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अखिलेश ने की पहल और उत्तर प्रदेश में आई श्वेत क्रांति

April 15, 2016

ग्रामीण अर्थव्यस्था का आधार लंबे समय से कृषि और पशुपालन रहा है। जहां तक पशुपालन की बात है तो इसके केंद्र में भी अमूमन दुग्ध उत्पादन रहा है। समाजवादी सरकार ने इसे बखूबी समझा और प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ पशुपालन को बढ़ावा दिया। इसी का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश में देश का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादन राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश में पशु पालकों को प्रोत्साहित करने के लिए जहां कामधेनु की कई योजनाएं चलाई जा रही हैं तो दुग्ध उत्पादन के लिए कई बड़े-बड़े निवेश हो रहे है। दरअसल, दुग्ध विकास के जरिए गांव को शहरों से ठीक से जोड़ा जा सकता है। इससे रोजगार को भी पूरा बढ़ावा मिलेगा। इससे कई परिवारों को भी लाभ होगा।

एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार एक बार फिर दुग्ध क्रांति का आगाज करने जा रही है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत 11 अलग-अलग शहरों में पराग के नए आइसक्रीम और पाश्चराइजेशन प्लांट लगाने की तैयारी है। प्लांट के निर्माण की जिम्मेदारी गुजरात की इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी (आईडीएमसी) को दी है। एक प्लांट पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार करीब 15 अरब रुपये का बजट इस प्रोजेक्ट पर खर्च करेगी। अमूल और मदर डेयरी के 75 फीसदी प्लांट तैयार करने वाली गुजरात की कंपनी आईडीएमसी को पराग के नए प्लांट का निर्माण करने की जिम्मेदारी दी है। एक प्लांट में कम से कम एक से चार लाख लीटर तक दूध के उत्पाद तैयार किए जाएंगे। सभी प्लांट प्रोजेक्ट को एक साल में पूरे करने का लक्ष्य दिया गया है। ये प्लांट बरेली, लखनऊ, मेरठ, मुरादाबाद, गोरखपुर, कानपुर, कन्नौज, फिरोजाबाद, फैजाबाद और वाराणसी में लगेंगे। इसके अलावा प्रदेश सरकार नोएडा, अलीगढ़, इलाहाबाद और झांसी के पराग के पुराने प्लांटों को अपग्रेड करने में भी जुट गई है। नए प्लांट लगने से निश्चित तौर पर दूध उत्पाद को बढ़ावा मिलेगा।

Image Source: frbiz.com

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देश में सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाला प्रदेश यूपी

अखिलेश सरकार की कोशिशों का ही नतीजा है कि आज उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाला प्रदेश है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन 7.71 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है जो देश के दूध उत्पादन का लगभग 18 प्रतिशत है। प्रदेश में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता 310 ग्राम है जबकि पूरे भारत में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता 290 ग्राम है।

362 मीट्रिक टन दूध के उत्पादन का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने नए डेयरी प्लांट लगाने के लिए जहां 400 करोड़ रुपये की घोषणा बजट में की है तो कानपुर में मिल्क पाउडर प्लांट के लिए भी 80 करोड़ रुपये का इंतजाम किया है। सरकार का वित्तीय वर्ष में 362 मीट्रिक टन दूध के उत्पादन का लक्ष्य है। इसके मद्देनजर प्रदेश में 300 कामधेनु डेयरी यूनिट स्थापित करने के साथ ही 1500 मिनी कामधेनु और 2500 माइक्रो कामधेनु यूनिट लगाई जाएंगी। जबकि इससे पहले से ही प्रदेश में दुग्ध विकास के कई कार्यक्रम और योजनाएं चलाई जा रही हैं।

11 जिलों में आधुनिक डेयरी प्लांट का शिलान्यास

दुग्ध व्यवसाय को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य प्रदेश के 11 जिलों में आधुनिक डेयरी प्लांट का शिलान्यास किया गया, जिसकी शुरुआत मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कन्नौज से की। लखनऊ के चक गंजरिया सिटी परिसर में जंतु उद्यान एवं चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. शिव प्रताप सिंह यादव ने तीन लाख लीटर क्षमता वाले नए पराग के डेयरी प्लांट का भूमि हाल ही में पूजन कराया था। इस प्लांट से इलाके के लोगों को जहां बेहतर दूध की गुणवत्ता मिल सकेगी, वहीं किसानों और दुग्ध पालकों को भी फायदा पहुंचेगा। इस प्लांट का निर्माण कार्य साल भर में पूरा हो जाएगा। चकगंजरिया का यह प्लांट पूरी तरह से आधुनिक तकनीक पर आधारित होगा। पांच एकड़ की जमीन पर बनने वाले इस प्लांट का निर्माण आईडीएमसी द्वारा किया जाएगा। इस मिल्क प्लांट में फेनोपैक विधि का इस्तेमाल किया जा रहा है।

Image Source: hdpixa.com

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न्यूजीलैंड की तकनीकी का यूपी में इस्तेमाल

न्यूजीलैंड की तर्ज पर मथुरा में गायों की डेयरी स्थापित होगी। उसमें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से गायों का दूध भी निकाला जाएगा। यह प्रोजेक्ट वेटरिनरी कॉलेज या अन्य किसी स्थान पर लग सकता है। जल्द इसका प्रस्ताव तैयार कराया जाएगा।उत्तर प्रदेश सरकार के कॉमनवेल्थ पार्लियामेन्ट्री एसोसिएशन के शिष्ट मंडल के सदस्यों ने नगर विकास मंत्री मो. आजम खान के साथ पिछले दिनों क्वींसटाउन, न्यूजीलैंड से लगभग 250 किमी दूर स्थित विल्किंस फार्मिंग डेरी जाकर गो-पालन देखा। इस डेयरी में लगभग 1200 गाय है, जो कि सिर्फ घास खाती है। यह डेयरी 360 एकड़ में स्थापित है तथा हर गाय के लिए लगभग 1500 गज स्थान है। न्यूजीलैंड डेयरी उद्योग तथा कृषि के लिए प्रसिद्घ है। वहां इस विषय पर भी चर्चा हुई कि इस तरह की डेयरी को उत्तर प्रदेश में कहां और कैसे लगाया जाए।

दुधारू पशुओं के संवर्धन की सार्थक पहल

18 सितम्बर 2015 को को एग्री समिति-2015 में उत्तर प्रदेश को भारत का सर्वश्रेष्ठ पशुपालन प्रदेश घोषित किया जा चुका है। इसे आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में पशुओं के संरक्षण प्रजनन एवं संवर्धन तथा उच्च कोटि के नस्ल के दुधारू पशुओं के संवर्धन, संरक्षण हेतु सार्थक कदम उठाए हैं। प्रदेश में पशुओं के पालन पोषण तथा पशुधन विकास में महिलाओं की भूमिका सराहनीय है। उप्र पशु संख्या एवं दुग्ध उत्पादकता में देश में प्रथम स्थान पर है पशुपालकों की घरेलू अर्थ व्यवस्था को सुदृढ़ करने में पशुओं का महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य सरकार ने दुग्ध उत्पादन में रिकार्ड वृद्धि हेतु दुधारू पशुओं की नस्लों में सुधार लाने, संरक्षण एवं संवर्धन हेतु ठोस व्यवस्था की है। देसी गायों की माॅग विदेशों में भी बढ़ी है।

11500 ग्रामों में दुग्ध समितियां दुग्ध समूह कार्यरत

उत्तर प्रदेश के 97941 ग्रामों में से वर्तमान में 11500 ग्रामों में दुग्ध समितियां व दुग्ध समूह वर्तमान में कार्यरत है, जिनमें स्वरोजगार के लिए गाय एवं भैंस पालन कर दुग्ध उत्पादन एवं विक्रय महत्वपूर्ण सहरोजगार के रूप में अपनाया जा रहा है। प्रदेश के गरीब दुग्ध उत्पादकों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान हेतु प्रदेश के बजट में उदार दृष्टिकोण अपनाकर दुग्ध उत्पादकों के हितों का ध्यान रखा है। सरकार द्वारा इतनी अल्प अवधि में समस्त बन्द दुग्ध संघों आगरा, मथुरा, फतेहपुर, बरेली, अलीगढ़, सहारनपुर एवं फिरोजाबाद का पुनः संचालन जैसे प्रमुख कार्य कराए गए हैं।

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