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डाॅ. कलाम ने पूछा था कैसे पहुंचाओगे गांव-गांव बिजली, अखिलेश ने संभव करके बताया

Image Source: blog.su-kam.com

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 April 4, 2016

पूर्व राष्ट्रपति डाॅ. एपीजे कलाम ने एक मुलाकात के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछा था कि गांवों को बिजली कैसे मिलेगी? इसके जवाब में मुख्यमंत्री अखिलेश ने कहा कि यह मैं सिर्फ प्रस्ताव के तौर पर नहीं, जमीनी हकीकत के रूप में करके दिखाऊंगा। और अखिलेश ने यह करके दिखाया भी। अखिलेश सरकार ने सोलर मिनी ग्रिड से दो ऐसे गांव तैयार किए, जहां 24 घंटे बिजली आती है। इन गांव में लगे सोलर प्लान्ट्स का उद्घाटन भी डॉ. कलाम ने ही किया था। इसके जरिये सीएम ने यह भी बता दिया है कि उनके पास उत्तर प्रदेश की तरक्की का जो रोड मैप है वह बरबस नहीं है। उन योजनाओं में धरातल पर उतरने की क्षमता और फलने-फूलने की कुशलता है।

मिनी ग्रिड नीति हो, एलडीए बल्बों को प्रोत्साहन या फिर सब्सिडाइज सोलर पाॅवर पैक की बात, अखिलेश सरकार ने अपने दूरगामी और प्रैक्टिकल पहल से इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। अब तैयारी इस साल अक्टूबर तक गांवों को 14 से 16 घंटे और शहरों में 22 से 24 घंटे बिजली देने की तो है ही, साथ ही मार्च 2017 तक 500 मेगावाट सोलर पाॅवर के उत्पादन की तैयारियों में भी सरकार जुट चुकी है।

मिनी ग्रिड नीति 2016

डाॅ. कलाम से किये वादे को पूरा करने के क्रम में अखिलेश अपनी कोशिशों से प्रदेश के हर गांव तक बिजली पहुंचाने में जुटे हुए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में मिनी ग्रिड नीति 2016 जारी की है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जहां मिनी ग्रिड के लिए स्वतंत्र नीति है। इस नीति में मिनी ग्रिड की स्थापना के लिए निजी विकासकर्ताओं को प्रोत्साहित किए जाने के खातिर विशेष प्रावधान किए गए हैं। गैर परंपरागत ऊर्जा के मिनी ग्रिड के जरिए ग्रामीण इलाकों में बिजली की जरूरत को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है।

बिजली उत्पादन की प्रैक्टिकल नीति

लखनऊ में यूपी मिनी ग्रिड कॉन्क्लेव के दौरान सीएम ने एक बार फिर अपनी मंशा जाहिर की। यह कॉन्क्लेव राज्य की मिनी ग्रिड नीति के संबंध में प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों, निवेशकों, उद्यमियों, ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों को आपसी विचार-विमर्श के लिए एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराएगा। साथ ही, यह इन्क्लूसिव इकोनॉमिक ग्रोथ में रिन्यूएबल मिनी ग्रिड रीजन की संभावनाएं दिखाने में भी उपयोगी होगा। यह आयोजन द रॉक फेलर फाउंडेशन द्वारा किया गया था। वैसे भी सोलर पाॅवर के क्षेत्र में समाजवादी सरकार ने अनकन्वेंशनल एनर्जी के क्षेत्र में कई प्रैक्टिकल नीतियां बनाई हैं और उन्हें धरातल पर उतारा है। समाजवादी सरकार 4 साल से लगातार बिजली उत्पादन पर काम कर रही है।

24 घंटे बिजली का है सपना

सीएम ने मिनी ग्रिड काॅन्क्लेव के दौरान बताया कि उनकी लक्ष्य है कि पूरे प्रदेश को अबाधित 365 दिन 24 घंटे बिजली मिले। समाजवादी सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही। गांवों में अंधेरा दूर हो रहा है। वहां सोलर लाइटें भी लगाई जा रही हैं। सोलर पावर से गांवों को बिजली देने का भी प्रयास हो रहा है। मिनी किट के जरिए गांवों में बिजली पहुंचाई जा रही है।

सब्सिडाईज्ड सोलर पाॅवर पैक, ताकि पढ़ सकें बच्चे, बढ़ सकें ग्रामीण

प्रदेश के गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा तथा आर्थिक गतिविधियां बिजली के अभाव में प्रभावित न हों, इसलिए समाजवादी सरकार ने जनेश्वर मिश्र ग्राम योजना के अन्तर्गत प्रदेश के गरीब परिवारों को सब्सिडाईज्ड सोलर पावर पैक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। योजना अंतर्गत गरीब परिवारों के यहां संयन्त्र निःशुल्क स्थापित कराया जा रहा है। राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद द्वारा जनेश्वर मिश्र ग्रामों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु सीसी रोड का निर्माण, नाली निर्माण, इंडिया मार्का मार्का हैण्ड पंप की स्थापना तथा इन ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य कराया जा रहा है। परियोजना का क्रियान्वयन यूपीनेडा द्वारा किया जाएगा। यूपीनेडा द्वारा खुली निविदा के आधार पर संयत्रों की स्थापना करायी जायेगी। संयत्रों की कार्यशीलता सुनिश्चित करने के लिए यूपीनेडा का टोल फ्री नम्बर 18001800005 उपलब्ध रहेगा, जिस पर संयत्रों के काम नहीं करने पर ग्रामीणों द्वारा शिकायत दर्ज कराई जा सकेंगी।

बिजली बिल में कमी लाने के लिए एलईडी बल्ब

उत्तर प्रदेश में बिजली बचाने हेतु ज्यादा से ज्यादा लोगों को एलईडी बल्बों कबे इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसकी मदद से बिजली के छह से आठ प्रतिशत की कमी तक लाई जा सकती है। 2 स्टाॅर के बल्बों को सबसे कम और 5 स्टाॅर के बल्बों को सर्वाधिक दक्ष माना जाता है। जब एक सीएफएएल बल्ब को 03 स्टाॅर एलईडी बल्ब से बदला जाता है तो वह 42 रुपये प्रतिवर्ष और जब साधारण बल्ब से बदला जाता है तो वह 318 रुपये प्रतिवर्ष की बचत करता है। इसके साथ ही जब एक सीएफएएल के स्थान पर 03 स्टाॅर एलईडी बल्ब लगाते हैं तो इससे कार्बनडाइआक्साइड के उत्सर्जन में 6.8 किलोग्राम की कमी आएगी और जब साधारण बल्ब के स्थान पर इसका उपयोग किया जाएगा तो कार्बनडाइआक्साइड के उत्सर्जन में लगभग 51.5 किलोग्राम की कमी आएगी। इस तरह एलईडी बल्ब पर्यावरण सुरक्षा के लिए भी बेहतर है।

मार्च, 2017 तक 500 मेगावाट सोलर पाॅवर की तैयारी

बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रदेष सरकार की सौर ऊर्जा नीति-2013 के अन्तर्गत मार्च, 2017 तक 500 मेगावाट क्षमता से ग्रिड संयोजित सोलर पावर प्लाण्ट की स्थापना की दिशा में वर्तमान में कार्य किया जा रहा है। राज्य सरकार प्रदेश में बिजली व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। लोगों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विद्युत उत्पादन बढ़ाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं ताकि गांवों को 14 से 16 घण्टे की आपूर्ति तथा शहरों में 22 से 24 घण्टे की विद्युत आपूर्ति दी जा सके।

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