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वाराणसी-टांडा के बीच बनेंगे 12 बाईपास मार्ग

downloadमहज दो साल का इंतजार और बनारस-आजमगढ़ वाया टांडा वाहन फर्राटे भरते दिखेंगे। फोरलेन परियोजना की कवायद जमीन पर शुरू हो चुकी है। सड़क के दायरे में कितनी जमीन ली जाएगी इसकी मापी भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण ने शुरू कर दी है।
फोरलेन परियोजना का सबसे बड़ा फायदा वाराणसी से आजमगढ़ वाया टांडा तक सफर करने वालों को होगा। 177 किमी का यह सफर महज चार घंटे में पूरा होगा। इतनी दूरी में 12 बाईपास, तीन रेलवे ओवरब्रिज और 27 छोटे ब्रिज बनाए जाएंगे। सड़क का निर्माण कुछ इस तरह होगा कि वाहन सौ किमी की रफ्तार से फर्राटे भरेंगे। भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण के अफसरों की मानें तो सड़क परियोजना करीब 1162 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

सड़क निर्माण के दौरान प्रमुख बाजारों के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। बल्कि उसके बगल से बाईपास मार्ग बनेगा। जिससे बाजारों का स्वरूप बना रहे। बनारस से आजमगढ़, अंबेडकर नगर होते टांडा तक सड़क का निर्माण एनएच वाराणसी डिविजन के जिम्मे है। जबकि लखनऊ से टांडा तक सड़क निर्माण की जिम्मेदारी लखनऊ डिविजन के जिम्मे सौंपी गई है।

अफसरों का कहना है कि पहले यह कार्य विश्वबैंक से ऋण लेकर किया जाना था लेकिन, अब सड़क का निर्माण बिल्ड आपरेशन ऐण्ड ट्रांसफर (बीओडी) योजना के तहत किया जाएगा। यानी, सड़क बनाने के बाद उसके मेंटनेंस एवं टोल टैक्स वसूली का कार्य बीओडी के जिम्मे होगा।

यहां बनेंगे बाईपास-
दानगंज बाजार : 3.60 किमी
चंदवक बाजार : 3.58 किमी
देवगांव बाजार : 4.80 किमी
लालगंज बाजार : 4 किमी
गोसाई बाजार : 3.20 किमी
बिंद्रा बाजार : 3 किमी
आजमगढ़-रानीकी सराय बाजार : 17.50 किमी
कप्तागंज बाजार : 3.90 किमी
अतरौलिया बाजार : 5.60 किमी
शुक्ला बाजार : 2.80 किमी
भासकारी बाजार : 3.25 किमी
टांडा बाजार : 11.30 किमी
यहां बनेंगे ओवरब्रिज
घाघरा नदी आजमगढ़ : 2.3 किमी
तमसा नदी आजमगढ़ : 1. 75 किमी 4  लेन
गोमती नदी जौनपुर : 1.35 किमी 2 लेन
छोटे पुल : 27
रेलवे ओवरब्रिज : 03

28 स्थानों पर चौड़ी होगी सड़क
अफसरों की मानें तो 177 किमी की दूरी में 28 स्थान ऐसे होंगे जहां सड़कों की चौड़ाई ज्यादा होगी जिससे कि ट्रक व बस वाहन सड़क किनारे खड़ा कर सकें।

लगने लगे पत्थर के खंभे
फोरलेन परियोजना के लिए निशान लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि कहींर् पर एक ओर 43 मीटर तो सड़क के दूसरी ओर 17 मीटर पर निशान लगाया जा रहा है। किसान गुल्लू यादव, जटाशंकर सिंह, सोनू सिंह, बलिराम, रामआसरे आदि का कहना है कि फोरलेन के लिए दोनों ओर एक बराबर जमीन ली जाए। अन्यथा किसान आंदोलन को बाध्य होंगे।

 

Image Source: google.com

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