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समाजवाद का झंडा बुलंद करते हुए आगे बढ़ रहीं डिंपल यादव

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी और समाजवादी पार्टी से कन्नौज की सांसद डिंपल यादव यूपी चुनाव में एक ताकतवर महिला के रूप में उभरी हैं। महिलाओं के अधिकार और उनकी समस्याओं को लेकर हर मौके पर अपनी आवाज बुलंद करने वाली डिंपल यादव यूपी की राजनीति में अहम किरदार बन गयी हैं। राजनीति के पटल पर जिस तरह का उन्होंने दस्तक दिया है। उससे विपक्षी दल हैरान हो गये हैं। तकरीबन हर तीसरे दिन वह समाजवादी पार्टी के लिए वोट मांगने चुनावी मैदान में माइक संभालती हैं। जहां उन्हें सुनने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है।

शांत और सशक्त

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जानकारों की माने तो डिंपल यादव सोबर होने के साथ-साथ स्ट्रांग भी हैं, वो चुनौतियों को भली-भांति समझती हैं। 2013 में फिक्की के कार्यक्रम में दिया गया उनका भाषण हो या 2014 में संसद में महिलाओं के मुद्दे पर दिया गया स्पीच, डिंपल यादव ने अपने सधे हुए अंदाज से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

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डिंपल यादव बाहर से कोमल हैं, लेकिन अंदर से एक सशक्त महिला हैं। पार्लियामेंट में जहां वह महिलाओं के हित पर मजबूती अपनी बात रखती हैं, तो अपनी रैलियों में महिलाओं को सरकार की तरफ से मिलने वाली नौकरियों में 33% आरक्षण और उम्र सीमा को खत्म करने का ऐलान करती हैं। तो प्रदेश की महिलाओं को ताकत मिलती है। देश की पहली महिला हेल्पलाइन 1090 को यूपी में शुरू करने में डिंपल यादव की भूमिका रही है। साथ ही लड़कियों को रानी लक्ष्मी बाई अवार्ड देने में भी उनका सुझाव अहम था। इसके अलावा वह महिलाओं के बीच मजबूत बहु, बेटी और महिला राजनेता के तौर पर तेजी से लोकप्रिय हुई हैं।

प्रदेश में बेहद लोकप्रिय

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डिंपल की छवि परिवार में एक सुशील बहू की तो है ही, साथ ही वह एक ऐसी प्रोग्रेसिव महिला सदस्य बनकर उभरी हैं, जिनसे प्रदेश की युवा पीढ़ी खासकर लड़कियां रिलेट करती हैं। वे एक तरह से सूबे में वुमन एंपॉवरमेंट का प्रतिनिधित्व करती हैं। सीएम अखिलेश यादव को उनसे नैतिक बल मिलता है, जिसकी उन्हें जरुरत है। डिंपल की मौजूदगी अखिलेश के भीतर एक किस्म की स्थिरता और विनम्रता लेकर आई है और दोनों पति-पत्नी की केमिस्ट्री खुलकर सामने आती है। डिंपल ने अखिलेश के जीवन में जैसा बदलाव लाया वैसा ही वह उनकी राजनीति में भी ला रही हैं। अखिलेश यादव इस बात को बेहतर समझते हैं। उनकी लोकप्रियता आज प्रदेश में महिला नेताओं में सबसे ज्यादा है। उसका कारण है कि आम जनता के दुःख दर्द को बेहद अच्छे से समझती हैं। उन्होंने समाजवादी सरकार में महिलाओं से जुड़ी योजनाओं में उनकी अहम भूमिका रही है। जिसकी साफ़ झलक प्रदेश सरकार की योजनाओं में साफ़ तौर पर देखी जा सकती है।

तेजी से राजनीतिक पटल पर उभरी

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भारतीय राजनीति में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले हमेशा से कमतर आंका गया है। ऐसा लोगों को मानना है कि महिलाओं के लिए राजनीति एक मुश्किल डगर है। खासकर तब जब उसके सिर पर घर-परिवार की जिम्मेदारी भी होती है। लेकिन डिंपल यादव ने घर-परिवार और राजनीति में बेहतर संतुलन बनाते हुए मौजूदा समय में यूपी की शीर्ष महिला नेता बन गयी हैं। यूपी में चुनावी सीजन चल रहा है, जिसमें डिंपल यादव लगातार रैलियां कर रही हैं। उनके भाषण में महिलाओं को सबसे ज्यादा महत्व मिलता है। वह महिलाओं की आवाज को राज्य के शीर्ष स्तर पर उठाते हुए आगे बढ़ रही हैं। आम जनता खासकर महिलाओं को डिंपल की आवाज में अपना दर्द झलकता है। समाजवादी पेंशन योजना की रकम महिलाओं के खाते में जाता है। जिसके पीछे डिंपल यादव का ही हाथ है, वह अपने भाषणों में ये कहती हुई नजर आती रही हैं कि एक माँ होने के नाते वह महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझती हैं। ऐसा भी माना जाता है कि समाजवादी घोषणा पत्र में गरीब महिलाओं के लिए प्रेशर कुकर, बच्चों को घी और दूध देने का सुझाव उन्होंने ही दिया है। ऐसे में डिंपल यादव बतौर महिला नेता यूपी की उम्मीद की नई किरण बन गयी हैं। उनके विरोधी भी उनके कामों की सराहना करते रहे हैं। ऐसे में वह यूपी की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ी भूमिका में नजर आ सकती हैं।

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