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महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और उत्थान को यूपी में मिला नया आयाम

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23 December 2016

बेटियां एक परिवार के लिए खुशियों की सौगात होती हैं, तो वे समाज और देश-प्रदेश की शक्ति भी होती हैं। समाज में बराबरी के हक की हकदार होने से ही उन्हें आधी आबादी कहते हैं। लेकिन पुरुष प्रधान समाज ने महिलाओं को ये सम्मान देरी से दिया, जबकि इसकी वो काफी पहले से ही हकदार रही हैं। हालाँकि अब वक्त बदल रहा है, बेटियां बढ़ रही हैं तो सोच में भी बदलाव आ रहे हैं। लेकिन ये बदलाव सिर्फ किताबी न रहें, इस लिए जरूरी है कि संस्थाएं और नियामक सजग रहें और बदलाव की बयार को सही मायनों में सही रास्ता दें। कई बार सरकारों के कदम को लोग सिर्फ दिखावा करार देते हैं या फिर इन कदमों के दूरगामी परिणाम का अंदाजा नहीं लगा पाते। महिला अधिकारों के प्रति सरकारों की उदासीनता कई बार दिखाई पड़ती रही है लेकिन उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के साढ़े चार साल बीतने के बाद यह दावे के साथ कहा जा सकता है कि यहाँ महिला सशक्तिकरण की बयार को न सिर्फ सही रास्ता दिया गया है, बल्कि उन्हें सुरक्षा, सम्मान के साथ आगे बढ़ने के अवसर भी दिये जा रहे हैं।

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उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने के लिए अखिलेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण मिशन के तहत सभी योजनाओं को केन्द्रीकृत रूप दिया है। महिला सशक्तिकरण के तहत राज्य सरकार महिलाओं से संबंधित सभी योजनाओं को केंद्रीकृत रूप देते हुए 11 जिलों में आशा ज्योति केंद्र संचालित किया है। आगरा, बरेली, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, कानपुर, कन्नौज, लखनऊ, इलाहाबाद, गोरखपुर और वाराणसी में ‘आशा ज्योति केंद्र’ स्थापित हुए हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित राज्य महिला सशक्तिकरण मिशन के तहत इस 11 जनपदों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आशा ज्योति केन्द्रों की स्थापना की गई है। इन केंद्रों पर बालिकाओं और महिलाओं को विभिन्न योजनाओं का समस्त लाभ एक ही छत के नीचे प्रदान किया जा रहा है। आशा ज्योति केन्द्रों पर हेल्पलाइन सेवाएं जैसे 1090 वूमेन पॉवरलाइन, 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन व 108 एम्बुलेंस सेवाएं आपस में जुड़ीं, जो संबंधित विभागों की सेवाओं हेतु समन्वय स्थापित करने का कार्य करेंगी।

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इसके पहले सरकार आशीर्वाद योजना के तहत छात्राओं को 20-20 हजार रुपये की एफडी व साइकिल बांट चुकी है। राज्य सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष की स्थापना की है।  लड़कियों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए जहां सरकार रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार दे रही है, वहीं लड़कियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए ‘हमारी बेटी-उसका कल योजना और बालिकाओं को कन्या विद्याधन भी उपलब्ध करा रही है, जिससे लड़कियां अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

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छात्राओं को उनकी पढ़ाई जारी रखने और उच्च शिक्षा के लिए सरकार कन्याधन विद्या योजना तो चला ही रही है, छात्रवृत्ति की तमाम योजनाओं से भी उन्हें प्रोत्साहित कर रही है। संशोधित कन्या विद्याधन योजना के अन्तर्गत प्रति छात्रा 30 हजार रुपये की दर से प्रोत्साहन स्वरूप धनराशि देने की व्यवस्था की गई है। एक दौर था, जब बेटियों के लिए पढ़ाई जारी रखना भी मुश्किल होता था। अखिलेश यादव की सरकार ने फ्री लैपटॉप बांटकर लड़कियों को बेहतर शिक्षा के लिए प्रेरित तो किया ही, उन्हें दुनिया जहान से भी रूबरू कराने का काम किया है। प्रदेश सरकार की ओर से जो 17 लाख नि:शुल्क लैपटॉप बांटे गये हैं, उसमें बड़ी संख्या में लैपटॉप छात्राओं को दिया गया है।

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समाजवादी पेंशन योजना के रूप में समाजवादी सरकार ने देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना लागू की है। समाजवादी पेंशन योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया के खाते में हर महीने सीधे उनके खाते में 500 रुपये की सहायता मुहैया करायी जा रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 55 लाख गरीब परिवारों को समाजवादी पेंशन मिलने जा रही है। समाजवादी पेंशन योजना के साथ साक्षरता मिशन को जोड़कर खास कर महिलाओं को शिक्षित बनाने का काम सरकार कर रही है। इस स्कीम के तहत 3 करोड़ 6 लाख लोगों के बैंक खाते खोले गए। जबकि 45 लाख गरीब परिवारों की महिलाओं के खाते में सीधे पेंशन भेजने की व्यवस्था की गई। यह महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। इसी योजना के तहत वृद्धावस्था पेंशन 39 लाख, विधवा पेंशन योजना 16 लाख लाभार्थियों को मिल रहा है। समाजवादी पेंशन योजना के जरिये प्रदेश सरकार ने महिलाओं को विशेष तौर पर सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों से जोड़ने का काम किया है।

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इसके अलावा पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति व जनजाति, अल्पसंख्यक तथा सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए भी आर्थिक मदद भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने गरीब और पिछड़े तबके की बेटियों के विवाह के लिए भी बजट में प्रावधान किया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक तथा सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी हेतु आर्थिक सहायता की भी व्यवस्था की है।

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दूरदराज रहने वाली युवतियों के लिए भी तकनीकी शिक्षा पाने की राह आसान करने के लिए राज्य सरकार महिला पाॅलीटेक्निक का निर्माण करा रही है। तो निशक्त बालिकाओं को शिक्षित और प्रशिक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किए है। मूक-बधिर बालिकाओं के लिए गोरखपुर में राजकीय संकेत इण्टरमीडिएट विद्यालय, दो जिलों में आवासीय संकेत इण्टर कॉलेज खोलने के लिए भी बजट की व्यवस्था की है। इसके अलावा, दृष्टिबाधित बालिकाओं के लिए बांदा एवं मेरठ में राजकीय दृष्टिबाधित बालिका इण्टर कॉलेज की स्थापना के लिए 4 करोड़ रुपये की भी व्यवस्था में उन्होंने की है।

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इसी तरह राज्य सरकार गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने और वापस लाने के लिए ‘102’ और इमरजेंसी में अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 नेशनल एम्बुलेंस सर्विस उपलब्ध करा रही है। ग्रामीण क्षेत्र से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में 102 एम्बुलेंस महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है, इससे महिलाओं के इलाज में काफी मदद मिल रही है। इसी तरह राज्य सरकार प्रतिवर्ष महिलाओं को यश भारती तथा रानी लक्ष्मीबाई वीरता सम्मान से सम्मानित कर रही है। यश भारती से सम्मानित लोगों के लिए 50 हजार रुपये मासिक पेंशन की भी व्यवस्था की गयी है।

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राज्य में महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्थापित 1090 वूमेन पावर लाइन महिला उत्पीड़न रोकने में काफी मददगार साबित हो रही है, इससे महिला उत्पीड़न के लाखों मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। महिलाओं के लिए वीमेन पॉवरलाइन 1090 की सराहना अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हो चुकी है। इसकी मदद से अब तक लगभग करीब 6 लाख शिकायतों का निस्तारण कर महिलाओं को सहायता पहुंचाई जा चुकी है। इसके अलावा, उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिल रहे हैं तो समाज में अलग मुकाम बनाने वाली महिलाओं और युवतियों को सम्मानित कर उत्तर प्रदेश सरकार अन्य महिलाओं और युवतियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रही है।

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महिला सुरक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए सरकार जहां महिला थानों की संख्या बढ़ाने में जुटी है। वहीं लखनऊ, वाराणसी, आगरा, समेत प्रमुख शहरों में सड़कों के किनारे वाशरूम स्थापित करने पर भी विचार कर रही है। कन्या भ्रूण हत्या पर राज्य सरकार का रवैया पहले से ही सख्त है।

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