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UP में अब 2 रु गेहूं, 3 रु kg चावल, लागू हुआ फूड सिक्युरिटी एक्ट

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लखनऊ.यूपी में गरीबों को अब 2 रुपए प्रति किलो गेहूं और 3 रुपए प्रति किलो चावल मिलेगा। 1 मार्च से फूड सिक्युरिटी एक्ट पूरे प्रदेश में लागू हो गया। अभी तक इस रेट पर सिर्फ अंत्योदय परिवार वालों को ही इसका लाभ मिलता था, लेकिन अब बीपीएल और एपीएल परिवारों को भी इसका फायदा मिलेगा। वैसे प्रदेश के 28 जिलों में यह सुविधा एक जनवरी से ही लागू है। अब बाकी बचे 47 जिलों में भी यह कानून लागू हो गया है।

नए सिरे से होगा अनाज का अलॉटमेंट…

  1.  प्रिंसिपल सेक्रेटरी फूड सुधीर गर्ग ने बताया कि एक मार्च से 47 जिलों में फूड सिक्युरिटी एक्ट लागू हो रहा है
  2.  इसके तहत नए सिरे से जिलों के लिए अनाज का अलॉटमेंट किया जाएगा। अगर कहीं कोई दिक्कत होगी, तो उसे ठीक किया जाएगा।
  3.  हालांकि, सभी कंज्यूमर्स को इस एक्ट का पूरा लाभ अप्रैल से ही मिल पाएगा, क्योंकि जिलों से अभी तक पूरा डाटा नहीं मिल पाया है।
  4.  ऐसे में कमिश्नर ऑफिस से पिछले महीने के आधार पर अनाज डिस्ट्रिब्यूट कर दिया गया है।
  5.  दरअसल, रूरल एरिया की 79.56% और अर्बन एरिया की 64% आबादी को इस कानून के दायरे में शामिल करना है, उसे देखते हुए पुराना अलॉटमेंट सभी के लिए काफी नहीं होगा, क्योंकि हर जगह उपभोक्ताओं की संख्या ज्यादा होना स्वाभाविक है।

इन जिलों में पहले से लागू है ये एक्ट

आगरा, अमरोहा, औरैया, बागपत, बस्ती, बिजनौर, बुलंदशहर, इटावा, फर्रुखाबाद, फीरोजाबाद, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा), गाजियाबाद, हापुड़, जालौन, झांसी, कन्नौज, कानपुर नगर, ललितपुर, मैनपुरी, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, संतकबीर नगर, सिद्धार्थ नगर, बुंदेलखंड, महोबा, चित्रकूट और हमीरपुर में फूड सिक्युरिटी एक्ट पहले से लागू है।

c1_1456828222फूड सिक्युरिटी एक्ट की 10 बड़ी बातें…

  1. फूड सिक्युरिटी एक्ट की खास बात यह है कि इस एक्ट से देश की दो-तिहाई आबादी को सस्ता अनाज मिलेगा।
  2. फूड सब्सिडी लागू होने पर सरकार के खजाने पर अतिरिक्त बोझ करीब 20,000 करोड़ रुपए होगा। इसके लिए करीब 6.123 करोड़ टन फूडग्रेन्स की जरूरत होगी। फूड सब्सिडी बिल पर कुल फूड सब्सिडी कवर करीब 1.3 लाख करोड़ रुपए होगा।
  3. इस बिल के तहत देश की 67 फीसदी आबादी को हर महीने 5 किलो अनाज प्रति व्यक्ति के हिसाब से मार्केट से कम दाम पर दिया जाएगा। बिल में कहा गया है कि 3 रुपए प्रति किलो के हिसाब से चावल और 2 रुपए प्रति किलो के हिसाब से गेहूं और बाकी अनाजों को 1 रुपए प्रति किलो के आधार पर देश की 75 फीसदी ग्रामीण आबादी और 50 फीसदी शहरी आबादी को दिया जाएगा।
  4. इस स्कीम को आधार स्कीम के साथ लिंक्ड किया जाएगा। इसके तहत हर नागरिक को एक विशिष्ट पहचान नंबर दिया जाएगा, जो कि डाटाबेस से लिंक्ड होगा। इसमें हर कार्डहोल्डर का बॉयोमीट्रिक्स डाटा होगा।
  5. पीडीएस के तहत अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के तहत आने वाले लगभग 2.43 करोड़ निर्धनतम परिवार कानूनी रूप से प्रति परिवार के हिसाब से हर महीने 35 किलोग्राम खाद्यान्न पाने के हकदार होंगे।
  6. लोकसभा में दिसंबर, 2011 में पेश बिल में लाभार्थियों को प्राथमिक और आम परिवारों के आधार पर विभाजित किया गया था। मूल विधेयक के तहत सरकार प्राथमिकता श्रेणी वाले प्रत्येक व्यक्ति को सात किलो चावल और गेहूं देगी।
  7. फूड बिल में संशोधन संसदीय स्थाई समिति की रिपोर्ट के अनुसार किए गए हैं, जिसने लाभार्थियों को दो वर्गों में विभाजित किए जाने के प्रस्ताव को समाप्त करने की सलाह दी। पैनल ने एकसमान कीमत पर हर महीने प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम अनाज दिए जाने की वकालत की।
  8. संयुक्त राष्ट्र द्वारा परिभाषित गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या भारत में 41 करोड़ है। यह संख्या उन लोगों की है, जिनकी एक दिन की आमदनी 1.25 डॉलर से भी कम है।
  9. गैर-सरकारी संगठनों की मुख्य आलोचना यह है कि बिल में मौजूदा बाल-कुपोषण से निपटने के प्रावधानों को विधिक अधिकार में बदला जा सकता था, जबकि सरकार ने ऐसा नहीं किया है।
  10. मार्च, 2013 में केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने कुछ बदलावों के साथ इस बिल को मंजूरी दी थी।
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