाई भी बढ़ रही है। इससे भी आम जनता को दोहरी-तिहरी मार झेलनी पड़ रही है।

सरकारी खजाने को करीब 69 हजार करोड़ की चपत

2015-16 में मोदी सरकार ने कारपोरेट घरानों को जो करों में छूट दी, उसकी पड़ताल करें तो हम पाते हैं कि इससे सरकारी खजाने को करीब 69 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। जबकि इस रकम से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए तीन वर्ष का बजट जुटाया जा सकता था। इसी तरह कस्टम शुल्क से जवाहरात और आभूषण उद्योग को करीब 61 हजार करोड़ रुपये की छूट दी गई है।

जब खुद लागू करना था तो प्रत्यक्ष निवेश पर विरोध क्यों किया

पहले खुदरा बाजार में 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रत्यक्ष विदेश निवेश पर देश की बर्बादी का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार में आने के बाद इसी काम को आगे बढ़ा रहा है। इस वर्ष के बजट में केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया गया है कि सरकार तमाम पब्लिक सेक्टर सम्पत्तियों को विनिवेश और निजी खरीद के लिए खोल देगी, जिनमें कि जमीन भी शामिल है। इस क्रम में विशालकाय तेल कारपोरेशनों को भारी छूटें भी गई हैं। वहीं खाद्यान्न व्यापार, रक्षा, बैंक आदि समेत 15 प्रमुख क्षेत्रों को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए खोल दिया गया है। जबकि दो वर्ष पहले ही मोदी ने खुदरा व्यापार में 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की आज्ञा देने के लिए कांग्रेस की यूपीए सरकार के खिलाफ खूब हो-हल्ला मचाया था। तब मोदी ने जनता से वादा किया था कि अन्तिम सांस तक एफडीआई के खिलाफ लड़ेंगे। और अब खुद मोदी इसे बढ़ावा दे रहे हैं तो भाजपा और संघ परिवार ने पूरे प्रकरण पर चुप्पी साध ली है।

Modi with Ambani

Rediff.com

जनता को भयंकर खाद्यान्न असुरक्षा में डाला

खाद्यान्न की खरीद के मामले में मोदी सरकार ने ‘विकेन्द्रीकरण’ की पैरवी कर रही है। मतलब अब भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई द्वारा केन्द्रीकृत खाद्यान्न खरीद की व्यवस्था को भंग कर इसे राज्य सरकारों और साथ ही निजी क्षेत्र के हवाले किया जाएगा। इससे पिछली कांग्रेस सरकार में पहले ही अंतिम सांसें गिन रही सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली अब उसे पूरी तरह खत्म करने पर आमादा है। दूसरी ओर, मोदी सरकार ने कृषि उत्पादों के विपणन की ई-मार्केटिंग का रास्ता खोलकर एग्री बिजनेस कम्पनियों और इस क्षेत्र की बड़ी-बड़ी कम्पनियों के लिए बेरोक-टोक मुनाफाखोरी और जनता के लिए भयंकर खाद्यान्न असुरक्षा का रास्ता खोल दिया है।

बड़े-बड़ों पर करम और छोटे, खुदरा व्यापारियों की कमर तोड़ी

इसके साथ ही मोदी सरकार ने अपने ‘बिग बैंग एफडीआई सुधारों’ में 15 क्षेत्रों को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए खोल दिया है। इसमें बैंकिंग, सिंगल ब्राण्ड रीटेल, रक्षा, निर्माण, ब्रॉडकास्टिंग, नागरिक उड्डयन, फार्मास्यूटिकल जैसे रणनीतिक आर्थिक क्षेत्र शामिल हैं। इसका कड़वा सच यह है कि फार्मास्यूटिकल और खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से लम्बे दौर में महंगाई में बढ़ोतरी होगी। छोटे और खुदरा व्यापारी सड़क पर आ जाएंगे।

मोदी सरकार के इन दो वर्षों में देश में रोजगार सृजन में भी भारी कमी आई हैं। बेरोजगारों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। कृषि क्षेत्र भी भयंकर संकट का शिकार है। इन सभी कारकों ने मिलकर मजदूर वर्ग और आम मेहनतकश समुदायों के सामने चुनौतियां पेश कर दी हैं। इससे स्पष्ट है कि जो सपने भाजपा सरकार ने देश की जनता को दिखाए, उसे पूरा करना तो दूर प्रधानसेवक की बात करते-करते नरेंद्र मोदी उल्टा गरीब और मेहनतकश जनता को बदहाली के दलदल में और भी धकेलते जा रहे हैं।

उत्तर हमारा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Uttar Hamara

Uttar Hamara

Uttar Hamara, a place where we share latest news, engaging stories, and everything that creates ‘views’. Read along with us as we discover ‘Uttar Hamara’

Related news