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समाजवादी हथकरघा बुनकर पेंशन योजना से हस्तशिल्प को मिलेगा नया जीवन

Photo_ www.uptunews.in

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May 25, 2016

समाजवादी सरकार ने पिछले चार साल में हर वर्ग की बेहतरी के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। साथ ही गरीब कामगारों के कल्याण, खासकर बुनकरों की स्थिति में सुधार लाने के महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। इसी कड़ी में एक महत्वपूर्ण स्कीम है समाजवादी हथकरघा बुनकर पेंशन योजना। इस योजना का लाभ 60 वर्ष से ऊपर के आयु वाले बुनकरों को दिया जाएगा। शासन की ओर से ऐसे बुनकरों की सूची बनाने का निर्देश सभी जिलों को भेज दिया गया। सरकार की इस योजना का प्रदेश के तमाम तबकों और बुनकरों ने स्वागत किया है। इस योजना के माध्यम से सरकार ने वृद्ध बुनकरों को आर्थिक मदद देने का फैसला किया है, जिससे उनके जीवन यापन में सहूलियत मिल सके और उनके सम्मान व स्वाभिमान में भी कोई कमी न होने पाए। योजना के तहत समाजवादी हथकरघा बुनकर पेंशन योजना का लाभ 60 वर्ष से ऊपर के ऐसे बुनकरों को दिया जाना है कि जिनकी आय सालाना एक लाख रुपये से कम होगी।

पहली बार बुनकर पेंशन के लिए 30 करोड़

समाजवादी बुनकर पेंशन योजना के लिए अखिलेश सरकार ने बजट में 30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह पहला मौका है जब दस्तकारों के लिए राज्य में ऐसा कदम उठाया जा रहा है। इतना ही नहीं, हथकरघा उद्योग पर पटरी पर लाने के लिाए भी सरकार ने 15 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इसी प्रकार हथकरघा बुनकरों को रियायती दर पर बिजली मुहैया कराने के लिए 5 करोड़ और धुनकरों को सस्ती दर पर बिजली देने के लिए दो करोड़ रुपये दिए गए हैं। इन कदमों में भविष्य में बुनकरों की माली हालात में सुधार होगा, बल्कि उद्योग को भी नया जीवन मिलेगा।

Photo_en.wikipedia.org

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बाजार मिला, बाजार पहुंचने का रास्ता भी

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुनकरों की दशा सुधारने के लिए अपनी योजनाएं सिर्फ पेंशन और रियायती बिजली तक सीमित नहीं रखी है। बल्कि इस बात का भी ख्याल रखा है कि उनकी आर्थिक स्थिति सुधरने और हथकरघा उद्योग भी फले-फूले। इसलिए दस्तकारों को न सिर्फ उनके उत्पाद को बाजार मुहैया कराने के लिए मंडिया बनाई गई हैं, बल्कि बुनकारों के क्षेत्रों को पक्की सड़कों से जोड़ा जा रहा है, जिससे वे आसानी से अपने उत्पाद को बड़ी मंडियों तक पहुंचा सकें और अपने उत्पाद का उचित मूल्य पा सकें। बुनकरों को अपना उत्पाद बेचने के लिए आजमगढ़ के मुबारकपुर में मंडी स्थापित की गई है। उसी माॅडल पर प्रदेश में और भी मंडिया स्थापित करने की तैयारी है। इसके अलावा दस्तकारों को हुनरमंद बनाने के राज्य में हस्तशिल्प डिजाइन शैक्षिक संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव है। तो हथरकघा के सामानों को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश निर्यात संवर्धन परिषद बनाने पर भी अमल किया जा रहा है। इसके अलावा में कुशीनगर में खादी ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र बनाने का भी निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने सिर्फ दस्तकारों ही नहीं पावरलूम से जुड़े हुनरमंदों कके विकास की भी योजना तैयार की हैं। इसकी के मद्देनजर उन्होंने पावरलूम विकास योजना के लिए 15 करोड़ रुपये की व्यवस्था बजट में की है।

Photo_jaypore.com

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आजमगढ़ में बुनकर विपणन केन्द्र का निर्माण

बुनकरों के उत्पादों के विपणन की व्यवस्था को सुगमता से सुनिश्चित करने के लिए आजमगढ़ जनपद के मुबारकपुर में बुनकर विपणन केन्द्र की स्थापना की जा रही है। इस पर कुल 1225-08 लाख रूपये व्यय अनुमानित है। 1163.75 लाख रुपये की स्वीकृति शासन द्वारा दी जा चुकी है। विपणन केन्द्र के निर्माण के उपरान्त बुनकरों के लिए दुकानों के आवन्टन की प्रकिया आरम्भ की जाएगी। इस केन्द्र के माध्यम से बुनकर अपने उत्पाद बेहतर ढंग से विक्रय कर सकेंगे।

लखनऊ में चिकनकारी क्लस्टर की स्थापना

Photo_southasiainstitute.harvard.edu

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लखनऊ की परम्परागत हस्तशिल्पकला को विश्वस्तर पर लोकप्रिय बनाने एवं हस्तशिल्पकला को उद्योग जगत में विशिष्ट स्थान दिलाने के उद्देश्य से क्लस्टर विकास योजना चलाई जा रही है। चिकनकारी क्लस्टर, टेराकोटा ट्वायज एवं जरी जरदोजी क्लस्टर आदि लखनऊ जनपद में प्रस्तावित क्लस्टर विकास योजना के महत्वपूर्ण अंग हैं। लखनऊ में हस्तशिल्प उद्योगों को विकसित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित क्लस्टरों के सफल संचालन एवं क्रियान्वयन हेतु एसपीवी (स्पेशल परपज व्हीकल) का गठन किया जाना है। सामुदायिक सुविधा केंद्र के अन्तर्गत डिजाइन सेंटर, उत्पादन सेंटर, ट्रेनिंग सेंटर, आर एण्ड डी सेंटर, कच्चामाल डिपो, उत्पाद डिस्प्ले सेंटर एवं सूचना केंद्र आदि स्थापित किये जायेंगे

जनेश्वर मिश्र राज्य हथकरघा पुरस्कार

जनेश्वर मिश्र राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना के अंतर्गत हथकरघा क्षेत्र में उच्च कोटि के बुनकरों को उनके कलात्मक एवं उत्कृष्ट हथकरघा वस्त्रों के उत्पादन पर पुरस्कृत कर सम्मानित किया जाता है। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस योजनान्तर्गत परिक्षेत्र तथा राज्य स्तरीय चयन समिति के माध्यम से सैम्पल का चयन किया जाता है। परिक्षेत्रीय स्तर उत्कृष्ट हथकरघा उत्पादन हेतु प्रथम श्रेणी को 20,000 रुपये, द्वितीय श्रेणी 15,000 रुपये एवं तृतीय श्रेणी को 10,000 रुपये के पुरस्कार दिए जाते हैं। इसी प्रकार राज्य स्तर पर राज्य स्तरीय पुरस्कार के रूप में प्रथम पुरस्कार 50,000 रुपये, द्वितीय 35,000 रुपये एवं तृतीय को 25,000 रुपये का पुरस्कार देने का प्रावधान किया गया है।

Photo_jaipurrugs.org

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कैसे करें आवेदन

इस योजना का लाभ लेने के लिए बुनकरों को अपने प्रार्थना पत्र में आय प्रमाण रूप में वोटर आईडी, आधार कार्ड, विद्यालय प्रमाण पत्र, विकलांगता की स्थिति में मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रदत्त प्रमाण पत्र, तहसीलदार द्वारा निर्गत अद्यतन प्रमाण पत्र वार्षिक आय हेतु, बुनकर प्रमाण पत्र के रूप में भारत सरकार या हथकरघा विभाग द्वारा जारी प्रमाण उत्कृष्ट कार्यों के प्रतिफल में पुरस्कार प्रमाण पत्र के साथ ही आवेदक का खाता संख्या, बैंक का नाम, बैंक शाखा का नाम, आईएफएससी कोड संलग्न करना अनिवार्य होगा। वे सहायक आयुक्त उद्योग हथकरघा एंव वस्त्रोद्योग के कार्यालय पर भी इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 

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