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रथयात्रा स्पेशल: बुंदेलखंड को बदहाली से उबार कर विकास के रास्ते पर बढ़ा रहे सीएम अखिलेश

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10 November 2016

गौरवशाली इतिहास को समेटा बुंदेलखंड कई वर्षों तक प्राकृतिक आपदा और बदहाली की वजह से सुखिर्यों में रहा है। दुर्भाग्य से वर्षों तक सरकारों ने इस क्षेत्र को संकट से उबारने के लिए कोई ठोस पहल नहीं की। लेकिन उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार बनने के बाद बुंदेलखंड के हित का भी ख्याल रखा जाने लगा है। लेकिन इसमें भी केंद्र सरकार को सहयोग मिल जाता तो यह क्षेत्र विकास की नई इबारत लिख सकता था। बुंदलेखंड को लेकर सरकारों के रवैये के बारे में दो बातें सामने रखता हूं। इससे बुंदेलखंड प्राकृतिक आपदा के बावजूद इससे क्यों नहीं उबर पा रहा है, इसे समझने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार की मंत्री उमा भारती बुंदेलखंड क्षेत्र से ही सांसद हैं। उन्होंने यहां की जनता से वादा किया था कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर दो साल के भीतर बुंदेलखंड अलग राज्य होगा। आशय यह था कि नया राज्य बनने पर वहां विकास के कार्य होंगे। इसके बावजूद अब तक केंद्र की ओर से यूपी के हिस्से वाले बुंदेलखंड के साथ दोहरा व्यवहार होता रहा है। पिछले दिनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बुंदेलखंड के दौरे पर आए थे तो भी सियासत के अलावा उन्होंने यहां के लिए किसी एक योजना की घोषणा नहीं की। अब दूसरा पहलू देखते हैं प्रदेश सरकार का। जब नरेंद्र मोदी बुंदेलखंड को सियासत का शिगुफा दे रहे थे, उसी के आसपास अखिलेश सरकार बुंदेलखंड को 39 साल से लंबित लहचूरा बांध का लोकार्पण कर बड़ी सौगात दे रही थे। महोबा में इस बांध का लोकार्पण किया गया। इसी के साथ विकास की अगली कड़ी में भौरट बांध परियोजना का भी शिलान्यास किया गया ताकि बुंदेलखंड का भविष्य और बेहतर बनाया जा सके।

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बुंदेलखंड को सूखे की समस्या से राहत दिलाने के लिए मौजूदा अखिलेश सरकार द्वारा जिस तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं, वे इस क्षेत्र को तात्कालिक समाधान तो दे ही रही हैं, दीर्घकालिक रूप में भी उनकी दिक्कतें दूर करने में कारगार साबित होने वाली है। इसके नतीजे भी दिखने लगे हैं। लंबे समय से विपदा झेल रहे लोगों के साथ सामने जब परिवार का पेट पालने में दिक्कत सामने आने लगी तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकारी खजाने का मुहं उनकी ओर मोड़ दिया। सूखे से जूझ रहे लोगों को अखिलेश सरकार ने न सिर्फ मुफ्त सूखा राहत सामग्री बांटकर मदद पहुंचाई, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि भुखमरी से किसी की मौत न हो। है। मकसद साफ है। कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहे। इस योजना के अंतर्गत बुंदेलखंड में पीड़ित लोगों को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 10 किलो आटा, पांच किलो चावल और 5 किलो चने की दाल, 25 किलो आलू, 5 लीटर सरसो का तेल और 1 किलो शुद्ध देसी घी के साथ एक किलो मिल्क पाउडर हर महीने उपलब्ध कराया जा रहा है। इसका लाभ यहां 2 लाख 30 हजार अंत्योदय कार्ड धारकों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री में इस योजना को चार माह तक जारी रखने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि भुखमरी से यदि किसी व्यक्ति की मौत होती है तो सम्बन्धित जिलाधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी। दूसरी ओर मनरेगा के तहत बुंदेलखंड में लोगों को 100 की जगह 150 दिन तक रोजगार दिलाना तय कराया। सभी सातों जिलों के पात्र परिवारों को शत-प्रतिशत समाजवादी पेंशन योजना के तहत आच्छादित करने का फैसला लिया। इसका मकसद था कि मुश्किल दौर में भी लोगों को समस्या न उठानी पड़ी।

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सीएम अखिलेशकृषक दुर्घटना बीमा योजना की राशि को 2 लाख से बढ़ा कर 5 लाख रुपये कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा फायदा बुंदेलखंड के किसानों को मिलेगा। इस योजना के चलते उन्हें फसल चैपट होने पर भी कर्ज के तले दबने या भुखमरी की नौबत नहीं आएगी। साथ ही किसानों का मनोबल भी बना रहेगा।

बसपा सरकार में बुंदेलखंड में पांच करोड़ पौधे लगाने के नाम पर केंद्र से धन को आवंटित करा लिया गया, लेकिन एक भी पौधे नहीं लगाए गए। नतीजतन वर्षों से सरकारों की अनदेखी के चलते सिंचाई के पुराने साधन-संसाधन तो बर्बाद ही हो गए थे, भूगर्भ जल भी समाप्त होने लगे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किसानों के इस मर्म को महसूस किया। मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट में भी मुख्यमंत्री ने बुदंलेखंड के लिए अलग से प्रावधान कर इस क्षेत्र की स्थिति सुधारने के प्रति अपनी मंशा साफ कर दी। इस क्रम में बुंदलखंड में सिंचाई व्यवस्था को सृदढ बनाने की दृष्टि में 420 करोड़ की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। दूसरी ओर समाजवादी जलसंचय योजन के तहत करीब 100 तालाबों के पुनर्जीवन का कार्य कराया। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अगर इतना पानी स्टोर करना होता तो एक बांध बनाना पड़ता जिसकी लागत 1200 करोड़ आती और तीन साल का समय लगता।

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अखिलेश सरकार ने पीने की पानी की किल्लत दूर करने के लिए बुंदलखंड  में जल आपूर्ति के लिए 3226 इंडिया मार्क-2 हैंड पंप लगवाए। 440 पानी के टैंकर खरीदने  के लिए 9.94 करोड़ रुपये आवंटित किए। पीने के पानी की समस्या को दूर करने के लिए टैंकर के माध्यम से भी पेयजल की आपूर्ति की। बुन्देलखण्ड पैकेज के प्रथम चरण में 12 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाएं एवं द्वितीय चरण में 48 ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।

इतना ही नहीं पानी की 13 बड़ी परियोजनाओं पर एक साथ काम शुरू किया गया ताकि बुंदेलखंड को इस बदहाली से हमेशा के लिए उबारा जा सके। पिछले चार वर्षों में इनमें से चार योजनाएं पूरी हो चुकी है, अन्य पांच पर काम चल रहा है। उन पांच में से दो 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी हैं। तीन 60 प्रतिशत पूरी हो चुकी हैं। पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने झांसी के मोंठ तहसील के जुझारपुर में 612.04 करोड़ रुपये की लागत से एरच बहुउद्देशीय बांध परियोजना दिसंबर 2016 तक हो जाएगी पूरी। इस परियोजना के पूरी होने के बाद 1850 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई हो सकेगी। परियोजना से बुंदेलखंड में पीने और सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा। एरच परियोजना 2 मेगावाट बिजली भी उत्पादन करेगी, इससे किसानों को लाभ मिलेगा।

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