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जन समस्याओं का निस्तारण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

UP-GOV3

 

लखनऊ. 20 जनवरी. उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015-16 के विकास एजेण्डा के तहत प्रभावी शिकायत प्रबन्धन, निवारण और निगरानी के लिए समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस)-जन सुनवाई का विकास किया गया है। इस व्यवस्था को 25 जनवरी, 2016 से लागू किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस प्रणाली के माध्यम से विभिन्न शिकायत प्रबन्धन प्रणालियों को एक प्लेटफार्म पर समाहित किया गया है। इस व्यवस्था से जनता एवं शासन-प्रशासन के बीच आसानी एवं पारदर्शी तरीके से संवाद हो सकेगा। नागरिक किसी भी समय शिकायतों को दर्ज कर सकेंगे, ट्रैक कर सकेंगे। साथ ही, सम्बन्धित विभागों/अधिकारियों को निस्तारण एवं अनुश्रवण की सुगम सुविधा भी उपलब्ध हो सकेगी।

यह जानकारी आज यहां देते हुए राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि मुख्य सचिव आलोक रंजन द्वारा इस सम्बन्ध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार इस प्रणाली के प्रथम चरण में मुख्यमंत्री कार्यालय, जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक कार्यालय, तहसील दिवस, भारत सरकार (पीजी पोर्टल) तथा जनसुविधा केन्द्र/लोकवाणी केन्द्र से प्राप्त सन्दर्भों को समन्वित/ एकीकृत किया जा रहा है। भविष्य में अन्य कार्यालयों में प्राप्त सन्दर्भों हेतु भी इस प्रणाली का उपयोगी किया जाएगा। इस प्रणाली की समीक्षा एवं अनुश्रवण लोक शिकायत अनुभाग-5 (जन सुनवाई/ आईजीआरएस सेल), मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा किया जाएगा।

प्रवक्ता ने कहा कि जन समस्याओं का निस्तारण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। वर्तमान में जन समस्याओं के निस्तारण के लिए आम जन मुख्यमंत्री कार्यालय, जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/ पुलिस अधीक्षक कार्यालय, तहसील दिवस, समाधान दिवस, जनसुविधा केन्द्र/लोकवाणी केन्द्र आदि के माध्यम से अपने आवेदन-पत्र देते हैं। इसके अलावा, शासन-प्रशासन के अन्य कार्यालयों में भी आवेदन-पत्र/जन शिकायतें प्राप्त होती हैं। ऐसी शिकायतें प्राप्त करने के लिए विभिन्न काल सेण्टर भी चल रहे हैं।

इस व्यवस्था के माध्यम से नागरिकों और शासन के बीच सुगम एवं पारदर्शी एकल इण्टरफेस, विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतें एक ही पोर्टल/प्लेटफार्म पर उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे विभागीय अधिकारियों को एक ही यूजर/पासवर्ड द्वारा सन्दर्भों का निस्तारण/अनुश्रवण करने की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा, नागरिकों से आवेदन पत्र प्राप्त होने पर उसे स्कैन व अपलोड किया जाएगा। आवेदन प्राप्तकर्ता अधिकारी द्वारा प्राप्त आवेदन पत्रों की ई-मार्किंग (अग्रसारण) सम्बन्धित विभागों एवं अधिकारियों को की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि ऐेसे आवेदन पत्रों की मूल प्रति डाक के माध्यम से भेजे जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

आवेदक को पंजीकरण, अग्रसारण, निस्तारण आदि प्रत्येक स्तर पर एसएमएस भेजने की सुविधा रहेगी। दर्ज आवेदन पत्रों की सन्दर्भ संख्या द्वारा आवेदन पत्र की अद्यावधिक स्थिति प्रत्येक स्तर पर ज्ञात की जा सकती है। निर्धारित समयावधि के अन्दर आवेदन पत्र का निस्तारण न होने पर शिकायतकर्ता द्वारा प्रणाली के माध्यम से सम्बन्धित अधिकारियों को आनलाइन अनुस्मारक भी भेजा जा सकता है। प्रत्येक आवेदन पत्र की निस्तारण आख्या सम्बन्धित अधिकारियों/विभागों द्वारा पोर्टल पर प्रविष्ट करना अथवा हस्ताक्षरित आख्या अपलोड करना अनिवार्य होगा। निस्तारण आख्या की मूल प्रति (हार्ड कापी) भेजना आवश्यक नहीं होगा।

प्रदेश के महत्वपूर्ण कार्यालयों को आवेदन पत्र/शिकायत पत्र दिए जाने हेतु नागरिकों को आनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था उपलब्ध होगी। इससे सम्बन्धित कार्यालयों में आने की आवश्यकता नहीं होगी। चूंकि इस प्रणाली में सन्दर्भों के अग्रसारण की व्यवस्था आनलाइन रहेगी, अतः प्रत्येक कार्यालय में इस हेतु एक नोडल अधिकारी तैनात किया जाएगा।

आईजीआरएस प्रणाली के अन्तर्गत प्रत्येक सन्दर्भ का आख्या व अन्तरित श्रेणी में वर्गीकृत किया जाना अनिवार्य होगा। यह वर्गीकरण आदेशकर्ता अधिकारी/कार्यालय द्वारा ही किया जाएगा। तहसील दिवस के समस्त सन्दर्भ आख्या श्रेणी के ही रहेंगे। उच्च स्तर से अन्तरित श्रेणी का सन्दर्भ प्राप्त होने पर उसे अपने से निचले स्तर हेतु अग्रसारित करते समय आख्या श्रेणी में परिवर्तित किया जा सकता है।

आख्या श्रेणी के संदर्भ में अधीनस्थ अधिकारी/कार्यालय से निस्तारण आख्या प्राप्त कर उसे स्वीकार कर संदर्भ को निक्षेपित करने का अधिकार व उत्तरदायित्व प्रथम आदेशकर्ता अधिकारी/कार्यालय का होगा। आख्या स्वीकार होते ही पोर्टल पर शिकायतकर्ता को अवलोकन हेतु उपलब्ध होगी। यदि अधीनस्थ कार्यालय से आख्या इलेक्ट्रानिकली प्राप्त नहीं हुई है, तो उसे प्रथम आदेशकर्ता अधिकारी/कार्यालय द्वारा स्कैन एवं अपलोड किया जाएगा।

प्रत्येक विभाग से सम्बन्धित प्रार्थना-पत्रों के विषयों को वर्गीकृत किया गया है। सन्दर्भों की तात्कालिकता/ महत्व के अनुसार चिन्हीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

प्रवक्ता ने कहा कि विभिन्न विभागों के आईजीआरएस नोडल अधिकारियों को समस्त स्तरों से प्राप्त आवेदनों के अनुश्रवण की सुविधा डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी। अनुश्रवण हेतु एसएमएस/ई-मेल के माध्यम से सम्बन्धित अधिकारियों को अनुस्मारक भेजने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। विभिन्न स्तरों पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता का श्रेणीकरण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किए जाने की व्यवस्था पोर्टल पर रहेगी। आवेदन पत्रों के माध्यम से प्राप्त सुझावों/मांगों का विश्लेषण कर विभिन्न योजनाओं हेतु इनका उपयोग किए जाने की सुविधा भी इस प्रणाली में उपलब्ध रहेगी।

प्रवक्ता ने बताया कि कई बार आवेदक द्वारा एक ही प्रार्थना पत्र विभिन्न स्तरों पर दिए जाते हैं, जिसकी बार-बार जांच करने एवं आख्या भेजने में समय एवं श्रम का अपव्यय होता है। भविष्य में इस प्रणाली में ऐसे आवेदनों को चिन्हित कर उन्हें एक साथ ट्रैक करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रवक्ता ने कहा कि इस प्रणाली के अन्तर्गत प्रथम चरण में समन्वित किए जा रहे मुख्यमंत्री कार्यालय, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक कार्यालय, लोकवाणी केन्द्र/जनसुविधा केन्द्र, तहसील दिवस, आनलाइन पंजीकृत संदर्भ व पीजी पोर्टल के सन्दर्भों के निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय, शासन स्तर पर (प्रमुख सचिव/सचिव), विभागाध्यक्ष, मण्डलायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप महानिरीक्षक, उपाध्यक्ष (विकास प्राधिकरण), नगर आयुक्त, प्रबंध निदेशक (निगम/संस्थान/सार्वजनिक उपक्रम), कुल सचिव (चिकित्सा, उच्च एवं प्राविधिक शिक्षा) आयोगों एवं जिलाधिकारी/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक को भेजे जाने वाले आवेदन-पत्रों/आख्याओं का आदान-प्रदान अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रानिकली किया जाएगा तथा हार्ड कापी नहीं भेजी जाएगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय से प्रेषित प्रार्थना पत्रों की प्रविष्टि दिनांक 25 जनवरी, 2016 से आईजीआरएस जनसुनवाई प्रणाली पर की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा इस प्रणाली को दो तिथियों में लागू किया जाएगा। 25 जनवरी, 2016 से जिलाधिकारी/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक को प्रेषित किए जाने वाले संदर्भ इस प्रणाली पर प्रेषित किए जाएंगे। तदुपरान्त 20 फरवरी, 2016 से अन्य समस्त स्तरों जैसे शासन स्तर पर (प्रमुख सचिव/सचिव), विभागाध्यक्ष, मण्डलायुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप महानिरीक्षक, उपाध्यक्ष (विकास प्राधिकरण), नगर आयुक्त, प्रबंध निदेशक, (सार्वजनिक उपक्रम) एवं कुल सचिव (चिकित्सा, उच्च एवं प्राविधिक शिक्षा) को प्रेषित सन्दर्भों की प्रविष्टि भी इसी प्रणाली पर की जाएगा। इसी प्रकार दो बार में पुराने डाटा को राज्य स्तर पर आईजीआरएस सेल द्वारा नई प्रणाली पर इम्पोर्ट कर दिया जाएगा।

प्रवक्ता ने कहा कि 25 जनवरी, 2016 से समस्त जिलाधिकारी/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक के कार्यालयों में प्रतिदिन सुबह 10 से 12 बजे के मध्य जन सुनवाई, फैक्स, ई-मेल, काल सेण्टर आदि से प्राप्त आवेदन पत्रों की प्रविष्टि तथा आख्या प्राप्त कर निस्तारण की कार्यवाही अनिवार्य रूप से इसी प्रणाली के माध्यम से की जाएगी।

प्रवक्ता ने बताया कि वर्तमान में तहसील दिवस में प्राप्त आवेदन पत्रों की प्रविष्टि एवं निस्तारण तहसील दिवस पोर्टल पर किया जाता है। दिनांक 25 जनवरी, 2016 के पश्चात आने वाले प्रथम मंगलवार को आयोजित तहसील दिवस से प्राप्त प्रार्थना पत्रों की फीडिंग/प्रविष्टि इसी प्रणाली में की जाएगी तथा उस दिनांक तक लम्बित प्रार्थना पत्रों को इसी प्रणाली पर शासन स्तरीय आईजीआरएस सेल द्वारा इम्पोर्ट कर दिया जाएगा।

प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान में जनसुविधा केन्द्र/लोकवाणी केन्द्र में दर्ज जनपद स्तर की शिकायतों की प्रविष्टि तहसील दिवस पोर्टल पर की जाती है तथा अनुश्रवण जिलाधिकारी स्तर से किया जाता है। दिनांक 25 जनवरी, 2016 से जनसुविधा केन्द्र/लोकवाणी केन्द्रों द्वारा ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर लागिन कर शिकायतों की प्रविष्टि आईजीआरएस पोर्टल पर की जाएगी। प्रविष्ट की गई समस्त शिकायतें इस प्रणाली पर अनुश्रवण/निस्तारण हेतु उपलब्ध रहेंगी। आईजीआरएस नोडल अधिकारी उपरोक्त माध्यम से एवं नई व्यवस्था के तहत आनलाइन पंजीकृत शिकायतों का अग्रसारण/अनुश्रवण प्रतिदिन करेंगे। कार्यालय प्रमुख द्वारा इस कार्यवाही की नियमित समीक्षा की जाएगी।

 

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