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कैसे पूरे प्रदेश के चहेता मुख्यमंत्री बन गए अखिलेश, जानिए अपने सीएम के  व्यक्तित्व की अनकही बातें

akhilesh19

31 January, 2017

न सत्ता के शीर्ष पर होने का रौब, न ही रसूख का दिखावा। अखिलेश यादव की इन बातों ने उन्हें जनता का मुख्यमंत्री बना दिया। जनता दरबार में पहुंचने वाला हरशख्स ये जानता और समझता है कि सीएम अखिलेश के समक्ष पहुंचने वाली उनकी हर आवाज बिना सुनवाई के नहीं लौटती है। चाहे जनसुनवाई पोर्टल हो या फिर जनता दरबार अखिलेश के जमीन से जुड़े होने के सबूत हर जगह आपको देखने को मिल जाएंगे।

अखिलेश यादव की जमीन से जुड़े होने की खासियत उन्हें परिवार से विरासत में मिली है। पिता मुलायम सिंह यादव अपने तरुणायी से ही किसानों के लिए आंदोलन में जुट गए थे। समाज के सबसे निचले स्तर पर रह रहे आदमी के उत्थान के लिए उन्होंने अपना जीवन सर्वस्व कर दिया। अखिलेश यादव खुद यह सब देखते हुए पले-बढे हैं। भले ही पिता मुलायम सिंह यादव प्रदेश सरकार में मंत्री रहे हों या फिर मुख्यमंत्री, अखिलेश यादव का जीवन हमेशा साधारण ही रहा। अखिलेश यादव के बचपन के साथी रहे और अब वरिष्ठ पत्रकार मोहित द्विवेदी बताते हैं कि अखिलेश यादव को व्यक्तित्व हमेशा से ही जमीन से जुड़ा रहा है। एक लेख में उन्होंने उल्लेख किया था कि कैसे वे अपनी मां मालती देवी की सेवा में हमेशा तत्पर रहते थे। मां वे आधुनिक सोच रखने के बजाय नवरात्र में चह अक्सर व्रत रहना पसंद करते थे।

अखिलेश यादव के व्यक्तित्व का यही देसीपन, सहजता और उदारता उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद भी बरकरार रहा। देश के समाजवादी पुरोधाओं में से एक मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव को राजनीति विरासत में मिली। पिता के राजनीतिक और सामाजिक संघर्षों को देख कर पले-बढे अखिलेश राजनीति में आने से पहले ही राजनीति के उतार-चढ़ाव से भली भांति वाकिफ हो गए थे।

अपनी कार्यशैली और मिलनसार स्वभाव के चलते वे पूरे प्रदेश के चहेते बन चुके हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके  इस व्यक्तित्व में और अधिक निखार आया। उनकी इस सहजता से ही कोई भी व्यक्ति आसानी से उनके समक्ष अपनी बात कह सकता है। याद कीजिए कैसे अखिलेश यादव के सरकारी आवास पर पहुंचने वाला एक रिक्शा चालक बेबाकी से अपनी बात रखा और सीएम अखिलेश ने भी उसे निराश नहीं किया। आज की तारीख में सोशल मीडिया के जरिए से भी जो कोई सीएम तक अपनी बात पहुंचाया, उन्होंने मदद की।

एक वाकया याद आ रहा है। गाजीपुर में एक पर्यटन स्थल के निरीक्षण के लिए सीएम अखिलेश पहुंचे तो वहां स्कूल की यूनिफार्म में कुछ बच्चे खेल रहे थे। सीएम अखिलेश ने उन बच्चों को अपने पास बुला लिया और उनका हाल चाल जाना। साथ ही बड़ी खूबसूरती से उसके स्कूल में पठन-पाठन का हाल और कुछ योजनाओं की जानकारी ली। ये बातें भले ही मामूली लगें, लेकिन थीं महत्वपूर्ण। पहला, प्रोटोकॉल से परे उनका व्यक्तित्व और दूसरा कार्यक्रमों का फीडबैक सीधे जनता से लेना। वैसे ऐसे वाकयों की बहुत लंबी फेहरिस्त है, जबकि अखिलेश यादव ने अपने सहज व्यक्तित्व से लोगों को चैकाया है। चाहे सुरक्षा की परवाह किए बिना अपना काफिला रोककर एंबुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराना, या फिर नोएडा में सड़क पर पढ़ते बच्चे को घर पर बुलाकर उनकी पढ़ाई की व्यवस्था करना।

ये सारी बातें उसी व्यक्ति में हो सकती हैं, जो बेहद जमीन से जुड़ा हो। अखिलेश यादव ने अपनी पारिवारिक माहौल में इस बातों को आत्मसात किया और उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुए भी जनता के साथ वैसा ही व्यवहार किया। यही वजह रही कि मां के लाड़ले बेटे के बाद वे प्रदेश की आमजनता के भी चहेता बन गए।

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