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मॉडर्न डांडी यात्रा पर निकली है ये लेडी, कहा- नाइट वॉक ज्यादा आसान

नागपुर. महिलाओं को सशक्त बनाने और अधिकारों के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाते हुए देहरादून की सृष्टि बख्शी, कन्याकुमारी से कश्मीर तक की पैदल यात्रा कर रही हैं। 15 सितंबर से शुरू हुई ‘क्रॉस-बो माइल्स’ नाम की इस यात्रा में वे 3800 किलोमीटर पैदल कवर करने वाली हैं। इसी कड़ी में वे नागपुर पहुंची थीं। इस मुहिम का मकसद ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाना है। गूगल भी उनकी इस मुहिम में उनकी हेल्प कर रहा है। सोशल मीडिया में लोग इसे ‘मॉडर्न डांडी मार्च’ भी कह रहे हैं। अबतक कवर कर चुकी हैं 1700 किलोमीटर…

– सृष्टि अब तक 1700 किमी की यात्रा कर चुकी हैं। बता दें कि यह यात्रा 15 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई थी और 28 अप्रैल 2018 को श्रीनगर पहुंचेंगी।
– सृष्टि ने कहा कि वे हर दिन 30 किमी व 36000 स्टेप चलती हैं। उन्होंने गूगल और अन्य कंपनियों के साथ नेटवर्क के लिए करार किया है।

– नेटवर्क का उद्देश्य महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए इंटरनेट की शक्ति का इस्तेमाल सिखाना है। उन्होंने इस यात्रा के लिए एक साल की ट्रेनिंग ली है।
– इस पैदल यात्रा में वे तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना होते हुए महाराष्ट्र पहुंची हैं। सृष्टि का लक्ष्य कन्याकुमारी से श्रीनगर तक 260 दिन में यात्रा करने का है।

इस यात्रा का मकसद
– सृष्टि ने बताया कि किसी भी मुहिम को अगर कामयाबी तक पहुंचाना है, तो हमें महिलाओं को उसमें शामिल करना होगा।
– इसके जरिए महिलाओं की सुरक्षा और इंटरनेट के जरिए बदलाव लाने का तरीका सिखाना है। सृष्टि बख्शी क्रॉस-बो माइल्स मुहिम की संस्थापिका हैं और अब तक वे कई गांवों और शहरों में महिलाओं के लिए कार्यशाला आयोजित कर चुकी हैं।
– सृष्टि बख्शी ने बताया कि उनका इरादा रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ना है। वे महिलाओं के हितों के लिए काम कर रही है। इसमें वे महिलाओं को उनकी सुरक्षा, डिजिटल व आर्थिक साक्षरता के बारे में जागरूकता का संदेश दे रही हैं।


नाइट वॉक ज्यादा आसान 
– उन्होंने कहा कि महिलाएं रात में सुरक्षित नहीं हैं। उन्हें सुरक्षित होने में वर्षों लग जाएंगे। धीरे-धीरे ही बदलाव आते हैं।
– उन्होंने बताया कि अब तक 16000 लोगों से मिल चुकी हैं। हाईवे पर रात में चलती हैं। रात में चलना आसान रहता है।
– इसके लिए वे जिलाधिकारी व पुलिस की मदद लेती हैं। सुरक्षा के लिए उनके पास बैकअप होता है। उनके साथ उनकी टीम है, जिनमें उनके पिता भी शामिल हैं।

ऐसे आया यह आइडिया
– सफर के लिए किसने प्रेरित किया के सवाल पर  बख्शी का कहना है,”2016 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में एक मां और बेटी से गैंगरेप की खबर पढ़ी थी, तब से मेरे मन में यह विचार आया कि देश में महिला परिवार के साथ में भी सुरक्षित नहीं हैं। इस घटना ने मेरी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।”

 

यात्रा के बाद जारी करेंगी श्वेतपत्र
– सृष्टि के अनुसार महाराष्ट्र में उनकी टीम कई वर्कशॉप का आयोजन कर रही है। टीम ने महाराष्ट्र सहित 5 राज्यों की अपनी यात्रा में महिलाओं की समस्या को समझा है, जो ज्यादातर एक जैसी हैं, लेकिन उनकी मात्रा व संख्या अलग-अलग हैं। प्रमुख चुनौतियों में आत्मविश्वास की कमी, बालिकाओं के लिए सीमित शिक्षा के अवसर, दहेज, नशावृत्ति और घरेलू हिंसा हैं।
– क्रॉस-बो माइल्स का लक्ष्य महिलाओं की प्रमुख समस्याओं को जानना और संभावित समाधानों पर केंद्रित हो कर यात्रा के समापन पर श्वेतपत्र के रूप में अधिकारियों को सौंपना है।
– सृष्टि ने बताया, “महाराष्ट्र में महिलाएं मजबूत हैं, मेहनती हैं और समाज में उनकी अलग पहचान है, लेकिन वे बड़े सपने देखने और महत्वाकांक्षा की दिशा में बढ़ने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं, क्योंकि उन्हें अपनी इच्छाओं का दमन करना सिखा दिया जाता है। परिवार के स्तर पर लैंगिक व्यवस्था में थोड़ा बदलाव करके इसे सुधारा जा सकता है। इस अभियान का लक्ष्य महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर से होते हुए यात्रा के पूरे मार्ग में जागरूकता का प्रसार करना है।”

 

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