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अखिलेश यादव

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वैसे तो ये रिवायत नहीं रही है, पर जब तमाम ऐसी धारणाओं के किले ध्वस्त हो रहे हैं तो भला हम क्यों लकीर के फकीर बने रहें। तो हमने इस बार अपना ‘परसन ऑफ द वीक’ चुना है अखिलेश यादव को। अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उससे इतर उनमें एक मासूम सा इंसान बसता है जो अक्सर चौंका देता है। दरअसल हमारे और आपकी तरह ही यह घटना मणिराम के लिए परिकथा सी है, पर है हकीकत।

मणिराम रायबरेली के रहने वाले हैं और लखनऊ में रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं। हुआ यूं कि पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा सीएम अखिलेश के मिलने उनके सरकारी आवास जा रहे थे। ट्रैफिक जाम में गाड़ी फंसी तो मणिराम के रिक्शा पर बैठ गए। 50 रुपये किराया तय हुआ। मणिराम के लिए तो विजय शेखर आम सवारी ही थे। सवारी लेकर मणिराम सीएम आवास पहुंचे तब तक सबकुछ सामान्य था। पर वह लौट ही रहे थे कि अखिलेश यादव ने उन्हें रोक लिया। घर-परिवार का हालचाल लिया। दो घंटे तक मणिराम सीएम आवास पर ही रहे और जब लौटे तो उनकी दुनिया बदल चुकी थी। सीएम ने दिवाली के गिफ्ट के तौर पर उन्हें 6 हजार रुपये दिए और नया रिक्शा भी दिलाया। साथ ही उन्हें लखनऊ में आवास और मणिराम की पत्नी को समाजवादी पेंशन देने का आदेश भी जारी करवाया।

अखिलेश यादव की जगह कोई आम इंसान होता तो यह बात शायद नोटिस भी नहीं की जाती। लेकिन जब सीएम जैसा कोई बेहद खास व्यक्ति जमीन से इतना जुड़ा देखा जाए तो चकित होना लाजिमी है। अखिलेश ने भी चकित किया। क्योंकि ये वही सीएम आवास है जहां अखिलेश के मुख्यमंत्री रहने से पहले आम आदमी पहुंचने की कल्पना भी नहीं कर सकता था। दरअसल इस घटना और ऐसी तमाम घटनाओं से अखिलेश सुखद अनुभूति कराते हैं कि उनके व्यक्तित्व में मिट्टी से जुडे़ रहने की सौंधी खूशबू है तो दुर्लभ मानवीय पहलू भी है, जो जब कभी दिखती है तो कौतूहल पैदा करती है कि इतनी उंचाई पर भी रहने के बाद किसी के पैर जमीन पर टिके रह सकते हैं। ये बातें उन्हें सियासत की दुनिया में अलहदा बनाती हैं।

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