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30 साल से प्यासे थे खेत, अखिलेश सरकार ने मुफ्त सिंचाई की सुविधा देकर पहुँचाया पानी

Photo_ www.indiawave.in

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May 31, 2016

मौजूदा दौर में जब पानी की एक-एक बूंद की कीमत अनमोल हो चुकी है, किसानों के लिए इसका मोल तो और भी बढ़ गया है। और जब बात खेतों की सिंचाई की हो तो यह बात सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रह जाती है, बल्कि इससे उपज और उपज के जरिय आम जनता की भूख मिटाने की जरूरतें और देश व प्रदेश की तरक्की में जुड़ जाती है। समाजवादी सरकार ने पानी, खासकर किसानों के परिपेक्ष में पानी या यूं कहें सिंचाई के महत्व को बखूबी पहचाना और सिंचाई का ऐसा प्रबंधन किया कि आज दुनिया भी उत्तर प्रदेश के सिंचाई प्रबंधन की सरहना कर रही है।

किसानों को मुफ्त सिंचाई के लिए पानी

उत्तर प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी व्यवस्थाओं में से एक है और देश की सबसे बड़ी है। प्रदेश सरकार ने कुशल अभियन्ताओं के सहयोग एवं नवीनतम तकनीकी से सिंचाई के क्षेत्र में अतुल्नीय काम किया है। पूरे देश में सिर्फ उत्तर प्रदेश ही ऐसा प्रदेश है जहां किसानों को मुफ्त सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया है इसके साथ ही पूरे प्रदेश में सभी नहरों, माइनरों एवं रजबहों की सिल्ट सफाई कराके पानी को टेल तक एवं टेल से खेत तक पानी को पहुंचाया गया है। हालांकि अभी भी पुरानी सिंचाई व्यवस्था को पुनः लागू करने की आवश्यकता है। इसके लिए तालाबए पोखरोंए नदियों एवं जलाशयों को संरक्षित करना पड़ेगा। पानी को संरक्षित एवं बचाने के लिए हमें आधुनिक तकनीकि का प्रयोग करना पड़ेगा जिससे कि अधिक से अधिक किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जा सके।

30 साल बाद पहुंचा कई इलाकों में पानी

Photo_wikipedia

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उत्तर प्रदेश में 74 हजार किमी लंबी नहर प्रणाली, 32 हजार राजकीय नलकूप, 277 लिफ्ट कैनाल तथा 65 बड़े जलाशय है। प्रदेश में गंगा, यमुना, घाघरा, राप्ती, गंडक, रामगंगा, गोमती, केन, बेतवा आदि नदियां उपलब्ध है। इसके बावजूद मौजूदा सरकार से पहले तक किसानों को सिंचाई की कीमत अदा करनी पड़ती थी। समाजवादी सरकार ने इससे किसानों को राहत दी। इसके तहत उत्तर प्रदेश के इतिहास में किसानों को पहली बार राजकीय सिंचाई सुविधा मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों को समय से सिंचाई के लिए समुचित जल उपलब्ध कराया जा रहा है। इतना ही नहीं पहले जो नहर सिल्ट से पटे रहते थे, अब उनकी साल में दो सफाई कराई जा रही है। इससे उन इलाकों तक पानी पहुंचाया जा सका जहां 30 वर्षों से पानी नहीं पहुंचा था।

विश्व बैंक ने भी की तारीफ

Photo_indianexpress

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बाराबंकी, फैजाबाद, सुल्तानपुर, आजमगढ़, महाराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर आदि अनेकों ऐसे जिले हैं जिसमें टेल तक पानी पहली बार पहुंचा। यहां पानी पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय तथा आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया गया। विश्व बैंक ने लिखकर विभाग को उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग को बधाई दी कि यूपी की सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग विश्व की अग्रिम सिंचाई संस्थाओं में एक हो गई है। विभाग के इस प्रयास से पिछले 3 वर्षों में प्रदेश में 15 लाख हेक्टेयर सिंचाई बढ़ गई। प्रत्येक नहर प्रणाली के टी.डायग्राम बनाए गए हैं।

30 वर्षों से अधूरी पड़ी सिंचाई परियोजना तेजी से हो रही पूरी

सरयू नहर परियोजना में पिछले 32 वर्षों में 2844 करोड़ रुपए का व्यय तो किया गया लेकिन वास्तव में नहरों में 1400 गैप्स होने तथा 125 किमी लंबी राप्ती नहर में 1 इंच भी खुदाई न होने के कारण किसानों को सिंचाई का कोई लाभ नहीं मिला। समाजवादी सरकार के गठन के पश्चात् मात्र 2 वर्षों में परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराते हुए 1234 करोड़ रुपए व्यय कर लगभग 1000 गैप्स पूर्ण करके और 103 किमी मुख्य नहर और 150 किमी रजवाहे-अल्पिकाओं की खुदाई कर 63000 हेक्टेयर सिंचन क्षमता में वृद्धि की गई। इस परियोजना से 9 जनपद क्रमश: बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीर नगर, गोरखपुर एवं महराजगंज लाभान्वित हो रहें हैं। परियोजना का लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है।

बाण सागर नहर परियोजना

Photo_ www.bundelkhandlive.com

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इस परियोजना पर पिछले सरकार के कार्यकाल में 1270 करोड़ रुपए व्यय कर दिए गए परंतु किसानों को सिंचाई के लिए एक बूंद पानी नहीं मिला। सरकार के गठन के बाद 456 करोड़ रुपए व्यय करके 93 प्रतिशत कार्य पूर्ण करा दिए गए हैं तथा इससे 50 हजार हेक्टेयर सिंचाई की सुविधा किसानों को दी गई है। इससे दो जनपदों इलाहाबाद, मिर्जापुर के किसान लाभान्वित होंगे।

कनहर सिंचाई परियोजना

सोनभद्र के सूखाग्रस्त एवं पिछड़े क्षेत्र की यह परियोजना 33 वर्ष पूर्व जब प्रारंभ हुई थी तब इसकी लागत मात्र 27 करोड़ रुपए थी। समाजवादी सरकार के आने से पूर्व यह परियोजना शिथिल अवस्था में थी। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए विभाग द्वारा न केवल परियोजना को नाबार्ड से स्वीकृत कराया गया अपितु इस योजना के सभी मुद्दे सुलझाए गए और चालू वित्तीय वर्ष में 315 करोड़ रुपए व्यय करके इसको गति भी दी गई।

बदायूं सिंचाई परियोजना

Photo_vineetbajpai.blogspot.in

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बदायूं एव बरेली के किसानों को 3700 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा देने के लिए गत सरकार में बिना वित्तीय संसाधन जुटाए ठेके दे दिए गए। समाजवादी सरकार द्वारा नाबार्ड से परियोजना के लिए 537 करोड़ रुपए स्वीकृत कराके गत 2 वर्षों में 315 करोड़ रुपए व्यय किए तथा जल्द ही यह परियोजना पूर्ण कर ली जाएगी। कार्य की प्रगति 58 प्रतिशत है।

आजमगढ़ में सिंचाई सुविधा की परियोजना

परियोजना को मुख्यमंत्री की घोषणानुसार 102 करोड़ रुपए की कार्य योजना रिकार्ड समय में स्वीकृत कराकर कार्य प्रारंभ किया गया। परियोजना के अंतर्गत दरियाबाद, सुल्तानपुर, फैजाबाद, टांडा, दोहरीघाट, निजामाबाद, लालगंज तथा शाहगंज आदि 144 नहरों पर 981 किमी लंबाई में लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण कराये जा चुके हैं।

गंडक नहर प्रणाली के पुनरोद्धार की परियोजना

कई वर्षों से गंडक नहर प्रणाली का पुनरोद्धार न होने के कारण इसकी क्षमता उत्तर प्रदेश में 15800 क्यूसेक से घटकर 10000 क्यूसेक रह गई थी। इस नहर प्रणाली का पुनरोद्धार होने के फलस्वरूप जनपद महराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर जनपदों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है। परियोजना लागत 243 करोड़ रुपए नाबार्ड से स्वीकृत कराकर कार्य युद्ध स्तर पर कराये जा रहे हैं। लगभग 100 करोड़ के कार्य पूर्ण कराए जा चुके हैं। फलस्वरूप लगभग 50000 हेक्टेयर सिंचन क्षमता उपलब्ध हुई है।

भूपौली पम्प नहर परियोजना

परियोजना की लागत लगभग 10045 लाख है। परियोजना पर 9389 लाख व्यय करके पंपों की स्थापना का कार्य एवं नहरों का पुनरोद्धार कराकर लगभग 34612 हेक्टेयर सिंचन क्षमता का सृजन किया गया है। इस परियोजना से जनपद चंदौली का क्षेत्र लाभान्वित होगा। परियोजना की भौतिक प्रगति 93 प्रतिशत है।

आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग

सिंचाई विभाग के समस्त कार्यालयों का कंप्यूटरीकरण कर सूचना तकनीक से सुसज्जित किया गया है तथा इसे लखनऊ स्थित मुख्यालय स्तर पर कमांड सेंटर से जोड़ा गया है जिससे परियोजनाओं के संचालन के लिए एवं प्रगति का अनुश्रवण किया जाता है।

 

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