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रथयात्रा स्पेशल: उत्तर प्रदेश में किया डिजिटल लोकतंत्र का शंखनाद, अखिलेश के नेतृत्व से यूपी होने जा रहा और आबाद

 

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07 November 2016

तकनीकी के इस्तेमाल से कामकाज तो आसान होता ही है, इसके एक बड़ा पहलू है पारर्शिता और भ्रष्टाचार की रोकथाम। इसी मकसद से अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में डिजिटल लोकतंत्र का शुभारंभ किया है। तकनीकी के बेहतर इस्तेमाल का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश एक-एक कर विकास के नए एजेंडे पूरे करते हुए विजयपथ की ओर अग्रसर है।

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सत्ता की कमान अपने हाथों में लेने के साथ प्रदेश के डिजिटल विकास पर जोर दिया है। जहां 18 लाख से ज्यादा युवाओं के हाथों में लैपटाप थाम कर उनके लिए पूरी दुनिया को देखने, परखने और ज्ञान के असीमित भंडार की खिड़की खोली, वहीं अब उनकी सरकार ने प्रदेश भर में स्मार्टफोन का मुफ्त वितरण करने का ऐलान कर डिजिटल लोकतंत्र का शंखनाद कर दिया है। दुनिया में हो रहे बदलावों से भला उत्तर प्रदेश कैसे अछूता रह सकता है। अखिलेश यादव ने नई दुनिया की तकनीकी से पूरे प्रदेश को जोड़ने का जो काम किया है, उससे आने वाले दिनों में न सिर्फ शासन-प्रशासन के कामकाज सरल होंगे, बल्कि जनता को भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करने के अवसर मिलेंगे। हर हाथ में स्मार्ट फोन होने पर लोगों पर सरकार की योजनाओं और सूचनाओं के बारे में जानकारी तेजी से पहुंचेंगी। साथ ही साथ प्रशासनिक कामकाज सरल होंगे और पारदर्शिता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि 21वीं सदी सम्भावनाओं की सदी है। इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार लगातार सूचना तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है, जिससे समाज के सभी वर्गों को विकास के लिए समान अवसर उपलब्ध हो सकें।

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भारत में डिजिटल सीएम के रूप में अलग पहचान बना चुके अखिलेश यादव ने इसी कड़ी में यूपी पुलिस को सोशल मीडिया की ट्विटर सेवा से लैस किया है। इसके माध्यम से लोग न सिर्फ घर बैठे पुलिस थानों में अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें, बल्कि ट्विटर पर दर्ज होने वाली शिकायतों का रियल टाइम समाधान और जिम्मेदारों की जबावदेही भी सुनिश्चित होगी। ऐसे में आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में पुलिस की ट्विटर सेवा अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। इस सेवा को शुरू करने के साथ उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है।

उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध को रोकने के लिए साइबर लैब के साथ-साथ लखनऊ और नोएडा में साइबर थानों की स्थापना करायी जा रही है। सरकार की नजर उन असामाजिक तत्वों पर है, जो सोशल मीडिया पर अफवाह फैला कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसे लोगों से निपटने के लिये यह नई पहल की गई है।

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कामकाज के तरीकों में बदलाव लाते हुए अखिलेश सरकार शुरू से ही ई-गर्वनेंस पर जोर दे रही है। ताकि जनता को पारदर्शी व्यवस्था दी जा सके। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आने लगे हैं। उत्तर प्रदेश के देश का एकमात्र राज्य है जिसके सभी जिलों में ई-गवर्नेंस क्रियांवित की गई है। ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए भारत सरकार भी उत्तर प्रदेश सरकार को पुरस्कृत कर चुकी है।  ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर सेवायें प्राप्त करने हेतु प्रदेश का कोई भी नागरिक सीधे इन्टरनेट एवं पेमेन्ट गेट-वे का उपयोग करते हुए सेवा प्राप्त कर सकता है। प्रदेश में 28 हजार से अधिक जन सेवा केन्द्र संचालित है।

उत्तर प्रदेश सरकार की सूचना प्रौद्योगिकी एवं स्टार्ट अप नीति-2016 के तहत सरकारी सूचनाओं का डिजिटाइजेशन तथा साइबर सुरक्षा की व्यवस्था की गयी है। सरकारी सूचनाओं के डिजिटाइजेशन के तहत सरकारी गजट अधिसूचनाओं,शासनादेशों अधिनियमों, नियमावलियों,परिपत्रों, नीतियों तथा कार्यक्रम अभिलेखों जैसी सभी पब्लिक डोमेन सूचनाओं का डिजिटाइजेशन होगा।

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अखिलेश ने इससे पहले भी कई ऐसी योजनाएं लागू की हैं, जिससे ये कहा जा सकता है कि यूपी में भी डिजिटलाइजेशन तेजी से बढ़ रहा है। अखिलेश सरकार ने जिस तरह आगरा एक्सप्रेस-वे, लखनऊ मेट्रो, आईटी सिटी सहित डवलपमेंट के कई बड़े काम किए हैं, वैसे ही आमजन का जीवन सहज बनाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ई-गवर्नेंस व मोबाइल (एम) गवर्नेंस को लेकर कई बेहतरीन पहल की है। याद कीजिए पहले की सरकारों में लापता सामानों की रिपोर्ट दर्ज कराने को थाने में पुलिस की किस तरह मिन्नतें करनी पड़ती थी, लेकिन अब आप अब यूपी पुलिस लॉस्ट रिपोर्ट एप्लीकेशन पर घर बैठे सूचना दर्ज करा सकते हैं। इसी तरह जन शिकायतों की सुनवाई के लिए हर महकमे के अलग-अलग पोर्टल थे और उस पर कार्रवाई का कोई निगरानी तंत्र नहीं था। मुख्यमंत्री ने इसे खत्म करवाके एक जन सुनवाई पोर्टल शुरू कराया। इसकी माॅनिटरिंग खुद सीएम अखिलेश करते हैं।

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महिलाओं की मदद के लिए 1090 हेल्पलाइन की काफी सराहना हुई है। मुख्यमंत्री विधानसभा में करीब छह लाख महिलाओं को इसके माध्यम से अब तक मदद पहुंचाई जा चुकी है। मुख्यमंत्री की डिजिटल दुनिया से लोगों को जोड़ने के लिए की गई पहल को एक वेबसाइट के जरिये पेश किया जा रहा है। ‘डिजिटलसीएम.इन’ नाम की यह वेबसाइट अखिलेश के डिजिटल प्रयोगों का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराती है।

सेवायोजना पोर्टल युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खोल रहा है तो मंडियों में ई-आॅक्शन की व्यवस्था ने उपज की खरीद फरोख्त में किसानों को बिचैलियों से मुक्ति दिलाई है। उच्च से लेकर बेसिक शिक्षा को स्मार्ट एजुकेशन से जोड़ने की पहल भी अखिलेश सरकार में ही संभव हो सकती है। तो देश में पहली बार उत्तर प्रदेश की विधानसभा को डिजिटल क्रांति से जोड़ा गया है। अब प्रदेश की जनता भी विधानसभा में होने वाली कार्यवाही को ऑनलाइन देख सकेगी।

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मुख्यमंत्री अखिलेश के डिजिटल लोकतंत्र की कोशिशें यहीं तक सीमित नहीं उसकी लंबी फेहरिस्त में से कुछ ये भी हैं-

  • शक्ति 1090 मोबाइल एप्लीकेशन
  • यूपी पुलिस लॉस्ट रिपोर्ट एप्लीकेशन
  • चीफ मिनिस्टर बैंकिंग एंड बीमा हेल्पलाइन-1520
  • मोबाइल टिकटिंग एप
  • एम-सेहत मोबाइल एप्लीकेशन
  • मीडिया हेल्पलाइन-1880-1800-303
  • वेब पोर्टल-यूपी न्यूज 360
  • 181 महिला आशा ज्योति हेल्पलाइन
  • फेसबुक के साथ बूस्ट योर बिजनेस इनीसिएटिव
  • जनसुनवाई इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रीड्रेसल सिस्टम
  • घर बैठे ऑनलाइन एफआइआर दर्ज करने की सुविधा
  • डायल-100 की तैयारी
  • यूपी पुलिस सोशल मीडिया सेल
  • बिजली बिल भुगतान की ऑनलाइन सुविधा
  • ऑनलाइन पेंशन भुगतान सुविधा
  • कोषागारों में ई-पेमेंट की सुविधा
  • वाट्सएप नंबर पर किसान चैपाल

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