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मोदी सरकार के ढाई साल में क्या हैं देश में बिज़नेस के हाल

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21 December 2016

कई वर्षों बाद भारत में बनी पूर्ण बहुमत की केंद्र सरकार का आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है। इन ढाई सालों में भारत के आर्थिक महाशक्ति बनने के सपने क्या पूरे हो रहे हैं? वर्ल्ड बैंक की ताज़ा रिपोर्ट पर अमल करें तो ये आंकड़े चुभाने वाले हैं। इससे पता चलता है कि ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे पर बनी केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पर रही है। इसकी बड़ी वजह देश के आर्थिक हालत हैं। और इसमें कारोबारी गतिविधियों के लिए बेहतर माहौल होना अहम् भूमिका निभाता है। यदि अर्थव्‍यवस्‍था ठीक है, तो देश में विकास की कल्‍पना की जा सकती है। अर्थव्‍यवस्‍था के सही दिशा और गति से चलने पर देश का विकास निर्भर करता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्‍या वाकई भारत मोदी सरकार में आर्थिक महाशक्‍ति बनने की स्‍थिति में हो पायेगा?

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वर्ल्ड बैंक की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, बिजनेस करने में आसानी ‘ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस’ वाले देशों की रैकिंग में भारत 130वें पायदान पर है। पिछले साल के मुकाबले भारत की रैंकिंग में एक पायदान का सुधार हुआ है, लेकिन वो भी इसलिए क्योंकि वर्ल्ड बैंक ने भारत की पिछले साल की रैंकिंग को संशोधित कर 130वें स्थान से 131वें स्थान पर कर दिया था। वर्ल्ड बैंक की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, देश ने निर्माण परमिट, कर्ज हासिल करने और अन्य मानदंडों के मामले नाममात्र या कोई सुधार नहीं किया है। यही नहीं सुधारों को आगे बढ़ाने के मामले में भी मोदी सरकार में भारत की स्थिति कजाकिस्तान, केन्या और पाकिस्तान से भी ख़राब पाई गयी है।

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दुनिया की डूइंग बिजनेस 2017 की सूची में न्यूजीलैंड पहले और सिंगापुर दूसरे स्थान पर है। उसके बाद क्रमश: डेनमार्क, हांगकांग, दक्षिण कोरिया, नार्वे, ब्रिटेन, अमेरिका, स्वीडन तथा पूर्व यूगोस्लाव मैसिडोनिया गणराज्य का स्थान है।सुधारों को आगे बढ़ाने के आधार पर 10 प्रमुख देश ब्रुनेई दारूसलाम, कजाकिस्तान, केन्या, बेलारूस, इंडोनेशिया, सर्बिया, जॉर्जिया, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात तथा बहरीन हैं। वर्ल्ड बैंक के अनुसार दुनिया में 137 अर्थव्यवस्थाओं ने प्रमुख सुधारों को अपनाया जिससे छोटे और मझोले आकार की कंपनियों को शुरू करना और कारोबार करना करना आसान हुआ है।

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क्षेत्रवार आंकड़ों पर गौर करें तो बिजली के मामले में 190 देशों की रैंकिंग में भारत 26वें पायदान पर है। तो सीमाओं के पार व्यापार के मामले में रैंकिंग 143 और अनुबंधों को लागू करने के मामले में 172 पर है। कारोबार शुरू करने के लिहाज से भारत की रैंकिंग चार स्थान खिसककर 155वें स्थान पर आ गयी है।  निर्माण परमिट के मामले में एक पायदान नीचे 185वें पर आ गई। व्‍यापार शुरू करने के लिए लोगों को कर्ज देने के मामले में रैंकिंग दो अंक नीचे 44वें पर आ गई। वहीं, नए निर्माण की अनुमति देने के मामले भी भारत 2 पायदान खिसका। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने कंस्ट्रक्शन परमिशन, कर्ज हासिल करने और दूसरे मामलो में मामूली या कोई सुधार नहीं किया है।

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अर्थव्यवस्था सुधार और बेहतर कामकाज के बीच अंतर बताने वाले ‘डिस्टेंस टू फ्रंटियर’ के लिए वर्ल्ड बैंक ने 100 अंक तय किये थे. इस इंडेक्स में भारत को इस साल 55.27 प्वॉइंट मिले जो पिछले साल 53.93 था।

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