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रथयात्रा स्पेशल : किसानों की खुशहाली तय कर यूपी को विकास रथ पर ले चले सीएम अखिलेश

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06 November 2016

यदि आपमें नकारात्मकता है तो आप हर अवसर में मुश्किल देखेंगे, और यदि सकारात्मकता है तो आप हर मुश्किल में अवसर देखेंगे। किसी महान विचार के ये कथन उत्तर प्रदेश के हालात पर भी सटीक बैठते हैं। विरासत में बदहाली और भ्रष्टाचार से त्रस्त उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद मिलने के बावजूद अखिलेश यादव ने राज्य को प्रगति के रास्ते पर ले जाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। परिणाम सामने हैं। जिस राज्य में कभी निवेश आने से कतराते थे, आज वहां नई अवस्थापनाएं स्थापित की जा रही है। किसान खुशहाल हो रहे और उनकी खुशहाली से उत्तर प्रदेश संपन्न हो रहा है।

ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए अखिलेश यादव यह भलीभांति जानते हैं कि जब तक गांव का विकास नहीं होगा, गांव में रहने वाले किसान सम्पन्न और समृद्ध नहीं होंगे तब तक देश या राज्य के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। उत्तर प्रदेश में किसानों की बहुलता है। ऐसे में उनकी समृद्धि उत्तर प्रदेश की आर्थिक मजबूती के लिए बेहद मायने रखती है। यही वजह है कि अखिलेश सरकार ने किसानों की बेहतरी पर विशेष ध्यान दिया।

पिछले वर्ष एसोचैम की एक रिपोर्ट आई थी। उस रिपोर्ट में भी इस बात की तस्दीक की गई थी कि अखिलेश सरकार में यूपी के किसानों की स्थिति बेहतर हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 13 प्रतिशत भागीदारी के साथ उत्तर प्रदेश भारत के कृषि क्षेत्र में सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में उभरा है। एसोचैम ने स्टेट्स इमरजेन्स कॉम्परेटिव एनालिसिस आफ ग्रोथ एंड डेवलपमेंट शीर्षक से किये गये अपने एक अध्ययन के नतीजों के आधार पर बताया कि 2013-14 में भारत के कृषि एवं इससे जुडे क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत रही है। 2013-14 में उत्तर प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में कृषि एवं इससे जुड़े क्षेत्र का योगदान 22 फीसदी रहा है। इस उपलब्धि की वजह को इंगित कर रिपोर्ट में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र के बुनियादी क्षेत्र जैसे थोक और फुटकर बिक्री, भंडारण,वितरण और सिंचाई क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने की अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं।

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लगातार दो साल किसान वर्ष घोषित किए

ये उपलब्धियां अखिलेश यादव की उस सोच का नतीजा है, जिससे समाज के हर वर्ग और श्रेणी के लोगों के बीच विकास की खाई को मिटाने का काम किया गया है। इसी कड़ी में अखिलेश यादव सरकार ने 2015-16 के बाद वर्तमान वित्तीय वर्ष 2016-17 को भी ‘किसान वर्ष’ घोषित करके गांव एवं किसानों की तरक्की का रास्ता तैयार किया। इस दौरान किसानों की आर्थिक तरक्की सुनिश्चित करने के लिए उन्हें वैज्ञानिक तौर-तरीकों से खेती करने हेतु प्रशिक्षित दिया जा रहा है। साथ ही, उन्हें लाभकारी कृषि मूल्य दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को जागरूक करने एवं कृषि आधारित अन्य गतिविधियों को अपनाने पर बल देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। अखिलेश सरकार की इन कदमों के चलते ही खेती के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के लिए संचालित अन्य योजनाओं के फलस्वरूप ही प्रदेश में जींसों के साथ-साथ आलू, फल एवं सब्जियों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है। उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला राज्य बन गया है।

मंडियों की स्थापना कर उपज बेंचने की सहूलियत दी

किसानों को अधिक से अधिक लाभ देने के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के साथ मण्डियों की स्थापना की जा रही है। इस एक्सप्रेस-वे को अब बलिया तक ले जाने का काम शुरू किया गया है। सरकार के इस कदम से किसानों को उपज बड़े बाजारों तक ले जाने में सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही, वर्तमान मण्डियों की स्थिति सुधारने, नई मण्डियों की स्थापना करने के साथ-साथ मण्डी की कार्यप्रणाली आधुनिक बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

हर 10 किमी पर एक एग्रीकल्चर हब

किसानों को उनकी उपज की खरीद-फरोख्त के लिए अखिलेश सरकार ने हर 100 वर्ग किमी क्षेत्रफल यानी हर 10 किमी. के अंतर पर एक मंडी स्थल उपलब्ध कराने के लिए एक एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब का निर्माण कराए हैं। पूरे प्रदेश में अब तक 1643 एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब का कार्य कराया जा चुका है, जिसमें से 874 हबों को तो संचालित भी किया जा चुका है, जिससे किसाने अपने उत्पाद को एक परिसर में लगाकर उन्हें बेच सकें और उन्हें भटकने से बचाया जा सके।

बड़े शहरों में खोले किसान बाजार

किसानों को अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं को विक्रय की सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से बड़े शहरों में एग्री माल की तर्ज पर किसान बाजार के नाम से बाजार विकसित किये जा रहे हैं। वहीँ फल व सब्जी के लघु एवं सीमान्त कृषक उत्पादकों को अपनी कृषि उत्पाद यातायात के अभाव में स्थानीय हाट या बाजार में न बेचना पड़े, इसलिये उनके उत्पाद को निकटतम मण्डी में लाने हेतु परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिये मण्डी परिषद द्वारा प्रथम चरण में पांच मंडियों- कन्नौज, बहराइच, कानपुर, महोबा एवं ललितपुर में सुगम परिवहन योजना लागू की गई है।

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दुग्ध परिवहन योजना व कृषक सेवा केन्द्रों का निर्माण

मण्डी सुगम परिवहन योजना की तरह ही गाजीपुर से वाराणसी तक दुग्ध उत्पादकों के निःशुल्क परिवहन हेतु दो बसें चलायी जा रही हैं। 27 अक्टूबर 2014 से शुरू हुई इस योजना से अब तक 4652 दुग्ध उत्पादक लाभान्वित हो चुक हैं। दूसरी ओर किसानों को दी जाने वाली सुविधा जैसे- मिट्टी का परीक्षण, जैविक खाद, कृषि यन्त्र, उन्नतिशील बीज, एग्री क्लीनिक, सूचना विज्ञान केन्द्र, फसल संरक्षण आदि देने के उद्देश्य से समाजवादी सरकार ने सभी मंडी समितियों में कृषक सेवा केन्द्र  खोलने का निर्माण लिया है। इस क्रम में 87 कृषक सेवा केन्द्र की स्थापना हो गई है। वहीं ई-आक्शन से हेराफेरी पर लगाम लगाने के प्रयास भी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना

उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना से किसानों के साथ ही किसी भी व्यवसाय से जुड़े ऐसे लोगों को मदद देने का रास्ता तैयार किया है, जो भूमिहीन हैं या जिनकी अधिकतम सालान आय महज 75000 रुपये है। कृषक दुर्घटना बीमा योजना से कृषकों की दुर्घटना की स्थिति में उनकी मृत्यु पर, विकलांगता की स्थिति में या इलाज के लिए सरकार की ओर से आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। यह योजना पहले से चली आ रही ‘कृषक दुर्घटना बीमा योजना’ की जगह लागू की गई है। पहले ‘कृषक दुर्घटना बीमा योजना’ के अंतर्गत किसान की मृत्यु की स्थिति में अधिकतम 5 लाख रुपये का अनुदान दिया जाता था, लेकिन सरकार में नई योजना लाकर बीमा आवरण मृत्यु के अलावा पूर्ण विकलांगता में भी 5 लाख रुपये कर दिया है।

दुर्घटना सहायता योजना

कृषि कार्य करते समय अंग-भंग तथा मृत्यु होने पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को न्यूनतम तीन हजार और अधिकतम दो लाख रुपये की मदद दी जा रही है। दूसरी ओर खलिहान में आग लगने की स्थिति में खलिहान दुर्घटना सहायता योजना के अंतर्गत के तहत सरकार की ओर से जोत सीमा के आधार पर न्यूनतम 15,000 रुपये और अधिकतम 30,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। खड़ी फसल को भी अग्निकाण्ड दुर्घटना योजना के अन्तर्गत शामिल किया गया है।

Uttar Pradesh Chief Minister Akhilesh Yadav felicitating teachers with "Swarsati Samman"during a teachers felicitation programme at his official residence in Lucknow on saturday. Express photo by Vishal Srivastav 20.12.2014

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सिंचाई सुविधाओं में बढ़ोतरी

किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए सिंचाई सुविधाओं में बढ़ोतरी की गई। अधिकांश सिंचित क्षेत्रों का सदुपयोग करते हुए बुवाई क्षेत्रफल में वृद्धि करने का काम भी किया गया है। वर्ष 2012 में जहां प्रति हेक्टेयर औसत 23.91 कुन्टल उपज प्राप्त की गई थी, वहीं वर्ष 2015 में इसमें 5.02 प्रतिशत प्रति हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज करते हुए प्रति हेक्टेयर औसत 25.11 कुन्टल पैदावार प्राप्त की गई। कुल बोये गए क्षेत्रफल में वाणिज्यिक फसलों का हिस्सा करीब 258 फीसदी बढ़ा है।

सिंचाई शुल्क माफ

उत्तर प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी व्यवस्थाओं में से एक है और देश की सबसे बड़ी है। यह पहली सरकार है जिसके कार्यकाल में किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में सभी नहरों, माइनरों एवं रजबहों की सिल्ट सफाई कराके पानी को टेल तक एवं टेल से खेत तक पानी को पहुंचाया गया है। वहीं अखिलेश सरकार ने अपने अभी तक के कार्यकाल में प्रतिवर्ष 200 करोड़ रुपये के हिसाब से 700 करोड़ रुपये का सिंचाई का शुल्क यानी आबपाशी शुल्क माफ कर दिया है। इससे प्रदेश के तकरीबन 256 लाख किसानों को फायदा हुआ है। इससे किसानों को काफी राहत मिली है। इतना ही नहीं पहले जो नहर सिल्ट से पटे रहते थे, अब उनकी साल में दो सफाई कराई जा रही है। इससे उन इलाकों तक पानी पहुंचाया जा सका जहां 30 वर्षों से पानी नहीं पहुंचा था।

वर्षों से अधूरी पड़ी सिंचाई परियोजना हो रही पूरी

सरयू नहर परियोजना, बाण सागर नहर परियोजना, कनहर सिंचाई परियोजना, बदायूं सिंचाई परियोजना, आजमगढ़ में सिंचाई परियोजना, गंडक नहर प्रणाली के पुनरोद्धार की परियोजना, भूपौली पम्प नहर परियोजना जैसी तमाम योजनाओं वर्षों से अधूरी पड़ी थीं। अखिलेश सरकार ने बजट की व्यवस्था कर इस परियोजनाओं में जान फूंकने का काम किया।

अखिलेश सरकार ये काम सिर्फ किसानों तक ही सीमित नहीं रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को रोजगार व आय का बेहतरीन जरिया उपलब्ध कराते हुए उन्होंने कामधेनु योजनाएं शुरू कीं। इससे पशुपालकों की स्थिति बेहतर होने के साथ उत्तर प्रदेश आज दुग्ध उत्पादन में देश में सर्वश्रेष्ठ हो गया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अब एक बार फिर उत्तर प्रदेश को विकास की एक और नई उंचाई पर पहुंचाने के लिए तत्पर हैं। सकारात्मक सोच और नई उर्जा से लबरेज अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश को विकास रथ पर सवार कर उपलब्धियां की विजय पताका फहराने निकल पड़े हैं।

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