Uttar Hamara logo

तीन साल में 10 गुना हुआ यूपी में सौर ऊर्जा का उत्पादन

Traning Centre-9

Photo_upneda.org.in

June 28, 2016

2012 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 12वीं पास करने वाले छात्र-छात्राओं को फ्री लैपटॉप देने का वादा किया था। चुनाव में बहुमत से समाजवादी पार्टी की सरकार बनी। इसके बाद अपनी पहली ही कैबिनेट मीटिंग में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने छात्र-छात्राओं को फ्री लैपटॉप देने का निर्णय किया। स्वाभाविक था इसे विद्यार्थियों के साथ-साथ उनका परिवार खुश था। इन छात्र-छात्राओं में रायबरेली की एक छात्रा महक भी थी। लैपटॉप मिलने के बावजूद महक को एक बात की चिंता सता रही थी कि गांव में बिजली नहीं आने पर उसका लैपटॉप कैसे चार्ज होगा? लोग उसे चिढ़ाते कि बिना बिजली के लैपटॉप किस काम का, लेकिन उसे लैपटॉप मिलने के साथ ही उनके घर सौर ऊर्जा के बदौलत 24 घंटे बिजली आने लगी। अब महक का लैपटॉप बिजली का मोहताज नहीं है। रायबरेली का ही एक गांव है बछरावां। पहले वहां तीन से चार घंटे ही बिजली आती थी, वो भी हफ्ते में एक या दो दिन। पर अब यह गांव 24 घंटे सौर ऊर्जा से जगमग रहता है।

gallary-12_0

Photo_upneda.org.in

अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग (नेडा) के मुताबिक, प्रदेश में महज दो साल में यानी 2013 तक 10,000 गांवों में सौर ऊर्जा पहुंच चुकी है। इससे पहले वर्ष 2010-11 में यह आंकड़ा 5,000 था जो बढ़कर सिर्फ दो साल में 15,000 हो गया। यानी प्रदेश के कुल 96 हजार गांवों में से 15,000 गांव सौर ऊर्जा की सुविधा का लुत्फ उठाने लगे। उत्तर प्रदेश की नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (यूपीनेडा) के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में गांवों में सौर ऊर्जा का जबरदस्त विकास हुआ है। इसमें ज्यादातर संयंत्रों को सरकार की लोहिया आवास और जनेश्वर मिश्र योजना में लगवाया गया है। 2016-17 के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बजट भाषण के मुताबिक, समाजवादी सरकार में पारंपरिक ऊर्जा के साथ सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में पूरे प्रदेश में सौर ऊर्जा का उत्पादन पहले के मुकाबले 10 गुना हो गया है। साथ ही राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के अंतर्गत 70 हजार सोलर लाइट लागई गई है। 40 हजार लोहिया आवासों में सोलर पैक का प्रावधान किया गया है। तो कन्नौज के दो गांव पूरी तरह सौर ऊर्जा से ही जगमग हो रहे हैं।

50353779

Photo_ economictimes.indiatimes.com

गांवों में सौर ऊर्जा का प्रयोग अधिक

अगर तुलना की जाए तो गांवों में शहरों की तुलना में सौर ऊर्जा का प्रयोग अधिक है। प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का दायरा बढने का कारण सरकारी योजनाओं के आलावा निजी कंपनियों की भागीदारी भी रही है। जहां एक तरफ सूरज से ऊर्जा पैदा करने के लिए प्रदेश सरकार की सोलर पॉवर नीति 2013 के तहत प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सौर संयंत्र लगाए जा रहे हैं। वहीं देश में सौर ऊर्जा वितरण की सबसे बड़ी निजी कंपनी सूकैम प्रदेश सरकार की लोहिया आवास योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 40,000 घरों में सोलर पैनल लगा चुकी है।

IMG-20160510-WA0000

Photo_upneda.org.in

पूर्वी उत्तर प्रदेश में हो रहा बेहतरीन काम

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में पूर्वी उत्तर प्रदेश में काफी बेहतरीन काम किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में एक योजना के अंतर्गत ग्रामीण स्तर पर इस क्षेत्र में 2 लाख सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की सुकैम इंडिया को मंजूरी दी है। जनपद सीतापुर के डिगिहा गांव में आधुनिक तरीके से सौर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा रहा है। गांव के ज्यादातरघरों में 600 वॉट का एसी, स्मार्ट सोलर ग्रिड लगा है। यह सोलर पॉवर ग्रिड रिचार्ज करवाने पर चलता है। ग्रामीण इस ग्रिड का प्रयोग आवश्यकता अनुसार रिचार्ज करवाकर करते हैं। दूसरी ओर सीतापुर, उन्नाव व अमेठी के 100 से ज्यादा परिवारों तक स्मार्ट सोलर ग्रिड की मदद से बिजली पहुंचा जा रही है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा बढ़ाने के लिए कई निजी कंपनियां निवेश कर रही हैं।

mini-solar-plant-KN-6

Photo_upneda.org.in

उपयोग में आगे पश्चिमी उत्तर प्रदेश

एक तरह सौर ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार की ओर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहतरीन काम किए जा रहे हैं तो उपयोग के मामले में पश्चिमी उत्तर प्रदेश ने पूर्वी उत्तर प्रदेश को पछाड़ दिया है। प्रदेश सरकार की बहुआयामी सौर ऊर्जा नीति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे ज्यादा भागेदारी रही, जो प्रदेश के दूसरे हिस्सों की तुलना में अधिक है। 30 अगस्त 2015 को आयोजित री-इनवेस्ट कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश में बढ़ रही सौर उपयोगिता में सबसे ज्यादा भागीदारी प्रदेश के पश्चिमी जिलों- मेरठ, सहारनपुर और बरेली की रही है। इसका मुख्य कारण पिछले तीन वर्षों में इन जिलों में सौर ऊर्जा पर सबसे ज्यादा निवेश और सहभागिता रही है। यूपी नेडा की सोलर पॉवर परियोजना अधिकारी नम्रता कालरा बताती है कि वैसे तो सौर ऊर्जा का उपयोग लगभग सभी क्षेत्रों में बढ़ा है। प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सबसे ज्यादा लघु औद्योगिक इकाइयां हैं, इसलिए सौर ऊर्जा इस्तेमाल यहां पहले से बेहतर हुआ है।

328A1297

Photo_upneda.org.in

सौर ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ा निवेश

सूरज से ऊर्जा पैदा करने के लिए प्रदेश सरकार से सोलर पॉवर नीति 2013 के तहत प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सौर संयंत्र लगाए जा रहे हैं। सरकार गाँवों में खेती से लेकर घरों की बिजली तक अब सौर ऊर्जा के माध्यम से प्रदान कर रही है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा बढ़ाने के लिए कई निजी कंपनियां निवेश कर रही हैं। इससे उत्तर प्रदेश में कुल सौर ऊर्जा उपयोग में करीब 60 फीसदी हिस्सा ग्रामीण जनसंख्या को हो गया है। वहीं प्रदेश में सौर क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने 600 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर कार्यक्रम स्थापित करने के लिए दो करार-पत्रों पर हस्ताक्षर भी किया है।

सौर उपकरणों से वैट हटाकर दी राहत

सरकार के सामने जो अहम चुनौतियां थीं उनमें सोलर उपकरणों की कीमतें और प्रसार के कार्यक्रमों का महत्वपूर्ण दायित्व होगा। उत्तर प्रदेश के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (यूपीनेडा) के क्षेत्रीय अभियंता विवेक बताते हैं, सौर ऊर्जा की कम हो रही उपयोगिता का मुख्य कारण इसकी लागत है। एक छोटा सोलर प्लांट लगवाने में उसमें प्रयोग होने वाले पैनल और बैटरी की कीमत ही बहुत ज्यादा होती है। इससे निजात दिलाने के लिए अखिलेश सरकार ने सौर ऊर्जा उपकरणों से वैट समाप्त कर दिया है।

 

उत्तर हमारा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Uttar Hamara

Uttar Hamara

Uttar Hamara, a place where we share latest news, engaging stories, and everything that creates ‘views’. Read along with us as we discover ‘Uttar Hamara’

Related news