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वनमैन आर्मी अखिलेश यादव के सामने सम्पूर्ण मोदी सरकार

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मौजूदा समय में प्रदेश के सबसे बड़े नेता के तौर पर उभरे हैं। उनके सामने विपक्ष बीजेपी और आरएसएस की पूरी फ़ौज उतर पड़ी है। जिसमें प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर, उर्जा मंत्री पीयूष गोयल, वित्तमंत्री अरुण जेटली से लेकर तकरीबन 40 केन्द्रीय मंत्री पूरे यूपी में जमा हुए हैं। दूसरी भाषा में कहें तो बीजेपी ने एक अकेले अखिलेश यादव का सामना करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। ऐसा लगता है मानो यूपी का चुनाव न होकर ये लोकसभा चुनाव का प्रचार चल रहा हो। केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा और उमा भारती जो यूपी से सांसद हैं। वह भी अखिलेश यादव की सरकार पर कामकाज पर घेरने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि अपने विभागों में उन्होंने पिछले तीन साल तक क्या किया उन्हें खुद नहीं पता है। गंगा सफाई करने की बात करने वाली उमा भारती के मंत्रालय ने गंगाजल बेचना तो शुरू कर दिया लेकिन गंगा सफाई कितनी की ये सबको पता है।

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गलत आंकड़ें पेश करते हैं पीएम मोदी

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पीएम मोदी विकास की बात छोड़ अखिलेश यादव को पुरानी बातें याद दिला रहे हैं। साथ ही वह अपनी सरकार की तीन साल की नाकामियों को छुपाने के लिए अखिलेश यादव और राहुल गांधी के साथ आने पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पीएम मोदी से लगातार कहते रहे हैं कि मन की बात करने के बजाय मोदी जी काम की बात क्यों नहीं करते हैं। अपने भाषणों में पीएम मोदी यूपी पर आरोप लगाने वाले गलत आंकड़े भी पेश करते हैं। सबको पता है कि सबसे ज्यादा आत्महत्या बीजेपी शासित महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में होते हैं। इसके अलावा सबको पता है कि रेप के मामले में मध्यप्रदेश और राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में आते हैं। लेकिन मोदी जी चुनाव प्रचार के अपने भाषण में गलत आंकड़े बताकर यूपी का अपमान करने से नहीं चूकते हैं।

एक अखिलेश बनाम भारत सरकार

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इस चुनाव को बीजेपी अभी नहीं तो कभी नहीं के तर्ज पर लड़ रही है। केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा, स्मृति ईरानी से लेकर भारत सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक यूपी में डटे हुए हैं। लेकिन अखिलेश यादव डटे हुए हैं। उन्हें अपने काम में भरोसा है और अपने घोषणा पत्र में भरोसा है। जिसको लेकर वह आम जनता से मुखातिब हो रहे हैं। इसके अलावा बीजेपी यूपी विधानसभा चुनाव भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ही लड़ रही है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह हों या भारत सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह या कोई अन्य मंत्री या दूसरे राज्य के मुख्यमंत्री सभी इस चुनाव में नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। इसे जीतने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भोर के चार बजे तक बैठक कर रहे हैं। बीजेपी के सभी नेता बौखलाहट में मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए यहां तक बोल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में दोपहर में भी महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल पाती हैं। जिसका कोई आधार ही नहीं है।  पीएम मोदी भी सीएम अखिलेश यादव के खिलाफ बोलते समय उन्हें यह भी याद नहीं रख पाते हैं कि वह देश के प्रधानमंत्री हैं। देश के किसी भी हिस्से में यह शर्मनाक स्थिति उनके लिए ठीक नहीं है। यूपी चुनाव में अखिलेश यादव की लोकप्रियता को देखते हुए मोदी को साल 2019 का आम चुनाव डर भर रहा है। उनके अंदर ये डर है कि कहीं वह अपनी हासिल की हुई राजनीतिक जमीन खो न दें। साथ ही ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री और उनके अन्य मंत्री पर्यटन पर निकले हैं। रैलियों और सभाओं में इस तरह के जुमलों की वजह से नीचे तक सन्देश है कि इस बार का चुनावी दंगल सीधे-सीधे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और भारत सरकार के बीच है।

डटे हुए हैं सीएम अखिलेश यादव

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एक तरफ केंद्र सरकार की पूरी फ़ौज तो दूसरी तरफ धरती पुत्र उर्जावान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अकेले यूपी चुनाव में डटे हुए हैं। सीएम अखिलेश यादव की लोकप्रियता और उनके विकास कार्य यूपी के जनमानस में घर कर गयी है। भले ही बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी हो, लेकिन यूपी की जनता एक चेहरा पहचानती, वह है विकास का चेहरा अखिलेश यादव। आज जब वह चुनावी जनसभाओं में जनता से मुखातिब होते हैं, तो जो उम्मीद और आशा जनता के मन उनके लिए जगती है। वह बीजेपी की रैलियों से गायब रहती है। ऐसे में एक बात साफ़ हो जाती है कि बीजेपी चाहे लाखों नेताओं को यूपी में प्रचार के लिए झोंक दे। फिर भी यूपी की जनता अपने सीएम अखिलेश यादव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हुई है।

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