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जानिए,  मेट्रो से कैसे बदलने वाली है लखनऊवासियों की जिंदगी

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25 November 2016

देश भर में बड़े शहरों में बढ़ती आबादी, गाड़ियों की बेतहाशा वृद्धि, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, आए दिन सड़कों पर हादसे और न जाने क्या-क्या मुश्किलों  का सामना करना पड़ता है। सरकार की कोशिशें और कोर्ट की फटकार के बावजूद समस्या जस की तस दिखाई देती है। दरअसल ये दिक्कतें उपजती हैं सड़कों पर ट्रैफिक के दबाव से। शहर का क्षेत्रफल वही होता है। सड़क की लंबाई भी कमोबेश वही होती है, लेकिन आबादी गुणात्मक रूप से हर साल बढ़ती जा रही है और उसी तरह गाड़ियों की संख्या में इजाफा होता जाता है। इन सब का कुप्रभाव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ भी इन समस्याओं से अछूती नहीं है। लेकिन लखनऊवासियों को अब इन समस्याओं से काफी राहत मिलने की उम्मीद है। जी हां, हम बात कर रहे हैं लखनऊ में मेट्रो परियोजना की, जल्द ही जिसकी राजधानीवासियों को सौगात मिलेगी। माना जा रहा है कि मेट्रो शुरू होने पर यह लखनऊ के लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव लाएगा।

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इसकी पड़ताल करने से पहले ये जानने की कोशिश करते हैं कि सड़कों पर गाड़ियों की बेतहाशा वृद्धि और ट्रैफिक जाम कैसे लोगों की सेहत के दुश्मन बने हुए हैं। एक सर्वे के मुताबिक दुनिया के सबसे प्रदूषित 25 शहरों में लखनऊ भी शामिल है। पिछले पांच साल में यहां प्रदूषण का स्तर डेढ़ गुना तक बढ़ चुका है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े बताते हैं कि यहां हवा में मानकों से सात गुना ज्यादा प्रदूषण है। यह मानक 50 माइक्रोन प्रति घन मीटर होना चाहिए, लेकिन लखनऊ का स्तर 349.8 माइक्रोन प्रति घन मीटर है। नेशनल एयर एंबिएंट क्वालिटी स्टैंडर्ड (नैक्स) के मानक से भी यह 3-4 गुना ज्यादा है। इसकी वजह भी वही है- वाहनों की बढ़ती संख्या और ट्रैफिक जाम। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि इन पांच सालों में सांस के साथ घुलनशील कण (पीएम-10) का स्तर भी करीब डेढ़ गुना बढ़ चुका है। इसका सीधा असर आम-आदमी और पर्यावरण दोनों की सेहत पर देखने को मिल रहा है।

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दरअसल लखनऊ में गाड़ियों की संख्या में इजाफा दुगनी तेजी से हो रहा है। रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस के आंकड़ों के मुताबिक, 2010 में लखनऊ में 11,07,455 वाहन सड़कों पर थे। जबकि 2015 में पहुंचते ही यह संख्या 17,09,662 हो गई। पांच सालों में लखनऊ की सड़कों पर 6,62,207 वाहन बढ़ गए यानी 54 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। दरअसल हर साल एक लाख नए वाहन लखनऊ के ट्रैफिक का हिस्सा बन जाते हैं। यूपीपीडब्लूडी के एक सर्वे के मुताबिक शहर में चार लाख से अधिक निजी गाड़ियां सड़क पर फर्राटा भरती हैं। 30 प्रतिशत लोग अपनी निजी गाड़ी से सफर करते हैं। वहीं लखनऊ आरटीओ कार्यालय के मुताबिक शहर में 10 साल से पुरानी करीब एक लाख गाड़ियां भी फर्राटा भर रही हैं, जो निजी और सार्वजनिक उपक्रमों दोनों की हैं। ये दस साल से पुरानी गाड़ियां प्रदूषण बढ़ाने में सबसे बड़ी जिम्मदार मानी जा रही हैं। इन सबके चलते शहरवासी जाम और स्मॉग जैसी स्थितियों से जूझ रहे हैं।

इसका एक समाधान तो ये हो सकता है कि लोग कम से कम निजी गाड़ियों का इस्तेमाल करें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जाएगा। लेकिन इसकी भी कुछ सीमाएं हैं, लिहाजा सीएम अखिलेश यादव ने लखनऊ में मेट्रो की शुरुआत पर अमल किया। दरअसल मेट्रो रेल आधुनिक परिवहन प्रणाली है। इसे प्रदूषण नियंत्रण के मानकों पर तैयार किया गया है। साथ ही मेट्रो की अपनी अनइंटरप्टेड लाइन होने से यातायात भी सुगम होगा। इस तरह यह सड़कों पर जाम या गाड़ियों के दबाव जैसी दिक्कतों को हल करने में मददगार साबित होगा।यात्रा में लगने वाला समय भी कम हो जाएगा।

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समय की बचत

लखनऊ में मेट्रो के टीपीनगर से चारबाग तक शुरू होने वाले प्राइमरी सेक्शन की ही बात करें तो 8.5 किमी. लंबे इस सेक्शन पर हर दो से तीन मिनट पर एक मेट्रो दौड़ेगी, जो 15 से 20 मिनट में यात्रा पूरी कर लेगी। जबकि सड़क से इस दूसरी को तय करने में अभी 45 मिनट से एक घंटे तक लग जाते हैं। इस तरह समय की काफी बचत होगी।

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पैसे की बचत

एयरकंडीशन्ड सफर की सुविधा और ट्रैफिक के झंझट से छुटकारा तो मेट्रो का प्लस प्वाइंट है ही। इससे लोगों के पैसे की भी बचत होगी। अभी टीपीनगर से चारबाग तक के लिए कैब का किराया करीब डेढ़ सौ रुपये लगता है, जबकि आॅटो से सफर में भी 20 से 30 रुपये तक खर्च हो जाते है। इससे अलग मेट्रो का किराया काफी किफायती होगा।

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सड़कों पर कम होगा दबाव

चार कोच की एक मेट्रो ट्रेन में करीब 1100 यात्री अपने गंतव्य को जा सकेंगे। अभी आठ मेट्रो ट्रेनों का प्राइमरी सेक्शन में संचालन होगा। इस तरह देखा जाए तो दिन भर में 70 से 80 हजार लोग आवागमन कर सकेंगे। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है मेट्रो के संचालन से सड़कों पर यातायात का दबाव किस कदर कम होगा। इससे सड़कों का भी यातायात बेहतर होगा और जाम की समस्या से कई बड़े रूट पर राहत मिलेगी।

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प्रकृति और व्यक्ति दोनों की सेहत होगी बेहतर

पूरी मेट्रो परियोजना को इस तरीके से डिजाइन किया गया है कि पर्यावरण का संरक्षण हो। दूसरी ओर मेट्रो का संचालन जब प्रभावी होगा तो स्वाभाविक है सड़कों पर भी यातायात का दबाव कम होगा। ट्रैफिक जाम से भी राहत मिलेगी। इसका सीधा लाभ प्रदूषण रोकने में मिलेगा, जिससे प्रकृति और व्यक्ति दोनों का सेहत बेहतर होगा। तो तैयार हो जाइए शानदार और ‘सेहतमंद’ मेट्रो की सवारी करने के लिए, क्योंकि जल्द ही इसका ट्रॉयल रन शुरू होने जा रहा है और खुशखबरी चंद महीनों की दूरी पर है ।

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