Uttar Hamara logo

ढाई साल में ही बुलबुले की तरह फूटने लगा मोदी का मैजिक

image-8_uh-blog-image-for-ankit-ji_13-12-2016

16 December 2016

लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी ने जनता को ‘अच्छे दिन’ का सब्जबाग दिखा कर दिल्ली की सत्ता हासिल की थी, लेकिन ढाई साल में ही तिलिस्म टूटता नजर का रहा है। जनता ने बड़े विश्वास के साथ केंद्र में बीजेपी की पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। लेकिन पिछले ढाई साल के नरेन्द्र मोदी की सरकार के कामकाज पर गौर करें तो निराशा ही हाथ लगती है। सत्तासीन होने के बाद कई मामलों में सरकार के गलत क़दमों से देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और देश के भीतर जनता को दिक्कतें झेलनी पड़ीं। मोदी सरकार की नाकामियों की ऐसी लम्बी फेहरिस्त है ।

image-1_uh-blog-image-for-ankit-ji_13-12-2016

विदेशों से कालाधन लाना महज जुमलाबाजी

लोकसभा चुनाव के दौरान नरेन्द्र मोदी सहित बीजेपी के तमाम नेताओं ने जनता से ये वादा किया था कि वो विदेशी बैंकों में रखा काला धन वापस लाएंगे। बोले- जनता के खाते में 15 लाख रुपये आएंगे। लेकिन कालाधन लाने की कोई ठोस पहल नहीं की। अलबत्ता बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने तो इसे चुनावी जुमला बताकर वादे से ही पल्ला झाड़ लिए। अब नोटबंदी का नया शिगूफा छोड़ा है। इस बार पहले दावा किया गया कि इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, देश के भीतर कालेधन पर रोक लगेगी। लेकिन बिना तैयारी शुरू की गयी इस योजना में जब छेद नजर आने लगे तो इसे प्लास्टिक मनी को बढ़ावा देने का राग अलापना शुरू कर दिया।

image-2_uh-blog-image-for-ankit-ji_13-12-2016

विदेश नीति पर भी मोदी सरकार धराशाई

विदेश नीति के मसले पर भी मोदी सरकार धराशाई रही। वैसे तो बीजेपी सरकार आम लोगों के बीच यह प्रचारित कर रही है कि उनकी सरकार की विदेश नीति काफी उम्दा है, लेकिन विशेषज्ञों की राय इसके उलट है। नेपाल के साथ हमारे संबंधों में कमी आई है । उसका चीन के प्रति झुकाव बढ़ रहा है। ढाई साल में प्रधानमंत्री मोदी ने कई यूरोपीय और अमरीकी  देशों की यात्राएं की हैं, लेकिन पड़ोसियों से सम्बन्ध बनने में विफल रहे हैं। पाकिस्तान के साथ बातचीत होना फिर टूटना,आतंकवाद के मुकदमों का आगे न बढ़ना दोनों देशों की नीतिगत अगंभीरता को दिखाता है| चीन के साथ भी नरेन्द्र मोदी की सरकार बेहतर सम्बन्ध बनाने में नाकामयाब रही है।

image-3_uh-blog-image-for-ankit-ji_13-12-2016

आतंरिक सुरक्षा के मसले पर कई पटखनी खाईं

आतंरिक सुरक्षा के मसले पर भी कई खामियां नजर आती हैं। उरी और पठानकोट पर पाकिस्तानी दहशतगर्दों के हमले इस बात का जीता जगता उदाहरण हैं। ये दोनों 26/11 के मुंबई अटैक से ज्यादा बड़े हमले थे। आतंकियों ने तब स्टेशनों, होटलों को निशाना बनाया था, लेकिन ये दोनों हमले सीधे सेना के कैंप पर हुए। इतना ही नहीं पठानकोट हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के पुख्ता सबूत होने के बावजूद पाकिस्तान अधिकारियों को जांच के लिए आने देना मोदी सरकार की कमजोरी को ही दर्शाता है।

image-4_uh-blog-image-for-ankit-ji_13-12-2016

बेरोज़गारी की समस्या भी जस की तस

देश में बेरोज़गारी की समस्या भी जस की तस बनी हुई है। बेरोजगारी दर पांच साल ले अपने सबसे ख़राब स्तर पर है। जबकि चुनाव में मोदी जी ने हर साल 2.5 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। जबकि सालाना 70 लाख लोग बेरोजगार हो रहा हैं। लोगों के लिए पीने के पानी की उपलब्धता के लिए कोई सटीक उपाय नहीं किये जा रहे हैं। अलबत्ता रूरल ड्रिंकिंग वॉटर प्रोग्राम से भी अपने हाथ खींच लिए हैं। संभवत: सरकार का ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों से कहना है कि वे अपने पानी पीने का इंतजाम खुद करें जैसे कि इनकी सरकार के एक मंत्री कहते हैं ‍‍‍‍क‍ि मध्यम वर्ग का अपना ख्याल खुद रखना चाहिए। वहीँ देशभर में किसानों की आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं। बीजेपी शासित राज्यों में ये सर्वाधिक है। लोगों को उम्मीद थी कि उनके पास अधिक आय होगी, सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी और उन्हें नई-नई सहूलियतें मिलेंगी। लेकिन ढाई साल में निराशा ही हाथ लगी।

image-5_uh-blog-image-for-ankit-ji_13-12-2016

पेट्रोल और डीजल के दामों पर लगाम लगा ना पाई

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से दाम घटने के बावजूद सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने भी पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी की।  जबकि यूपीए के कार्यकाल के दौरान पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि को लेकर भाजपा ने उस पर खूब निशाना साधा। लोकसभा चुनाव में प्रचार सभाओं में नरेन्द्र मोदी ने पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते भावों को लेकर यूपीए सरकार को कमजोर बताया था। मोदी सरकार पर यह भी आरोप है बड़ी गिरावट के बाद भी तेल कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने दामों में उनकी कटौती नहीं की, जितनी होनी चाहिए थी।

image-6_uh-blog-image-for-ankit-ji_13-12-2016

दलितों, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा रखी ताख पर

अमेरिका के एक पैनल की रिपोर्ट की मानें तो ‘मोदी सरकार में अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े हैं।’ यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने 2015 की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारत में अल्पसंख्यकों को हिंसक हमलों, जबरन धर्मांतरण और घर वापसी जैसी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। पैनल ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र होने के बावजूद भारत को अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

image-7_uh-blog-image-for-ankit-ji_13-12-2016

कुर्सी के मोह में कश्मीरी पंडितों को बिसराई

भाजपा ने दावा किया था कि वह सत्ता में आते ही कश्मीरी पंडितों के लिए श्रीनगर में अलग कॉलोनी बनाएगी, लेकिन यह दावा भी सियासी मोह की भेंट चढ़ गया। सरकार की नीयत पर सवाल इसलिए भी उठता है कि उसने इसे लेकर अभी तक कोई रणनीति साफ नहीं की है। बस टालमटोल की रणनीति ही अपनाकर काम चला रही है। धारा 370, सामान आचार संहिता का तो जिक्र करना भी भाजपा नेता भूल चुके हैं, जिसे लेकर पूरे देश सियासी रोटी सेंकते रहे हैं।

मोदी सरकार की नाकामियों की लिस्ट इससे कहीं लम्बी है। अभी तो ये कुछ मामलों की बानगी ही है।

उत्तर हमारा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Uttar Hamara

Uttar Hamara

Uttar Hamara, a place where we share latest news, engaging stories, and everything that creates ‘views’. Read along with us as we discover ‘Uttar Hamara’

Related news