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दूध उत्पादन में नंबर 1 बना यूपी, लिख रहा सफलता की नई इबारत

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May 23, 2016

बाराबंकी के टिकैत नगर निवासी 35 वर्षीय जगदीश प्रसाद गुप्ता ने दूध व्यवसाय के मायने बदल दिए हैं। देसी गायों पर टिका उनका डेयरी का पुश्तैनी धंधा मंदा पड़ा तो उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘कामधेनु योजना’ की शरण ली। आठ माह की कोशिश से जगदीश ने विदेशी संकर नस्ल की सौ गायों के बूते अपनी डेयरी को नई शक्ल दी तो एक साल में उत्पादन तीन गुना बढ़ गया।

यह सिर्फ दुग्ध व्यवसाय में एक किसान की सफलता की कहानी नहीं है। बल्कि उत्तर प्रदेश में तकरीबन 300 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने दूध के व्यवसाय को नया नजरिया दिया है। और इन्हीं किसानों की वजह से उत्तर प्रदेश दूध उत्पादन के क्षेत्र में देश में नम्बर 1 बन गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह उत्तर प्रदेश की कामधेनु डेरी योजना है। इस योजना से बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार मिल रहा है, कामधेनु योजना के तहत कई छोटी- बड़ी कई डेयरी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे छोटे और बड़े दोनों तरह के पशुपालकों व किसानों को लाभ मिल रहा है। साथ ही बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

भाग्य बदल रही कामधेनु योजना

साल 2015-16 में यूपी 23.33 मिलियन टन उत्पादन के साथ भारत में यूपी पहले नंबर पर रहा। देश में दूध के कुल उत्पादन में यूपी का योगदान करीब 18 फीसदी रहा। देश में सबसे बड़े दूध उत्पादक का दर्जा हासिल कर चुके उत्तर प्रदेश की निगाहें अब वैश्विक स्तर पर चमकने की है। डेयरी उत्पाद के लिए दुनिया भर में मशहूर डेनमार्क की तर्ज पर उत्तर प्रदेश दूध उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है।

पशुपालकों की सहूलियत बढ़ी

इस सफलता के पीछे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कोशिशें हैं। दरअसल सरकार ने कामधेनु योजना को बढ़ाने के लिए उन्होंने बहुत ध्यान दिया है। पहले एफएमडी टीकाकरण में जो लेवी लगती थी, राज्य सरकार ने उस को माफ कर दिया है। इसकी वजह से जो अच्छी नस्ल के पशु समाप्त हो रहे थे, उसमें अब बड़े पैमाने पर सुधार हो रहा है। इससे सिर्फ पशुधन विभाग की ही ख्याति नहीं बढ़ी है, बल्कि इससे पशुपालकों और किसानों को सहूलियत भी मिली है। वहीं डेरी संचालकों का कहना है की प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही कामधेनू डेयरी योजना से लोगों को बहुत लाभ हो रहा है। माइक्रो कामधेनु डेयरी योजना से छोटे किसानों को भी बहुत लाभ हो रहा है। लोगों को घर पर ही रोजगार मिल रहा है। वहीं डेयरी संचालकों का कहना है कि इस योजना को और बेहतर ढंग से चलाने के लिए प्रदेश सरकार को डेयरी से सम्बंधित उपकरण और मशीनों की खरीद पर सब्सिडी देने पर विचार करना चाहिए। अमूमन ये उपकरण पंजाब से मंगाने पड़ते हैं, जिसकी वजह से उपकरण मंहगे मिलते हैं।

मैनपुरी में दूध उत्पादन केंद्र खोलने की योजना

इसी क्षेत्र में मजबूत कदम उठाते हुए आगरा की दयालबाग यूनिवर्सिटी में विश्व स्तर की डेयर खुल गई है। दूध उत्पादन क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए अखिलेश सरकार की एक्सप्रेस-वे पर मैनपुरी में प्रदेश का सबसे बड़ा दूध उत्पादन केंद्र खोलने की योजना भी है। देश के सबसे बड़े दूध उत्पादक राज्य के रूप में सामने आने के बाद डेयरी उद्योग में तरक्की के रास्ते खुल गए हैं। यूपी सरकार की औद्योगिक नीतियों के सफल क्रियान्वयन के कार्यक्रम के तहत प्रदेश में निवेश व रोजगार की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इससे कई बड़ी कंपनियां भी उत्तर प्रदेश में मिल्क प्लांट लगाने का मन बना चुकी हैं।

साल 2015-16 में यूपी रहा आगे

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साल 2015-16 में उत्तर प्रदेश देश में दूध उत्पादन के क्षेत्र में सबसे आगे रहा है। अगर यूपी में दूध कारोबार की बात करें तो यूपी में करीब 1 करोड़ 8 लाख दुधारु पशु हैं। वहीं डेयरियों की बात करे तो प्रदेश में 40 को-ऑपरेटिव डेयरियां भी मौजूद हैं। आकंड़ों की बात करें तो देश के कई अहम राज्यों को पछाड़कर यूपी नंबर 1 बना है।

अब प्रति व्यक्ति उपलब्धता बढ़ाने पर जोर

देश में दूध का उत्पादन सालाना 19 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। यह बात दूध उत्पादन को लेकर उद्योग संगठन एसोचैम की ओर से जारी एक रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक राज्य होने के बावजूद फिलहाल अपनी भारी-भरकम आबादी, लोगों की क्रय शक्ति कम रहने और दूध के परिवहन के लिए जरूरी सुविधाएं न उपलब्ध होने के चलते प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता के मामले में पहले पांच राज्यों में भी जगह नहीं बना पाया है। प्रति पशु दूध उत्पादन और प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता के मानकों पर उत्तर  प्रदेश क्रमशः सातवें और आठवें पायदान पर खड़ा है। राज्य सरकार को अब इस दिशा में पहल करने का सुझाव दिया गया है।

आकार लेने लगी सीएम की पहल

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मार्च, 2012 में यूपी की सत्ता संभालते ही डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की थी।  उनकी यह पहल अब आकार लेती दिखाई दे रही है। अब तो दूध उत्पादन और उसके संस्थागत व्यावसायिक उपयोग के बीच के फासले को पाटने के लिए अमूल, मदर डेयरी, पारस, नमस्ते इंडिया, ज्ञान डेयरी और अनिक डेयरी जैसी डेयरी उद्योग से जुड़ी बड़ी कंपनियां यूपी में कूद पड़ी हैं।

गाय-भैंस खरीदने में मदद करती है सरकार

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पशुधन विभाग किसानों को गाय-भैंसों की खरीद में मदद करता है। इसके लिए सरकार बैंकों से किसानों को ऋण दिलवाने की व्यवस्था करती है। खास बात यह है कि जो किसान समय पर बैंक को किस्त अदा करता है, सरकार उस पर लगने वाला ब्याज खुद अदा करती है। इस प्रकार से एक ‘कामधेनु डेयरी’ स्थापित करने वाले किसान को करीब 32 लाख रुपये की सरकारी मदद मिलती है।

नए प्लांट खुले, बर्बाद होने से बचा दूध

इटावा के भरथना निवासी रामनाथ रोज 50 से 60 लीटर दूध का उत्पादन करते हैं। छह माह पहले तक वे गांव में ही औने-पौने दाम पर दूध बेच देते थे, पर इटावा से सैफई जाने वाली सड़क पर ‘नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड’ की 2.5 लाख लीटर क्षमता वाली योजना ‘मदर डेयरी’ के मई से शुरू होते ही आसपास के जिलों के उनके जैसे तकरीबन एक लाख छोटे किसानों को दूध बेचने के संकट से छुटकारा मिल गया है।

लखनऊ में खुल रहा अमूल का प्लांट

लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर चक गंजरिया शहर में 210 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे पांच लाख लीटर क्षमता वाले अमूल के डेयरी प्लांट का काम शुरू हो गया है। अमूल डेयरी से लखनऊ के आसपास के 16 जिलों की कुल 4,862 दूध समितियों से जुड़े किसान लाभान्वित होंगे। अमूल यूपी में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगा। वहीं, प्रतिदिन दो लाख लीटर पन्नी बंद दूध उत्पादन की क्षमता वाली पराग डेयरी को संकट से उबारने के लिए सरकार इसके विस्तार में जुट गई है।

 

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