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यूपी: आरक्षण के मुद्दे पर अखिलेश यादव का बयान, जिस जाति की जितनी आबादी उसे मिले उतना आरक्षण

अखिलेश यादव ने आरक्षण पर नया फॉर्मूला देते हुए कहा कि पहले हर समुदाय के लोगों की संख्या की गिनती हो और फिर आबादी के हिसाब से उन्हें आरक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से झगड़ा खत्म हो जाएगा।

अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश लोकसभा उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महादलितों और अति-पिछड़ों को अलग से आरक्षण देने की बात कर रहे हैं, वहीं यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरक्षण का एक नया फॉर्मूला पेश किया है। उनका कहना है कि जिस समुदाय की जितनी आबादी है, उसे उतना आरक्षण दे देना चाहिए।

बीबीसी हिंदी से खास बातचीत में अखिलेश यादव ने आरक्षण के मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “पहले हर समुदाय के लोगों की संख्या को गिना जाए और जनसंख्या के हिसाब से उन्हें आरक्षण दे दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस फॉर्मूले से अगड़े-पिछड़ों का झगड़ा खत्म हो जाएगा।

अखिलेश यादव ने उस धारणा पर भी अपनी राय रखी, जिसमें कहा जाता है कि आरक्षण की वजह से प्रतिभाशाली लोगों को मौका नहीं मिल पाता। उन्होंने इसे लेकर भी एक फॉर्मूला दिया। अखिलेश यावद ने कहा, “प्रतिभाशाली लोगों के लिए 20 प्रतिशत सीटों को अलग कर देना चाहिए, इसमें जो मेरिट लिस्ट में टॉप करे, चाहे वे जिस भी जाति का हो उसे रख लिया जाए।”

उन्होंने इस फॉर्मूला के साथ यह भी कहा, “जो लोग प्रतिभाशाली हैं उन्हें इस आरक्षण के जरिए सामने आना चाहिए।” अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतिभाशाली लोग इस देश में रुकते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रतिभाशाली होते हैं, वे विदेश चले जाते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली लोगों के लिए 20 फीसदी सीट आरक्षण के बाद बाकी के 80 से 90 प्रतिशत सीटों के लिए जनसंख्या के आधार पर लोगों को उनका हक मिलना चाहिए। उन्होंने यह दावा भी किया कि उनके इस फॉर्मूले से सारी परेशानी दूर हो जाएगी।

मौजूदा व्यवस्था के तहत सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में नामांकन के दौरान अति-पिछड़ा वर्ग को 27 फीसदी, अनुसूचित जाति को 15 फीसदी और अनुसूचित जनजाति को 7 फीसदी का आरक्षण दिया जा रहा है। अखिलेश यादव अपने फॉर्मूले से इसी व्यवस्था को बदलने की बात कर रहे हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि आने वाले दिनों में लोगों को जनसंख्या के आधार पर ही आरक्षण देना पड़ेगा। इसके पीछे उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि अत्याधुनिक तकनीक और लोगों की जागरूकता सरकारों को ऐसा करने के लिए मजबूर कर देगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आई तो हम इस फॉर्मूले को लागू करेंगे।

उन्होंने कहा कि असली लड़ाई आरक्षण मुद्दे पर ही है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बीजेपी लोगों को बरगला रही है और अति-पिछड़े और महादलितों की बात कर रही है। अखिलेश यादव ने बीजेपी पर समाज को बांटने का आरोप लगाया।

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