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युवाओं को हुनरमंद बनाने के बाद अब किसानों का कौशल बढ़ाएंगे सीएम अखिलेश

उत्तर प्रदेश सरकार नीदरलैंड्स की मदद से किसानों के लिए खोलेगी स्किल डेवलपमेन्ट सेंटर

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July 16, 2016

किसान भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में किसानों की खुशहाली के बिना राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की कल्पना भी नहीं कर जा सकती है। यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के विकास में किसानों को केंद्र में रखकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कई योजनाएं बनाई हैं तो तमाम सहूलियतें भी दी है। इसमें अब एक और कड़ी के रूप में जुड़ने जा रहा किसानों के लिए स्किल डेवलपमेंट सेंटर। उत्तर प्रदेश सरकार ने अनूठी पहल करते हुए नीदरलैंड्स के साथ इस सेंटर की स्थापना के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सेंटर के खुलने से किसान खेती की नई तकनीकी से परिचित होंगे और खेतों में पैदावर बढ़ाकर संपन्न हो सकेंगे।

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किसानों को मिलेगा सबल होने का मौका

किसानों को हुनरमंद बनाने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की इस योजना को कामधेनु योजना के बाद दूसरी अहम योजना माना जा रहा हैं, जिससे किसानों को सबल होने का मौका मिलेगा। स्किल डेवलपमेन्ट केन्द्र स्थापित होने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा, डेयरी उद्योग के आधुनिकीकरण एवं प्रसंस्करण उद्योगों को आधुनिक तकनीक हासिल होगी। इसके अलावा एग्रो प्रोसेसिंग उद्योग, खासतौर पर आलू पर आधारित इकाइयों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग व प्रोत्साहन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और नीदरलैंड्स द्वारा क्षमता विकास कार्यक्रम, प्रशिक्षण, शोध, कार्यशाला, गोष्ठियां एवं शैक्षिक यात्रा आदि आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही, सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) को बढ़ावा दिया जाएगा। इन सभी कार्यक्रमों से किसानों की आय में बढ़ोतरी करने के सरकार के प्रयासों को गति मिलेगी।

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ऊर्जा, साइकिल ट्रैक, डेयरी के क्षेत्र में भी काम करेगा नीदरलैंड्स

नीदरलैंड्स सरकार आगरा में यमुना नदी की सफाई तथा सीवेज ट्रीटमेन्ट में भी सहयोग प्रदान करेगी। वैसे उत्तर प्रदेश सरकार ने सालिड वेस्ट मैनेजमेंट, नगरीय विकास एवं अवस्थापना, जल प्रबंधन, जलापूर्ति, जल स्रोतों की स्वच्छता व जलाशयों का पुनर्जीवीकरण, सीवेज ट्रीटमेंट, परिवहन प्रबंधन व अवस्थापना के साथ-साथ कानपुर में गंगा बेसिन में 1500 एकड़ भूमि-सुधार तथा सांस्कृतिक विरासत के विकास में सहयोग के लिए भी नीदरलैंड्स से समझौता किया है। वहीं अगले तीन वर्षों के दौरान नीदरलैंड्स स्मार्ट सिटीज, उद्योगों में ऊर्जा दक्षता, साइकिल ट्रैक, कृषि, डेयरी व उद्यान आदि क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर काम करेगा।

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नीदरलैंड के भ्रमण के दौरान सीएम अखिलेश को आया था स्किल सेंटर का विचार

दरअसल 2014 में नीदरलैंड के भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वहां डेयरी, फूड प्रोसेसिंग, पुष्प उत्पादन एवं विक्रय तथा सीवेज के क्षेत्र में किए गए प्रयासों से परिचित हुए। इसके बाद से ही वह उत्तर प्रदेश में भी नीदरलैंड्स की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर यहां किसानों को संपन्न बनाने का खाका बुनना शुरू कर दिया था। उनकी यह कोशिश आखिरकार नीदरलैंड्स के साथ एमओयू होने के साथ फलीभूत हुई है।

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किसान बाजार से मिलेगी उपज की सही कीमत

किसानों की बेहतरी के लिए इससे पहले भी सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए हर फसल के समय खाद, बीज व कीटनाशक दवाओं की समय से पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई। किसानों के उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच सके, इसके लिए लखनऊ, सैफई, मैनपुरी, कासगंज, कन्नौज, हापुड़ और बहराइच में किसान बाजार स्थापित किए जा रहे हैं। झांसी में किसान बाजार स्थापित किया जा चुका है।

15 लाख से अधिक क्रेडिट कार्डों का वितरण किया जा चुका है तो किसानों को बेहतर से बेहतर सुविधाएं देने तथा उनकी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पहले वित्तीय वर्ष 2015-16 को फिर वित्तीय वर्ष 2016-17 को ‘किसान वर्ष’ घोषित किया गया है।

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‘सच्चा बीज’ उपलब्ध कराने की नीति लागू

किसानों को ‘सस्ता बीज’ की जगह ‘सच्चा बीज’ उपलब्ध कराने की नीति लागू की गई है। वहीं  सूखाग्रस्त 50 जनपदों के किसानों को विशेष राहत देने के लिए गेहूं, दलहन एवं तिलहन फसलों के आच्छादन में वृद्धि हेतु इनके बीजों पर अतिरिक्त अनुदान देने की व्यवस्था की गई है। भूमि सेना योजना’ में लधु एवं सीमान्त कृषकों को ऊसर सुधार हेतु जिप्सम के प्रयोग पर 90 प्रतिशत, अधिकतम 18 हजार रूपये तक का अनुदान, हरी खाद उत्पादन हेतु ढैंचा बीज पर 90 प्रतिशत, अधिकतम 2250 रूपये प्रति हेक्टेयर, फलोत्पादन हेतु कृषि निवेश पर 50 प्रतिशत अधिकतम 2500 रूपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिये जाने का प्राविधान किया गया है।

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हर कदम मददगार भी रहती है सरकार

बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्टि से प्रभावित 49 जिलों के किसानों को राहत देने के उद्देश्य से 3500 करोड़ रूपये की राशि का वितरण किया जा चुका है। सरकार ने उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी ग्राम विकास बैंक से किसानों द्वारा लिये गये 50 हजार रुपये तक के कर्ज माफ किये जाने के लिए ऋण माफी योजना लागू की है। कृषि भूमि को बंधक रखकर कर्ज लेने वाले किसानों को कर्ज अदा न कर पाने की स्थिति में जमीन की नीलामी से बचाने हेतु 1720 करोड़ रूपये की धनराशि से 7 लाख 32 हजार 167 किसानों को ऋण माफ करके लाभान्वित किया जा चुका है।

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बुंदेलखंड का रहा ख़ास ख्याल

बुंदेलखण्ड क्षेत्र में सूखे से प्रभावित किसानों के लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से 24 घण्टे बिजली आपूर्ति, रोजगार हेतु जाब कार्ड, मनरेगा योजना के तहत 100 से बढ़ाकर 150 दिवस प्रति वर्ष रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था गई है। सभी पात्रों को समाजवादी पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है।

 

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