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मेरी सरकार और पार्टी का सिर्फ एक उद्देश्य उत्तर प्रदेश का विकास: सीएम अखिलेश यादव

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मानते हैं कि किसी भी सरकार की कामयाबी का पैमाना यह होना चाहिए कि जो मुख्यमंत्री शिलान्यास के पत्थर लगा रहा है,वही अपने कार्यकाल में उस प्रोजेक्ट का उद्घाटन भी करे।  इस कसौटी पर मेरी सरकार खरी उतर रही है, हमने प्रोजेक्ट्स की शुरुआत का सिलसिला शुरू कर दिया है। ललितपुर पावर प्रोजेक्ट की 660 मेगावाट की पहली यूनिट शुरू हो गई है। लखनऊ मेट्रो और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसे बड़े काम भी शिड्यूल के अनुरूप चल रहे हैं।

अखिलेश यादव को मालूम है कि उन्हें इस चुनाव में अपनी पारंपरिक प्रतिद्वंदी बसपा के साथ-साथ बीजेपी से भी जूझना होगा। क्या उनकी तैया‌री मुक्कमल है। और इस जंग को वे अपनी सरकार ने हुए विकास कार्यों से जीतने के प्रति आश्वस्त हैं। वे कहते हैं हर काम में बेहतर की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। पिछली सरकार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से पटरी से उतर गई थी। इसे पटरी पर लाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। खुशी है कि मैं इसमें कामयाब रहा। जहां तक सरकार की उपलब्धियों के मूल्यांकन का सवाल है तो मैं इसे सौ फीसदी अंक दूंगा। सूबे में हमेशा से चुनावी सियासत का ट्रेंड रहा है।

अगली सरकार में उनकी क्या प्राथमिकताएं रहेंगी, इस सवाल पर वे कहते हैं- पहली बात तो यह कि समाजवादी लोग कभी चुनाव में सियासी नफा-नुकसान को ध्यान में रखकर प्राथमिकता तय नहीं करते। जनता को प्रोजेक्ट्स का फायदा मिले, इसलिए हमारी कोशिश है कि सारे काम समय पर पूरे हों।  लखनऊ मेट्रो,आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे,आईटी सिटी, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम,कैंसर संस्थान, ट्रिपल आईटी,कुशीनगर हवाई अड्डा,काफी लंबी फेहरिस्त है,कामों की। हमारी प्राथमिकता सिर्फ उत्तर प्रदेश के विकास की होगी।

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उनका कहना है कि सपा विधानसभा चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है। नेताजी (मुलायम सिंह यादव) कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का समय-समय पर मार्गदर्शन कर रहे हैं। जहां तक चुनावी संभावनाओं की बात है तो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पार्टी की नीतियों और राज्य सरकार की उपलब्धियों के आधार पर जनता फिर समाजवादी पार्टी को शासन की बागडोर सौंपेगी। मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ का नारा दिया तो आपने ‘मेक इन यूपी’ का। स्वच्छता अभियान में भी ऐसा ही हुआ। साफ है कि केंद्र से बेहतर तालमेल नहीं हैं।

आबादी के लिहाज से सबसे बड़े सूबे की अनदेखी कर ‘मेक इन इंडिया’ को सफल नहीं बनाया जा सकता। जहां तक स्वच्छता अभियान का सवाल है तो हमने सही मायने में इस अभियान को सार्थक बनाने की पहल की।हरियाली के बिना सब बेमतलब है। यही वजह है कि हमने सफाई के साथ हरियाली को भी जोड़ा। ‘क्लीन एंड ग्रीन यूपी’को साकार करने का काम तेजी से किया जा रहा है।

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सपा सरकार ने जनहित और विकास के काम तो काफी किए। हमने तय किया है कि सरकार की उपलब्धियां प्राथमिकता से जनता के बीच पहुंचाई जाएं। जहां तक कानून व्यवस्था की बात है तो सपा सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर जब-तब आरोप लगाए गए। सीएम का कहना है की यूपी की घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। बदायूं की घटना इसका बड़ा उदाहरण है। एक और उदाहरण कुंभ मेले का दूंगा। मेले के प्रबंध को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने सराहना की। करोड़ों-करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कोई दिक्कत नहीं हुई। अगर कानून-व्यवस्था वाकई खराब है तो सूबे में नामी-गिरामी अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियां निवेश क्यों करतीं? सूबे में अमन-चैन के माहौल को खराब करने वाले साम्प्रदायिक तत्वों को ही चुनौती माना जा सकता है। बहरहाल अखिलेश यादव ने ऐसे सख्ती की कि असामाजिक तत्व अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो सके।

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