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रथयात्रा स्पेशल: अखिलेश के पास मदद मांगने आया कोई शख्स खाली हाथ नहीं लौटा, फिर सहयोगी सरकार देने की तैयारी

 

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04 November 2016

1175 से 1797 के दौरान अवध के एक नवाब हुआ करते थे आसिफ-उद-दौला। उनके राज में लखनऊ में भयंकर बाढ़ आई थी। हजारों लोग बेघर हो गए थे। आसिफ-उद-दौला ने तब लोगों की मदद की अनूठी तरकीब निकाली। लखनऊ में तमाम इमारतों का निर्माण शुरू कराया और लोगों को काम दिए गए, ताकि लोगों की स्थिति में सुधार हो। तबसे यह मिसाल आम हो चुकी है कि ‘जिसको ना दे मौला, उसको दे आसिफ- उद-दौला’। उस दौर के बाद से वर्तमान में फिर वैसी ही मिसालें सामने आ रही हैं कि मदद की उम्मीद से आया कोई भी शख्स सीएम अखिलेश यादव के पास से खाली हाथ नहीं लौटता है। अखिलेश की ये खूबियां जनता का दिल तो जीतती ही हैं, विरोधियों को भी उनकी तारीफ करने के लिए मजबूर कर देती हैं।
हाल का ही तो वाकया है जब पेटीएम के सीईओ को अपने रिक्शे पर लेकर सीएम आवास पहुंचे मणिराम को अखिलेश यादव की खुशियों की सौगात दे दी। अखिलेश दावा भी करते है कि अगर कोई जरूरतमंद उनकी संज्ञान में आ जाता है तो वे बिना कोई भेदभाव किए उसकी हरसंभव मदद करते हैं। मददगार सीएम के रूप में स्थापित हो चुके अखिलेश के मानवीय व्यक्तित्व के ऐसे तमाम उदाहरण मिल जाएंगे। पिछले पांच साल के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लगभग हर कार्यक्रमों में उनके साथ मौजूद रहने वाले उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चैधरी कहते हैं- अखिलेश यादव की सरकार के कार्यों और खुद मुख्यमंत्री के अनूठे व्यक्तित्व के चलते उनकी लोकप्रियता का ग्राफ दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। आज की राजनीति में उनके जैसा बेदाग, निर्मल छवि और संवेदनशील व्यक्तित्व का सर्वथा अभाव दिखता है। आज के दौर में जहां नेता राजनीति को अपने स्वार्थ और महत्वाकांक्षी की पूर्ति का साधन मान चुके हैं, वहीं अखिलेश ने राजनीति को सेवा के माध्यम के रूप में चुना है। इसीलिए जनता का उनके प्रति बेमिसाल भरोसा है। अखिलेश यादव जहां भी जाते हैं उनसे मिलने, दुख-दर्द साझा करने वालों की कल्पनातीत भीड़ जमा हो जाती है। हजारों की संख्या में लोग खुद-ब-खुद उनके स्वागत में उमड़ पड़ते है। उनमें किसान, नौजवान, अल्पसंख्यक, महिलाएं और बच्चे सभी शामिल होते हैं। पिछले दिनों दिवाली के मौके पर परिवार के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लखनऊ से इटावा जा रहे थे। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर गाड़ी चलाते हुए वे एक जगह कुछ मजदूरों को काम करते देखा तो गाड़ी रोक दी और मजदूरों से बातचीत की। साथ ही यह कहकर उनकी तारीफ की कि देश के इस सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे के निर्माण में इन श्रमिकों का सबसे बड़ा योगदान है। ऐसे तमाम मिसालें दी जा सकती हैं। तो ऐसी ही कुछ मिसालों से आइए हम आपको रूबरू कराते हैं-

बिजनौर की रीमा को दी मदद
कैंसर से ग्रसित रीमा अपनी गरीब के चलते ठीक तरीके से इलाज नहीं करा पा रही है। बिजनौर के बुद्धा अस्पताल में भर्ती रीमा के बारे में जब सीएम अखिलेश को पता चला तो उन्होंने फौरन उनके इलाज में मदद की और 65 हजार की आर्थिक मदद मिली है।

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टांडा के गरीब परिवार पर दिखाई दरियादिली
अम्बेडकर नगर जिले के टांडा तहसील क्षेत्र में एक दलित परिवार के 6 बच्चे और उनकी मां विद्या कुपोषण की शिकार हो गई थी। विद्या और उसके सबसे छोटे 2 साल के बेटे की हालत तो बेहद गंभीर हो चुकी थी। सोशल मीडिया, न्यूज चैनल और वेबसाइट के मार्फत जैसे ही खबर सीएम अखिलेश यादव के संज्ञान में आई उन्होंने स्थानीय प्रशासन को पीड़ित परिवार को तत्काल भोजन और चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने का निर्देश दिया। वहीं लापरवाही पर सख्ती करते हुए आंगनबाड़ी की मुख्यसेविका के खिलाफ कार्रवाई का आदेश भी दिया। इसके साथ ही परिवार को प्रदेश सरकार की अन्य योजनाओं का भी लाभ दिलवाया गया है। सरकार ने इस परिवार को इंदिरा आवास का मकान भी दिया है।

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2 साल के वंश का कराया इलाज
अखिलेश यादव ने ब्लड कैंसर से जूझ रहे बरेली के दो साल के मासूम वंश का इलाज कराने के लिए आर्थिक मदद दे चुके हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश ने पीड़ित बच्चे की मां के उस पत्र पर यह कदम उठाया। मां ने अपने लाड़ले के इलाज की सीएम से गुहार लगाई थी। इसके बाद वंश लखनऊ के संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ने वंश के इलाज में उसके परिवार को हर जरूरी मदद का भरोसा दिया।

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अखिलेश की नेकदिली से रामसुंदर को मिलीं सांसें
राम सुंदर की तबीयत लम्बे समय से खराब चल रही है। जिसका उपचार कराने वह देवरिया से लखनऊ आये। उन्हें बेहोशी की हालत में कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गया था। घर वाले उम्मीद छोड़ चुके थे। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति आड़े आ रही थी। जिसकी वजह से उनके इलाज में दिक्कतें आ रहीं थीं। रुपये.पैसे की किल्लत और कोई भी उनकी मदद करने को तैयार नहीं था। इस सूचना को लोहिया संस्थान के कार्डियोलॉजी विभाग ने प्रदेश सरकार तक पहुंचाई और संदेश मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंचा। इस पर मुख्यमंत्री संजीदा हुए और उन्होंने तुरंत डॉक्टरों को पेसमेकर लगाने के आदेश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री ने उनके इलाज से जुड़ी किसी भी आर्थिक स्थिति के संकट का जिम्मा लेने की बात कही। आज रामसुंदर की सांसे अच्छे से चलने लगी हैं।

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पत्रकार की बेटी के इलाज के लिए दिए 10 लाख रुपये
दैनिक जागरण के पत्रकार राजेश मिश्रा की बेटी माहिनी का लिवर खराब हो गया था। इसलिए उनका लिवर ट्रान्सप्लाण्ट होना है। मोहिनी का इलाज गुड़गांव के मेदान्ता हास्पिटल में चल रहा था। वहाँ महंगी दवा के चलते पत्रकार राजेश मिश्रा को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी जरूरत को समझते हुए सीएम अखिलेश ने उन्हें आर्थिक मदद मुहैया करने की घोषणा की।

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अखिलेश कराया अंश का इलाज
आगरा जिले के गोकुलपुरा निवासी कृष्णदत्त का 10 साल का बेटा अंश ब्लड कैंसर से जूझ रहा था। उसने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर अपने इलाज के लिए आर्थिक मदद मांगी थी। वैसे तो अंश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी चिट्ठी भेजी थी, लेकिन इस पर अखिलेश यादव ने तत्काल संज्ञान लिया और आगरा के डीएम को अंश के इलाज के लिए हरसंभव मदद करने का निर्देश दिया।

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ट्विटर पर सूचना पाकर कराया गरीब बच्चों का एडमिशन
गरीब बच्चों के स्कूल में एडमिशन के लिए गाजियाबाद में भोवापुर इलाके में रहने वाली अपर्णा चंदेल की जब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानीए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने मदद नहीं की तो उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ट्वीट किया। दूसरे नेताओं से अलग अखिलेश यादव ने इस पर फौरन कार्रवाई की और सभी बच्चों का स्कूल में एडमिशन कराया।

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अपनी फ्लीट रुकवाकर एंबुलेंस को दिया रास्ता
मुख्यमंत्री अखिलेश सोमवार को बदायूं और बरेली के दौरे पर गए थे। वहां से लौटने के दौरान लखनऊ में अमौसी एयरपोर्ट से वह सरकारी आवास की ओर जा रहे थे। मुख्यमंत्री का काफिला एयरपोर्ट से बंगला बाजार के पास पहुंचा था कि पीछे से हूटर बजाती एक एंबुलेंस की आवाज सुनाई दी। मुख्यमंत्री ने तुरंत अपनी फ्लीट को रुकने का इशारा किया और एंबुलेंस को पास देने को बोला। सीएम ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बगैर न सिर्फ अपने काफिले को रोका बल्कि अपने सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि एम्बुलेंस को केजीएमयू तक एस्कॉर्ट किया जाएए ताकि मरीज को अस्पताल तक पहुंचने में देरी न हो।

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इससे पहले भी कई मौकों पर मुख्यमंत्री ने मानवता की मिसाल पेश कर लोगों को नई जिंदगी देने का काम किया है। लखनऊ के जीपीओ पर टाइपिस्ट कृष्ण कुमार की घटना हो या देवरिया की बच्ची रेनू के ट्यूमर का ऑपरेशन, गाजियाबाद की महिला ऑटो चालक रुबी सिंह को नया ऑटो दिलाने जैसी पहल हो या नोएडा में स्टीटलैप की रोशनी में पढ़ने वाले बच्चे की शिक्षा की व्यवस्था, जरूरतमंदों को मदद करने से सीएम कभी चूके नहीं हैं। उनकी इन्हीं खूबियों के चलते जनता का अखिलेश यादव पर अटूट विश्वास है। यूपी में विकास की अलख जगाकर उसे विजयरथ पर सवार करने के बाद अखिलेश अब दोगुने उत्साह से लबरेज हैं और विश्वास व विकास के एक और पारी खेलने को तत्पर भी हैं।

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