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सीएम अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड में पानी के 400 टैंकर भेजे

बुंदेलखंड की जनता की पानी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने वहां के लिए तत्काल करीब 400 पानी के टैंकर भिजवाए हैं। इसके साथ ही केंद्र से 10000 टैंकरों की व्यवस्था करने को कहा है, जिससे सड़क मार्ग से सीधे उन इलाकों तक पानी पहुंचाया जाए, जहां लोगों का जरूरत है। दूसरी ओर, इस बीच रेलवे ने भी माना है कि बुंदेलखंड के लिए केंद्र से जो टैंकर वाली ट्रेन भेजी गई है, उसमें पानी नहीं है। उत्तर मध्य रेलवे के पीआरओ गिरीश कंचन ने समाचार चैनल टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में स्वीकार किया है कि बुंदेलखंड की जनता की प्यास बुझाने का बहाने खाली टैंकर वाली ट्रेन लायी गई। ईटीवी उत्तर प्रदेश के संपादक ब्रजेश मिश्रा ने अपने ट्विटर हैंडल से भी इसकी पुष्टि की है। केंद्र सरकार की ओर से जिन 10 टैंकरों को भेजा है, असल में उनमें तो पानी नही हैं, सारे टैंकर खाली हैं। हालांकि सीएम ऑफिस ने डीएम झांसी को निर्देशित किया है कि टैंकरों की जांच कराई जाए।

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4 मई की रात वाटर ट्रेन के झांसी पहुंचने की बाबत झांसी के डिवीजन कमर्शियल मेनेजर और जन संपर्क अधिकारी गिरीश कंचन ने भास्कर डॉट कॉम को बताया कि ये टैंकर खाली ही आए हैं। झांसी रेलवे अभी मुख्यालय से कोई जानकारी नहीं दी गई है कि वाटर ट्रेन का क्या करना है।  सीएम ऑफिस के निर्देश पर डीएम झांसी ने रिपोर्ट भेज दी है, जिसके मुताबिक सच में सारे टैंकर खाली हैं। जबकि पहले ये दावा किया जा रहा था पानी के ये टैंकर राजस्थान के बाणसागर बांध से पानी लेकर महोबा भेजे जा रहे थे। जिन्हें झांसी स्टेशन के यार्ड में खड़ा किया गया है।

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केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड वासियों की प्यास बुझाने के लिए 10 टैंकर पानी भेजने की बात कही थी। बुंदेलखंड क्षेत्र में कुल 7 जिले- झांसी, जालौन, ललितपुर, बांदा, महोबा, चित्रकूट और हमीरपुर आते हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो प्रत्येक जिले के लिए महज एक टैंकर पानी आएगा। पर क्या इतने पानी से हर जिले में लोगों की प्यास बुझ सकेगी। अब जरा आंकड़ों पर गौर करें देखें कि इन जिलों की आबादी कितनी है। झांसी- की आबादी तकरीबन बीस लाख (2,000,755) है, हमीरपुर की जनसंख्या लगभग ग्यारह लाख (1,104,021) है, महोबा की आबादी लगभग आठ लाख (876,055) है, जालौन की आबादी लगभग सोलह लाख (1,670,718) है, ललितपुर की आबादी लगभग बारह लाख (1,218,002) है, बांदा की आबादी लगभग सत्रह लाख (1,799,541) है, चित्रकूट की आबादी लगभग नौ लाख (990,626) है। इस लिहाज से 10 टैंकर पानी से जिंदगानी कैसे चलेगी ये सोचने वाली बात है।

बिन पानी पहुंची ट्रेन, खर्च हो गए लाखों के डीजल

बताया जा रहा है कि टैंकर रतलाम भेजे गए। रतलाम से झांसी की सूरी 440 किलोमीटर है। रेलवे के जानकारों के अनुसार, रतलाम से झांसी तक अगर सिर्फ इंजन चलकर आता है तो इसमें करीब 1500 लीटर डीजल लगेगा।ऐसे में करीब 1 लाख रुपए से अधिक का खर्चा आया होगा।अगर ट्रेन वैैगन के साथ आती है तो इसमें करीब 2 से ढाई हजार लीटर डीजल की खपत होगी।इस हिसाब से करीब 1 लाख 40 हजार रुपए खर्च होंगे। एक बार ट्रेन का इंजन स्टार्ट होने में ही लगभग 35 लीटर डीजल की खपत होती है। ट्रेन के इंजन में डीजल खपत करने की क्षमता ट्रक के इंजन से 10 गुना ज्यादा होती है।

लातूर में तो ट्रेन से पहुंचाया गया था पानी

इसे राजनीतिक इच्छा शक्ति ही कहेंगे कि केंद्र की बीजेपी सरकार लातूर में तो पानी से भरे टैंकर भेजती है और यूपी में बुंदेलखंड के लोगों की प्यास बुझाने के नाम पर खाली टैंकर भेज दिए जाते हैं। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके के लातूर में 12 अप्रैल 2016 को ट्रेन से पानी पहुंचाया गया था। यहां दो बार 50 वैगन के साथ ट्रेन पानी लेकर पहुंची थी। यहां पानी की मारामारी के चलते धारा 144 लगी हुई थी। देश में यह पहला मौका था, जब इस तरह पानी सप्लाई की गई थी।

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