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‘दंगल’ की गीता, बबीता से कम नहीं हैं आगरा की ‘सोलंकी सिस्टर्स’

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30 December 2016

‘दंगल’ में महावीर बने आमिर खान ने जिस तरह अपनी बेटियों के भविष्य के लिए संघर्ष किया, उसी तरह आगरा का एक पिता अपनी सात पहलवान बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है. मलपुरा के छोटे से सहारा गांव की ये सात बेटियां एक ही दांव में किसी को धूल चटा देती हैं. इन बेटियों के रियल हीरो हैं इनके पिता विशंभर सिंह सोलंकी. सोलंकी ने गांव के लोगों के विरोध और परेशानियों के बावजूद अपनी बेटियों का साथ दिया और इन्हें पहलवान बनाया.
गांव वालों के कड़े रूख और समाज में लोक-लज्जा के डर से पिता ने घर में ही कुश्ती अखाड़ा बना दिया और अपनी बेटियों को कुश्ती के दांव सिखाने लगे. विशंभर खुद भी पहलवान रह चुके हैं. सोलंकी सिस्टर्स के पिता कहते हैं- मेरा एक ही सपना है कि मेरी बेटियां ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन करें. विशंभर की सात बेटियों में से सीमा सोलंकी, नीलम और पूनम सोलंकी पहलवानी में राष्ट्रीय स्तर तक अपना लोहा भी मनवा चुकी हैं. वैसे आगरा में ये सातों बहनें ‘सोलंकी सिस्टर्स’ के नाम से भी मशहूर हैं.

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