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काम आईं अखिलेश सरकार की कोशिशें, महाराष्ट्र को पछाड़ चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश बना अव्वल

May 05, 2016

किसी भी देश और प्रदेश की खुशहाली तभी हो सकती है जब किसान और गांवों में खुशहाली रहे। और बात जब गन्ना किसानों की हो तो यह और महत्वपूर्ण हो जाती है। क्योंकि गन्ने का उत्पादन कृषि के साथ-साथ उद्योग क्षेत्र के विकास से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। ऐसे में गन्ने का उत्पादन बढ़ना किसी प्रदेश की प्रगति का संकेतक भी है। ऐसे में गन्ना या यूं कहें चीनी का उत्पादन बढ़ना अखिलेश सरकार की अहम उपलब्धियों में से एक है। दरअसल, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने कुशल निर्देशन से हरित ऊर्जा, हरित ईधन और किसानों को शत-प्रतिशत भुगतान देने के अलावा गन्ने के रस से बनने वाले हरित ईधन एथनॉल के सबसे बड़े उत्पादक राज्य होने की उपलब्धि हासिल की है।

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चीनी रिकवरी में उल्लेखनीय वृद्धि

सपा सरकार के शासन काल में सरकारी चीनी मिलों के चीनी रिकवरी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी वर्ष 2012 के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देशों के अनुरूप कराये गये गन्ना विकास कार्यक्रम एवं बेहतर संचालन का नतीजा यह रहा कि वर्ष 2012 के सापेक्ष सहकारी चीनी मिलों में वर्तमान सत्र 2015-16 में औसत रूप से लगभग 1 प्रतिशत से अधिक चीनी परता की वृद्धि हासिल की जा रही है। एक क्विंटल गन्ने से बनने वाले चीनी को उसका चीनी परता कहते हैं। सत्र 2011-12 के सापेक्ष लगभग 1.25 प्रतिशत अधिक चीनी परता प्राप्त किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश ने चीनी मिल की क्षमता अनुसार उच्च शर्करायुक्त उन्नतशील गन्ना प्रजातियों का विकास कर गन्ने की उत्पादकता और क्षेत्रफल में बढोत्तरी के लिए 34 करोड़ की व्यवस्था की है। पिछले वर्ष 6 फरवरी 2015 को शिलांयास के समय सठियांव मिल क्षेत्र आजमगढ़ में कुल गन्ना क्षेत्रफल 10360 हेक्टेयर था, जिसमें शीघ्र प्रजाति का प्रतिशत 7.69 प्रतिशत, सामान्य प्रजाति का प्रतिशत 56.21 एवं अस्वीकृत प्रजाति का प्रतिशत 36.10 था। अखिलेश सरकार द्वारा गन्ने  की फसल को कीटों से बचाने  के लिए कीटनाशक का  वितरण  भी कराया गया है।

महाराष्ट्र को पछाड़ कर हासिल की उपलब्धि

Image Source: bajajgroup.org

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ऐसा पहली बार हुआ है जब चीनी परता के मामले में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल आया है। लगभग हर साल बाजी मारने वाले महाराष्ट्र को प्रदेश ने पछाड़ कर यह उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश की 21 चीनी मिलों का परता इस बार 11 प्रतिशत से अधिक है। जबकि एक मिल का परता 12 फीसदी से ज्यादा है। इससे पहले हर साल औसत परता नौ से 10 फीसदी के बीच रहता था। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य हैं। इसके बावजूद यहां प्रति क्विंटल चीनी उत्पादन या चीनी परता कम होने से परेशानी बनी हुई थी। पर इस परेशानी से निजात मिल गई है। बीते साल यहां औसत उपज 651 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, जबकि औसत चीनी परता 9.54 प्रतिशत था। प्रदेश में सिर्फ बुंदकी चीनी मिल का परता 11.11 प्रतिशत था, लेकिन इस बार हालात बदल गए है। वर्तमान गन्ना पेराई सत्र 2015-16 में प्रदेश की 21 चीनी मिलों का चीनी परता 11 फीसदी से ज्यादा है, जबकि मिलों का परता 10 से 11 प्रतिशत के बीच है।

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वैज्ञानिक खेती से मिली सफलता

सठियांव में अत्याधुनिक चीनी मिल का शिलान्यास करते समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
Image Source: uttarpradesh.org

देश में सर्वाधिक चीनी परता हासिल करने के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार की किसानों को वैज्ञानिक खेती के लिए प्रोत्साहित करना सबसे बड़ा कारण है। जिन चीनी मिलों का परता 11 फीसदी से ज्यादा है, उन इलाकों में पुरानी प्रजातियों को हटाकर नए की खेती को प्रोत्साहित किया गया। इसके अलावा मौसम का भी सहारा रहा।

चीनी परता में कीर्तिमान स्थापित कर रहीं सरकारी चीनी मिलें

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सठियांव में अत्याधुनिक चीनी मिल का शिलान्यास करते समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

प्रदेश में चीनी का परता महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों से अधिक प्राप्त करने के उद्देश्य से संचालित गन्ना विकास कार्यक्रम के चलते सहकारी चीनी मिलों में गन्ना अगेती प्रजाति के गन्ना का क्षेत्रफल 2012 में लगभग 8 प्रतिशत के सापेक्ष बढ़कर सत्र 2015-16 में लगभग 25 प्रतिशत हो गया है। सहकारी चीनी मिलों की तकनीक एवं मशीनरी पुरानी होने के बावजूद उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के कारण सत्र 2011-12 की तुलना में सहकारी चीनी मिलों में औसत रूप से 1 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि चीनी परता में प्राप्त की जा रही है। सहकारी चीनी मिलों में अधिकतम चीनी परता किसान सहकारी चीनी मिल स्नेह रोड नजीबाबाद में प्राप्त किया जा रहा है। इस मिल में आॅन-डेट चीनी परता 12.25 प्रतिशत तथा टु-डेट चीनी परता 10.94 प्रतिशत प्राप्त किया जा रहा है। वर्ष 2006 के उपरान्त बन्द पड़ी पुवायां सहकारी चीनी मिल को वर्ष 2013 में पुनः चलाया गया एवं इसमें 11.35 प्रतिशत चीनी परता प्राप्त किया जा रहा है। स्नेह रोड, पुवायां, गजरौला, महमूदाबाद एवं घोसी मिलों में लगभग 30 वर्षों के इतिहास में स्थापना के बाद से अब तक सर्वश्रेष्ठ चीनी परता वर्तमान सत्र में प्राप्त किया जा रहा है। सहकारी चीनी मिलों में प्राप्त हो रहे चीनी परता के बेहतर परिणामों को दृष्टिगत रखते हुए यह सम्भावना है कि वर्तमान पेराई सत्र 2015-16 के अन्त तक औसत चीनी परता गत 20 वर्षों में अधिकतम प्राप्त होगा।

किसानों को भुगतान कराने को प्राथमिकता

राज्य सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने एवं किसानी को आर्थिक धारा से जोड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। इसीलिए वर्तमान वित्तीय वर्ष को किसान वर्ष घोषित करके काम किया जा रहा है ताकि गांव तरक्की करें और किसान खुशहाल हों। प्रस्तुत बजट में भी कृषि एवं किसानी पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि गन्ना मूल्य निर्धारण में चीनी मिलों को चालू हालत में रखते हुए किसानों को भुगतान कराने को प्राथमिकता दी गई ताकि प्रति कुन्टल गन्ना खरीद मूल्य पर सवाल न खड़ा हो।

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सठियांव में चीनी मिल शुरू

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सठियांव में खोल गया अत्याधुनिक चीनी मिल

उत्तर प्रदेश शासन की कोशिशों का ही नतीजा है कि आजमगढ़ के लाखों किसानों की उम्मीद किसान सहकारी चीनी मिल सठियांव में 22 मई 2016 से पेराई शुरू हो गई। एक दौर था, जब 1973 में बनी सठियांव चीनी मिल जिले का एकमात्र बड़ा उद्योग था। वर्ष 2008 में चीनी मिल के बंद होने से न केवल गन्ने की खेती प्रभावित हुई बल्कि जनपद उद्योग शून्य हो गया था। इस मिल के चालू होते ही उद्योग शून्य होने का दाग जनपद से मिट जायेगा। साथ ही किसान गन्ने की खेती से अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे।

खरीदे गए गन्ने पर देय कमीशन अब तीन रुपये प्रति कुन्तल

गन्ना किसानों को गन्ने की उपज का ज्यादा लाभ देने के लिए समाजवादी सरकार ने गन्ने पर देय कमीशन बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश शासन ने गन्ना (पूर्ति तथा खरीद विनियमन) नियमावली-1954 के नियम 49 को संशोधित किया है। संशोधित नियम के अनुसार अब पेराई सीजन 2015-16 के दौरान खरीदे गये गन्ने पर देय कमीशन का भुगतान उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के तीन प्रतिशत के स्थान पर तीन रुपये प्रति कुन्तल कर दिया है। पूर्व में यह दर दो रुपये प्रति कुन्तल थी।

 

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