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“जयललिता की जन कल्याणकारी योजनाएं गवर्नेंस के लिए बनी रहेंगी प्रेरणास्रोत”, #UPCM

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06 December 2016

तमिलनाडु आज बिलख रहा है। जयललिता नहीं रहीं। वो जनता के बीच ऐसी मिसाल थीं कि उनके निधन के बाद आज देश का बड़ा से बड़ा महानायक उनके सामने मामूली लग रहा है। चेन्नई से आने वाली हर तस्वीर और हर खबर बता रही है कि वह सिर्फ सत्ता के शीर्ष पर ही विराजमान नहीं थीं, बल्कि लोगों के दिलों पर राज करती थीं। दक्षिण भारत में फ़िल्मी पर्दे से राजनीति में बहुत लोग आए लेकिन जयललिता कोई नहीं बन पाया। 22 सितंबर से अस्पताल में वे जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही थीं। आखिरकार 5 दिसम्बर की रात 11:30 बजे वो मनहूस खबर आ गई कि जयललिता हमारे बीच नहीं रहीं। इसके साथ ही भारतीय राजनीति में एक युग का अंत हो गया।

अखिलेश यादव ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया। ‘पुरात्ची थालैवा’ यानी क्रान्तिकारी नेता के रूप में अमर जयललिता को श्रद्धांजलि देते हुए सीएम अखिलेश ने कहा कि जयललिता जी द्वारा चलाई गईं योजनाएं गवर्नेंस के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी।  जयललिता जी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर तमिलनाडु के गांव, गरीब, महिलाओं एवं किसानों की भलाई के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। एक सफल राजनीतिज्ञ के रूप में उन्होंने तमिलनाडु के जन-जीवन पर जो छाप छोड़ी है उसकी भरपाई कर पाना कठिन है। जयललिता के निधन से तमिलनाडु की जनता ने जन-कल्याणकारी नेता खो दिया है। सीएम अखिलेश यादव मंगलवार दो बजे जयललिता को श्रद्धांजलि देने के लिए चेन्नई भी रवाना हो गए।

देश भर में जयललिता के लिए ये प्यार, जनसम्मान यूँ ही नहीं उमड़ रहा है। उत्तर भारत के लोग जयललिता की लोकप्रियता को समझने के लिए उनकी तुलना मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से कर सकते हैं। ठीक अखिलेश सरकार की तरह जयललिता ने तमिलनाडु में जमीनी स्तर पर काम किए।  जयललिता ने गांव के गरीब और कमजोर वर्ग को ध्यान में रखकर कई योजनाएं चलाईं। अम्मा कैंटीन, अम्मा वाटर, अम्मा साल्ट (नमक), अम्मा फार्मेसी (दवाखाना), अम्मा सीमेंट, अम्मा लैपटॉप, अम्मा विजिटेबल्स जैसी योजनाएं हर वर्ग को आज भी लाभान्वित कर रही हैं।

ये वैसे ही था जैसे अखिलेश यादव की सरकार में भी 18 लाख से ज्यादा बच्चों को लैपटॉप बांटे जा चुके हैं, स्मार्टफोन की घोषणा भो वह हाल ही में कर चुके हैं। इसके अलावा धनतेरस पर स्कूली बच्चों को थाली-गिलास, ग्राम प्रधानों के मानदेय में वृद्धि, आशा कार्यक्रताओं के मानदेय में वृद्धि, राज्य कर्मचारियों को डबल दिवाली बोनस, विधवा महिलाओं के लिए नौकरी में आयु सीमा की राहत आदि भी अखिलेश सरकार में किये जा रहे हैं । इसके अलावा अखिलेश ने समाजवादी पेंशन योजना, कन्या विद्याधन योजना, नि:शुल्क सिंचाई योजना, कौशल विकास मिशन, कामधेनु डेयरी योजना, मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग योजना, जनेश्वर मिश्र ग्राम योजना, किसान दुर्घटना बीमा योजना और 108 समाजवादी एंबुलेंस जैसी योजनाएं भी चलाईं। अपनी योजनाओं से अखिलेश पीपल्स सीएम बन गए हैं, वैसे ही अम्मा ‘पुरात्ची थालैवा’ के रूप में लोकप्रिय हो गईं ।

दरअसल जयललिता और अखिलेश यादव में जनकल्याण के कार्यकर्मों को प्राथमिकता देने सहित कई और भी समानताएं हैं। अखिलेश यादव ने 15 मार्च 2012 को उत्तर प्रदेश के 33वें मुख्‍यमंत्री के रूप में शपथ ली। अखिलेश उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री हैं, शपथ ग्रहण के वक्त वे केवल 39 वर्ष के थे। तो जयललिता ने वर्ष 1991 में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ा और सरकार बनाई थी। वे 24 जून 1991 से 12 मई तक राज्य की पहली निर्वाचित मुख्‍यमंत्री और राज्य की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री रहीं। अपने पहले शपथ ग्रहण के समय जयललिता 43 वर्ष की थीं।

जयललिता और अखिलेश यादव ने 2014 के आम चुनावों से पूर्व दो मुलाकात की थीं। अखिलेश यादव ने जयललिता के दोबारा सत्ता में वापसी के बाद मीडिया के सामने खुलकर खुशी जाहिर की थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी अखिलेश यादव ने एक बार चेन्नई जयललिता से मुलाकात की थी।  चेन्नई में आए भीषण बाढ़ के बाद राहत अभियान के लिए अखिलेश यादव ने जब तमिलनाडु सरकार को 25 करोड़ रुपये का योगदान दिया तो जयललिता ने पत्र भेजकर शुक्रिया अदा किया। जयललिता ने कहा, ‘‘तमिलनाडु में जारी बाढ़ राहत अभियानों के लिए तमिलनाडु मुख्यमंत्री राहत कोष में 25 करोड़ रुपये देने के लिए आपका शुक्रिया। मैं तहे दिल से इस योगदान के लिए आपको धन्यवाद देती हूं। ’’

जयललिता के मुलायम सिंह यादव से भी घनिष्ठ सम्बन्ध थे। उनके निमंत्रण पर जयललिता 23 अप्रैल 2007 को इलाहाबाद में एक जनसभा को संबोधित करने आई थीं। तब उन्होंने पहली बार हिंदी में भाषण दिया था। उस समय यूपी में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार हो रहा था और जयललिता प्रचार के तहत ही इलाहाबाद आई थीं। जयललिता ने तब कहा था ‘याद रखिए, एक हैं मुलायम इस वतन में, एक है चंदा जैसे गगन में।’आज जयललिता उसी गगन में सदैव के लिए विलीन हो गईं। अमर हो गईं।

राजनीति को जीवन से भी ज़्यादा जीने वाली जयललिता को ‘उत्तर हमारा ‘विनम्र श्रद्धांजली अर्पित करता है।

उत्तर हमारा

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