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अब सोशल मीडिया से लैस होकर अपराध रोकेगी यूपी पुलिस

Image Soucrce: fpmt.org

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 April 7, 2016

समय के साथ अपराध के तरीके भी बदले हैं। इससे जरूरी हो गया है कि कानून-व्यवस्था को संभालने के लिए नए तरीके इजाद किए जाएं। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने इस दिशा में माॅडर्न कंट्रोल रूम से लेकर सर्विलांस और सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे कई पहल किए हैं। तो इससे पहले पुलिस द्वारा पहली बार वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी एवं अत्याधुनिक उपकरणों का प्रयोग किया गया। पंचायत चुनाव के दौरान संवेदनशील जनपदो में ड्रोन कैमरों का उपयोग किया गया तथा अतिसंवेदनशील प्लस श्रेणी के मतदान केन्द्रों पर वीडियो कैमरों से निरंतर निगरानी रखी गई। अब इसी कड़ी में सो”ाल मीडिया की मदद भी जुड़ गया है। हाल में ही यूपी पुलिस ने अपनी वेबसाइट को नए कलेवर में लाॅन्च किया है। साथ ही सोशल मीडिया के हैंडल्स फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप और इंस्टाग्राम को भी लॉन्च किया। इस वेबसाइट को यू-ट्यूब के जरिए पुलिस की हिस्ट्री को देखा जा सकता है। मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और कम्प्यूटर पर भी आसानी से सर्च किया जा सकता है। इसे सर्च करते हुए होमपेज पर ही टूल्स आएगा। इसके जरिये अब कोई भी पीड़ित मॉडर्न कंट्रोल रूम पर सोशल मीडिया के जरिए शिकायत के साथ वीडियो और ऑडियो भेज सकता है, जोकि जांच में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अहम साबित होगा।

जनता का भरोसा जीतना अहम

सोशल मीडिया के जरिये यूपी पुलिस की खास मकसद जनता के दिलों से जुड़ना है। वेबसाइट भी इसी कड़ी में अपनी भूमिका अदा करेंगे। इस वेबसाइट को सोशल मीडिया (ट्विटर, फेसबुक और वाट्सएप) से जोड़ा गया है। वेबसाइड को नए क्लेवर, टूल्स, नए डिजाइन और इसे सरलीकरण करके तैयार किया गया है। जहां एक प्लेटफार्म से कई बिन्दुओं की जानकारी आसानी से जुटाई जा सकती है।

आसानी से मिलेगी हर जानकारी

यूपी पुलिस की वेबसाइट को नए क्लेवर और उसके सरलीकरण को लेकर ईओडब्लू के आईजी दीपक रतन ने काफी काम किया था। इस वेबसाइट को नया लुक देने के लिए शीर्ष स्तर पर काफी सुधार किया गया है। वेबसाइट क्लिक करते ही खुलने वाले होमपेज से ही सभी बिन्दुओं को सर्च किया जा सकता है। रतन ने बताया कि इसे आम नागरिक के लिए ही सरलीकरण कर पेश किया गया है, ताकि इसकी प्रस्तुतिकरण अच्छी तरह से किया जा सके। जैसे किसी जिले में जाने के लिए पहले जोन, फिर रेंज और उसके बाद जिले में जाया जाता था, लेकिन इस वेबसाइड में सीधे ही जिले में जाकर शिकायत और अन्य जानकारी दे सकते हैं।

सोशल मीडिया कनेक्टेड

इसे पूरी तरह से सोशल मीडिया से जोड़ा गया है। इसके अलावा इसमें पुलिस की हिस्ट्री, उनके अच्छे क्रिया-कलापों को विस्तृत रूप से पेश किया गया है। वहीं, यू-ट्यूब के जरिए भी पुलिस की हिस्ट्री को देखा जा सकता है। इस वेबसाइट को मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट और कम्प्यूटर पर भी आसानी से सर्च किया जा सकता है। इसे सर्च करते हुए होमपेज पर ही टूल्स आएगा। इसमें सीधे प्रवेश करके विभिन्न बिन्दुओं की जानकारी जुटाई जा सकती है। इस अत्याधुनिक मॉर्डन कंट्रोल रूम (डायल-100) को सोशल मीडिया से जोड़ दिया गया है। लखनऊ के इस अत्याधुनिक मॉर्डन कंट्रोल रूम को दो सप्ताह के लिए सोशल मीडिया से जोड़कर ट्रॉयल किया जा रहा है। इसके बाद अन्य तीन महानगरों गाजियाबाद, इलाहाबाद और कानपुर नगर में शुरू कर दिया जाएगा।

वाट्सएप से भेज सकते हैं अपनी लोकेशन

इसके अलावा वाट्सएप के जरिए अपनी लोकेशन मॉर्डन कंट्रोल रूम में भेज सकते हैं। इसकी मदद से पुलिस को रिस्पॉन्स देने में समय नहीं लगेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए मॉर्डन कंट्रोल रूम के पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देकर कई बिन्दुओं पर जानकारी दी गई है। सोशल मीडिया से जोड़ने के लिए मॉर्डन कंट्रोल रूम के सॉफ्टवेयर में परिवर्तन किया गया है। वहीं, मॉर्डन कंट्रोल रूम डॉयल-100 से जुड़ने के लिए वाट्सएप नंबर-9532522100, फेसबुक-100 और ट्विटर-100 से लिंक किया जा सकता है। पहले मॉर्डन कंट्रोल रूम में एसएमएस और कॉल करके ही शिकायतें दर्ज कराई जाती थी, लेकिन इस नए प्रारूप में आने के बाद कोई भी पीड़ित वाट्सएप के जरिए अपनी लोकेशन भेज सकता है।

ये तो रही यूपी पुलिस की नई पहल की। लेकिन इसके अलावा पिछले चार सालों में यूपी पुलिस ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों हासिल की हैं।

कम्युनिटी पुलिसिंग पर विशेष बल

यूपी पुलिस ने इन चार सालों में प्रो एक्टिव पुलिसिंग एवं कम्युनिटी पुलिसिंग पर विशेष बल दिया। इससे अपराधों में कमी के आई है। वर्ष 2012 से अब तक 2800 से अधिक चार पहिया तथा 2400 से अधिक दो पहिया वाहन उपलब्ध कराये गये हैं, जिससे पुलिस की गतिशीलता बढ़ी है और रिस्पांस टाइम बेहतर हुआ है।

अब बारी आपकी है। आप भी आगे आइए और अपने आसपास पौधे लगाकर, उसकी देखभाल कर आप भी शामिल हो जाइए उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री की अपने राज्य को हरा-भरा बनाने की इस पहल में।

अनमैण्ड एरियल वेहिकिल से निगरानी

संवेदनशील स्थलों पर अब तक 406 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। आधुनिकीकरण योजना 2014- 15 के अंतर्गत 53 सीसीटीवी कैमरे और स्वीकृत किये गये है। इसके अलावा प्रदेश के 262 थानों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना हेतु कार्यवाही की जा रही है। अनमैण्ड एरियल वेहिकिल की व्यवस्था की गई है, जिनके माध्यम से पुलिस द्वारा दूरस्थ व्यक्तियों के समूह, बिल्डिंग, धार्मिक स्थलों पर भीड़भाड़ वाले दिनो में निगरानी की जा सकती है। सहारनपुर में तनाव के दौरान अनमैण्ड एरियल वेहिकिल का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए उपद्रवियों की निगरानी की गयी। यह उपकरण 400 मीटर की ऊॅचाई और 4 किमी दूरी तक जा सकता है। इस उपकरण के साथ थर्मल इमेजर कैमरा लगाकर रात में भी वीडियो बनाया जा सकता है। इसके अलावा गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, बरेली आदि प्रमुख शहरों के लिये ड्रोन कैमरे क्रय किये जाने का निर्णय लिया गया है।

महिलाओं अपराध रोकने की पहल

महिलाओं के विरूद्ध अपराधों में कमी लाने तथा उनमें सुरक्षा की भावना में वृद्धि हेतु पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में महिला सम्मान प्रकोष्ठ का गठन किया गया है। वर्ष 2015 की उक्त अवधि में छेड़खानी 31.55%, बलात्कार 11.31%, दहेज हत्या में 5.13 % की कमी हुयी है। अक्ष्या कार्यक्रम के अंर्तगत यूपी कराटे एसोसिएशन आदि के माध्यम से आत्मरक्षा से संबंधित व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है और 29 स्कूलों की लगभग 5 हजार छात्राओं को प्रशिक्षत किया गया है। वहीं, महिलाओं के विरुद्ध अपराधांे की शिकायत आॅनलाइन दर्ज किये जाने की व्यवस्था उत्तर प्रदेश पुलिस की वेबसाइट http://uppolice.gov.in में लागू की गई है।

वीमेन पावर लाइन 1090

15 नवम्बर 2012 को पहली बार वूमेन पावर लाइन 1090 की ऐतिहासिक शुरुआत मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा अपने आवास पर आयोजित एक समारोह में की गयी। प्रदेश के इतिहास में यह एक नयी मिसाल है। 15 नवम्बर, 2012 से इसके अन्तर्गत 30 दिसम्बर 2015 तक 4 लाख 58 हजार से अधिक शिकायती मामले दर्ज किये गये जिनमें से 4 लाख 47 हजार से अधिक शिकायतों का पूर्णतयाः समाधान किया जा चुका है। इस सेवा को और प्रभावी बनाने के लिए वीमेन सिक्योरिटी एप 1090 (Women Security App 1090) सेवा भी प्रारम्भ की गयी है।

डायल 100 परियोजना

नगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को भी प्रदेश स्तरीय पुलिस इमरजेन्सी प्रबन्धन प्रणाली (पीईएमएस) डायल 100 परियोजना शुरू की गई है। डायल 100 परियोजना शुरू होने पर ग्रामीण इलाकों में 15 मिनट और शहरों में सूचना मिलने के दस मिनट के भीतर पुलिस घटनास्थल पहुंचेगी। परियोजना की कुल लागत 2325.33 करोड़ रूपये है, जिसके लिये लखनऊ में एक (केन्द्रीय मास्टर को-आर्डिनेशन सेन्टर) स्थापित किया जायेगा। अमेरिका के डायल 911 के तर्ज पर शुरू की जा रही यह परियोजना गेम चेंजर होगी। जिस दिन डायल 100 परियोजना प्रभावी होगी और 10 शहरों में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और स्मार्ट सिटी सर्विलांस परियोजना लागू हो जाएगी, उस दिन न केवल सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होगी बल्कि महिलाओं और बच्चों का भी आत्मबल बढ़ेगा।

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