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आंकड़ें गवाह हैं अखिलेश सरकार में बेहतर हुआ यूपी का विकास

2016-08-10 (1)

10 August, 2016

असल मायने में जनता की खुशहाली ही किसी राज्य की प्रगति का पैमाना हो सकती है। अगर लोगों की आय बेहतर हो रही है तो स्पष्ट है कि वहां तरक्की हो रही है। इसका सटीक उदाहरण उत्तर प्रदेश हैं, जहां सरकार की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न विकास कार्यक्रमों के चलते पिछले चार वर्षों में प्रति व्यक्ति आय में जबरदस्त वृद्धि हुई है। बुनियादी सुविधाओं एवं कल्याणकारी योजनाओं से लोगों के जीवन स्तर में तेजी से बदलाव आया है। प्रदेश की आर्थिक विकास दर एवं प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी हुई है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि उपज, सिंचाई के साथ-साथ कृषि आधारित आर्थिक गतिविधियों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। इसके चलते विकास के माडल को लेकर जहां पहले दूसरे राज्यों की ज्यादा बात होती थी और उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्यों में शामिल होने का दंश झेलना पड़ता था, वहीं अब एसोचैम भी अखिलेश सरकार में हो रहे विकास कार्यों को देखकर उत्तर प्रदेश की विकास दर के दो अंकों में होने को लेकर आशांवित है।

जहां पिछली सरकार में यानी वर्ष 2010-11 में उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 26355 रुपये और 2011-12 में 29417 रुपये थी, वहीं अखिलेश सरकार के बाद से इसमें जबरदस्त इजाफा हुआ है। वर्ष 2012-13 में प्रति व्यक्ति आय 35358 रुपये तक पहुंच गई और लगातार बढ़ते हुए इसने पिछले वित्तीय वर्ष में 48584 रुपये का आंकड़ा छू लिया। स्पष्ट है कि  उत्तर प्रदेश की पिछले सरकार के मुकाबले अखिलेश सरकार में प्रति व्यक्ति आय में 2015-16 तक 165 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है। ये आंकड़े खुद केंद्र सरकार है, जो बताते हैं कि यूपी में लोगों की आय बढ़ी है तो जहां की जनता का जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है।

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उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2012-13 में जहां 35358 थी, वहीं 2013-14 में 40790 रुपये, वर्ष 2014-15 में 44197 रुपये और वर्ष 2015-16 में बढ़कर 48584 रुपये हो गई। यह विकास सिर्फ प्रति व्यक्ति आय तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में शानदार बढोतरी हुई है। वर्ष 2012-13 में उत्तर प्रदेश की जीडीपी 3.9 प्रतिशत थी, जो 2013-14 में बढ़की 4.7 प्रतिशत, वर्ष 2014-15 में 6.2 प्रतिशत और वर्ष 2015-16 में बढ़कर 6.6 प्रतिशत हो गई। यह उत्तर प्रदेश की ग्रामीण एवं नगरीय अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है। इसी तरह उत्तर प्रदेश के शुद्ध राज्य घरेलू उत्पाद (एनएसडीपी) में भी प्रभावकारी सुधार हुआ है। 2012-13 में प्रदेश की एनएसडीपी वृद्धि 3.7 फीसदी थी, जो 2015-16 में बढ़कर 6.5 प्रतिशत हो गई।

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यह तो समग्र विकास की बातें है। नियोजित विकास के चलते उत्तर प्रदेश ने उद्यम स्थापना के साथ ही हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र में शानदार सफलता हासिल की है। अखिलेश सरकार के कामकाज के चलते उद्यम क्षेत्र में जहां उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है, वहीं विपरित परिस्थितियों के बावजूद हस्तशिल्प और हथकरघा में देश में दूसरा स्थान है। छठीं आर्थिक गणना के अनुसार वर्तमान सरकार के पहले ही वर्ष में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश में कुल 309997 उद्यम स्थापित हुए। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में 154586 तथा नगरीय क्षेत्रों में 155411 उद्यम स्थापित किये गये है, जबकि देश भर में इस क्षेत्र में 1873624 उद्यम लगाए गए। इस तरह उद्यम स्थापना में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 16.55 प्रतिशत रही है। इस प्रकार उत्तर प्रदेश इस आर्थिक गणना के दौरान देश में प्रथम स्थान पर है।

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देश या प्रदेश की प्रगति के लिए तीन बातें बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। पहला राजस्व व्यय को इस तरह समायोजित किया जाए किया जाए कि उसका अधिकांश उपयोग विकास कार्यों में उपयोग हो। दूसरा, कर्ज का उपयोग इस प्रकार किया जाए जिससे पूंजी निर्माण का रास्ता खुले। तीसरा, आमजन पर बोझ डाले बिना आमदनी के नए स्रोत विकसित किए जाएं। अखिलेश सरकार ने इन बातों पर गौर किया। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में राजस्व व्यय का विकास के कार्यों में खर्च बढ़ा है। प्रदेश सरकार की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक अखिलेश सरकार आने से ठीक पहले यह खर्च जहां 51. 4 प्रतिशत था, साल 2013-14 में यह खर्च बढ़कर 54.7 प्रतिशत हो गया। इसके अगले साल यह खर्च 58.6 प्रतिशत हो गया। इसके विपरित साल 2002-03 में लिए गए कर्ज का केवल 46 प्रतिशत ही पूंजीगत परिव्यय में उपयोग हुआ। इसका मतलब है कि कर्ज का आधे से ज्यादा हिस्से का उपयोग पूंजीगत कामों में नहीं हुआ।

 

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