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मिनी ग्रिड बनाकर अंधेरे गांवों को रोशन करेगी सरकार

acr468-5692b507d9e8aelectricityप्रदेश सरकार ने स्थानीय रूप से उपलब्ध अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बिजली पैदा कर उस क्षेत्र को ही उपलब्ध कराने के लिए ‘मिनी ग्रिड नीति उत्तर प्रदेश 2016’ जारी कर दी। यह नीति 10 वर्ष तक प्रभावी रहेगी। इस नीति का मकसद राज्य में अक्षय ऊर्जा जैसे बायोमास एवं बायोगैस ऊर्जा को बढ़ावा देना है।

सरकार अक्षय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में निजी निवेश की भागीदारी बढ़ाकर सूबे के उन दो करोड़ घरों में बिजली पहुंचाएगी जहां परंपरागत ग्रिड से बिजली नहीं पहुंच सकी है।

नीति के तहत अविकसित एवं पिछड़े ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में अधिकतम 500 किलोवाट क्षमता की मिनी ग्रिड परियोजनाएं लगाई जा सकेंगी। परियोजना के लिए राज्य सरकार अधिकतम 30 प्रतिशत तक अनुदान दोगी। इनका निर्माण (बिल्ट-ऑपरेट एंड मेंटेनेंस) के आधार पर होगा।

निर्माण एजेंसी को 10 साल तक रख-रखाव एवं संचालन अनिवार्य रूप से करना होगा। विकासकर्ताओं द्वारा ये परियोजनाएं बिना अनुदान के भी स्थापित की जा सकेंगी। स्वीकृत परियोजनाओं के लिए जमीन की व्यवस्था विकासकर्ताओं को करनी होगी।

50 वॉट के लोड पर 60 रुपये बिजली बिल

परियोजना क्षेत्र के इच्छुक उपभोक्ताओं को घरेलू उपयोग के लिए प्रतिदिन अनिवार्य रूप से सुबह तीन घंटे और रात में पांच घंटे बिजली दी जाएगी। अन्य वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को हर दिन छह घंटे आवश्यकतानुसार बिजली दी जाएगी। शेष बिजली विकासकर्ता अन्य उपभोक्ताओं को मुहैया करा सकेंगे।

उपभोक्ताओं से प्रतिदिन 8 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए 50 वॉट प्रतिमाह के लोड पर 60 रुपये प्रतिमाह तथा 100 वॉट के लोड पर 120 रुपये प्रतिमाह लिया जाएगा। 100 वॉट से अधिक के लोड पर विकासकर्ता और उपयोगकर्ता के बीच आपसी सहमति से विद्युत टैरिफ निर्धारित किया जाएगा।

…और इनके लिए आपसी सहमति से तय होगा टैरिफ

बिना अनुदान की परियोजनाओं में उत्पादित बिजली का वितरण इच्छुक परिवारों को घरेलू उपयोग, कृषि कार्य, लघु वाणिज्यिक कार्य जैसे आटा चक्की, दुकान, स्कूल, अस्पताल, टेलीफोन टावर, पेट्रोल पंप आदि के लिए किया जाएगा। विकासकर्ता को उपयोगकर्ताओं से आपसी सहमति के आधार पर विद्युत टैरिफ तय करने की छूट होगी।

इस तरह दी जाएगी बिजली

इन परियोजनाओं से आच्छादित गांवों एवं मजरों में परंपरागत ग्रिड के पहुंचने पर डिस्कॉम द्वारा उत्तर प्रदेश नियामक आयोग से निर्धारित टैरिफ या फिर आपसी सहमति से तय टैरिफ पर संयंत्र से उत्पादित ऊर्जा ग्रिड में दी जाएगी।

डिस्कॉम उस क्षेत्र विशेष में विकासकर्ता को फ्रेंचाइजी के रूप में मान्यता देने में वरीयता देगा। विकासकर्ता डिस्कॉम के साथ आपसी सहमति से तय मूल्य पर परियोजना उसे हस्तानांतरित भी कर सकेगा।

सौर ऊर्जा वाली परियोजना छह माह में करनी होगी पूरी

सौर ऊर्जा से संचालित परियोजनाएं छह माह, बायोमास/बायोगैस से संचालित परियोजनाएं नौ माह और पवन ऊर्जा एवं लघु जल विद्युत से संचालित परियोजनाएं एक वर्ष में पूरी करनी होंगी। इसमें अधिकतम छह महीने की समय वृद्धि प्रदान की जाएगी।

सोलर थर्मल परियोजनाओं में कोयला, गैस, लिग्लाइट, मिट्टी का तेल, लकड़ी आदि के इस्तेमाल की अनुमति नहीं होगी। सोलर फोटोवोल्टाइक प्लांटों में सूर्य की रोशनी न उपलब्ध होने पर बैटरी बैंक की चार्जिंग के लिए जेनसेट का उपयोग किया जा सकेगा।

एकल विंडो क्लीयरेंस के लिए यूपीनेडा होगी नोडल एजेंसी

सभी मिनी ग्रिड परियोजनाओं के लिए एकल विंडो क्लीयरेंस के रूप में यूपीनेडा नोडल एजेंसी का काम करेगी।

स्वीकृत परियोजनाओं के लिए उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक नीति 2012 में सौर ऊर्जा या अक्षय ऊर्जा से संचालित उद्योगों के लिए भू-उपयोग, पर्यावरण एवं स्टांप ड्यूटी से संबंधित छूट दी जाएगी। ये परियोजनाएं बिजली शुल्क से मुक्त होंगी।

इस मामले में विभिन्न प्रकरणों की निगरानी व समस्या के समाधान के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी गई है।

 

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