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सीएम अखिलेश की बदौलत उत्तर प्रदेश में सच हो रहे लोगों के सपने

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18 November 2016

जहां चाह, वही राह…. यूँ ही नहीं ये वाक्य वर्षों से लोगों में कुछ नया कर दिखाने का जोश, जज्बा और जुनून पैदा कर रहा है। उदार व्यक्तित्व के धनी अखिलेश यादव के दिल में भी ऐसी ही एक चाह यूपी को नए दौर की तरक्की की ओर मोड़ने की थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी ईमानदार कोशिशों और कुशल नेतृत्व की बदौलत उन्होंने उत्तर प्रदेश को आज एक ऐसे मुकाम पर पहुंचा है, जिसके आगे सिर्फ यूपी की प्रगति, उन्नति व समृद्धि का ही रास्ता जाता है। अखिलेश यादव ने समाज के सभी तबके को ध्यान में रखकर कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं। लोहिया ग्रामीण आवास योजना, शौचालयों का निर्माण, हौसला पोषण योजना, समाजवादी पेंशन योजना सहित तमाम कल्याणकारी योजनाएं इस फेहरिस्त में शामिल हैं।

ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ा किसान मुफ्त सिंचाई के लाभ से उन्नत फसल का उत्पादन कर नवीन मंडियों में सही दामों के साथ अपनी फसलों को विक्रय कर पा रहा है। कृषि सहित मुर्गा-मछली पालन और पशुपालन में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। आज प्रदेश में तमाम युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप जीविकोपार्जन के अनेकों साधन उपलब्ध हो सके हैं। उनकी यह सोच रोजगार को बढ़ाने के साथ ही समग्र रूप से राज्य के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का साधन सिद्ध हो रही है। जमीनी स्तर पर योजनाओं का लाभ पहुंचने से विकास नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इनका मकसद संसाधनों का एक समान वितरण कर एक बेहतर समाज का निर्माण करना है। अखिलेश यादव की प्रगतिशील और दूरदर्शी सोच के चलते आज यूपी की बदली हुई तस्वीर हमारे सामने है। ऐसी ही तरक्की की पांच तस्वीरों को हम आपके समक्ष रख रहे हैं…..

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पूरी हुई आशियाना की आस

प्रतापगढ़ की मंगीता अपने परिवार के साथ छप्पर के घर में जिंदगी गुजार रहीं थी। बारिश में अक्सर पानी घर के अन्दर घुस जाता था। आसपास कूड़ा जमा रहता। रोज़ घर में बीमारी घेरे रहती थी। 2014-15 लोहिया आवास योजना में मंगीता का नाम चयनित हुआ। उसे एक पक्का मकान उपलब्ध कराया गया। मंगीता बताती है- लोहिया आवास बन जाने से जानवर घर में नहीं घुस पाते हैं। इससे गृहस्थी का सामान आदि सुरक्षित रहता है। सोलर लाइट लगने से बच्चों की पढ़ाई भी बेहतर हो रही है. पहले भोर से पहले या रात के अँधेरे में सबसे नज़रे बचा कर शौच के लिए जाना पड़ता था। अब सरकार द्वारा शौचालय बना कर दे  देने से इस मुश्किल से भी मुक्ति मिल गई हैं। मंगीता की स्थिति काफी दयनीय थी, कम पैसों में बच्चों की पढ़ाई के साथ घर चलाना मुश्किल हो गया था। वह बताती है कि समाजवादी पेंशन योजना मिलने से उसके परिवार की स्थिति में काफी सुधार आया है।

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कामधेनु योजना लाई जीवन में नई सुबह

रोजगार के बिना नबाव सिंह की ज़िदगी मुश्किलों में कट रही थी। परिवार का पालन पोषण तक मुश्किल  हो गया था। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के खर्च तक सभी कुछ पर संकट बढ़ रहा था । एक दिन नबाव सिंह को कामधेनु योजना के बारे में जानकारी मिली। नबाव सिंह ने मुख्य पशुचिकित्सा कार्यालय में अपना आवेदन दाखिल कर दिया। कुछ दिन बाद उन्हें इस योजना के लिए चुन लिया गया। बैंक से ऋण स्वीकृत होने के पश्चात नबाव सिंह ने छह महीने में 50-50 भैसों को खरीद कर दुग्ध उत्पादन का काम शुरू किया। लागत के अनुरूप नबाव सिंह को मात्र कुछ महीने के भीतर ही लाभ मिलना शुरू हो गया। वर्तमान में नबाव सिंह की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है। दुग्ध-उत्पादों के साथ-साथ गोबर व खाद की प्रचुर उपलब्धता से नबाव उसे खेतों में प्रयोग करते है जिससे फसलें भी अच्छी होती हैं।

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वरदान बनी जल बचाव योजना

मऊ जिला कई सालों से सूखे की मार झेल रहा था। खेती चौपट हो गयी थी । मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पहल करते हुए वहाँ ‘मुख्यमंत्री जल बचाव योजना’ की शुरुआत की। मऊ में पुराने तालाबों एवं पोखरों का पुनरुद्धार कराया गया। दस्तावेजों में ऐसे तालाबों व पोखरों को चिह्नित किया गया, जो अपना मूल स्वरूप खो चुके थे। फिर जनपद के सूख चुके तालाबों का जीर्णोद्धार किया गया। इससे आसपास के निर्धन व सीमांत कृषकों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकी। मऊ में 2015-16 में 1284 और 2016-17 में 416 तालाबों व पोखरों पर जीर्णोद्धार कराया गया। इससे वहाँ जलस्तर में वृद्धि के साथ सिंचित क्षेत्र में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। अब तालाबों और पोखरों पानी से भरे होने से किसान सीधा पंप सेट से फसलों की सिंचाई कर सकते हैं।

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मुर्गी पालन कर बने प्रेरणास्रोत

हरदोई के दलजीत सिंह सांगवान की कहानी किसी प्रेरणास्रोत से कम नहीं है। बड़े शहरों में अच्छी पढ़ाई-लिखाई एवं नौकरी के तमाम अवसरों के बावजूद अखिलेश सरकार की स्टार्टअप पालिसी से प्रभावित होकर इन्होंने बाहर जाने के बजाय यूपी में ही निवेश करने की सोची और मुर्गी पालन की सरकार की योजना से जुड़ कर रोज़गार के अवसर तलाशने शुरू कर दिए. शुरुआत में चार यूनिट की 30,000 लेयर में मुर्गी पालन का कार्य सीतापुर रोड स्थित, कुइया गाँव से शुरू किया। 90,000 मुर्गियों से इस यूनिट में प्रति दिन 74,000 अण्डों का उत्पादन शुरू हुआ। जिसमें बची हुई 30,000 मुर्गियां अगले 3-4 महीने में अंडे देने के लिए तैयार हो जाती हैं। ऐसी योजनाएं उन प्रगतिशील व्यक्तियों के लिए अत्यधिक कारगर साबित होती हैं जो अपनी मिट्टी में रहकर एवं इसी से जुड़ कर अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। श्री दलजीत जैसे तमाम लोगों ने इस योजना से जुड़ कर प्रदेश का धन प्रदेश में तो निवेश किया ही साथ ही में अन्य प्रदेशवासियों के लिए भी रोज़गार के द्वार खोले।

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खुले आकाश से आवास तक का सपना पूरा

सिर पर एक छत और चार दिवार का साथ महज़ इस छोटी सी ख्वाहिश को पूरा करने में लोगों की ज़िंदगी बीत जाती है। ऐसे ही एक छोटे से सपने को दिल के किसी कोने में संजोय ललितपुर के रमेश काछी अपने पत्नी और तीन बच्चो के साथ झोपड़ीनुमा घर में जीवन यापन करते थे। दिसंबर-जनवरी में ठंड के थपेड़े तो मई-जून में चुभती लू ने उनके जीवन को बदहाल बना दिया था। मानसून में तो घर ताल में तब्दील हो जाता था। ऐसी तमाम विकट परिस्थितियों के बावजूद उसी घर में रहने को मजबूर थे। उनकी दिक्कतों को संज्ञान में लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने रमेश को लोहिया ग्रामीण आवास योजना का लाभ देने का निर्णय लिया। योजना में चयन होने के बाद रमेश की पत्नी सरजू को सोलर लाइट और शौचालय से युक्त मकान दिया गया. रमेश और सरजू को आज खुशियों का आधार मिल गया है. कभी बदलते मौसम के सामने बेबस सरजू आज जब खिड़की से बाहर बरसती बूंदो को देखतीं हैं तो लगता है उनके सारे दुःख खिड़की के शीशे पर ढुलकती बूंदों की तरह जिंदगी से बाहर चले गए हैं। तब उनकी आंखें ख़ुशी से नम हो जातीं हैं, उनका कई वर्षों का सपना जो अब पूरा हो गया है।

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