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मजबूत इरादों वाली असाधारण नेता हैं डिंपल यादव

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मुलायम सिंह यादव की बड़ी बहु और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की पत्नी डिंपल यादव समाजवादी पार्टी की बड़े राजनीतिक चेहरे के रूप में उभरी हैं। मौजूदा समय में यूपी चुनाव में सपा प्रत्याशियों के लिए डिंपल यादव प्रचार कर रही हैं। यूपी चुनाव में आधी आबादी का समर्थन सबसे ज्यादा डिंपल यादव को मिल रहा है। रैलियों में महिलाएं उनके भाषणों को बड़े गौर से सुनती हैं। उनकी खासियत ये रही है कि अपने भाषण में महिलाओं के अधिकार और उनसे जुड़ी समस्याओं के समाधान पर बात करती हैं। इसलिए उनकी जनसभाओं में काफी भीड़ इकठ्ठा होती है। इसी वजह से उम्मीदवारों में उन्हें अपने क्षेत्र में प्रचार कराने के लिए होड़ लगी हुई है।

डिंपल यादव इस बार चुनाव प्रचार में अकेले मैदान में

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पहले डिंपल यादव जनसभाओं में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ जनता से रूबरू होती रहती थीं। लेकिन अब सपा की ये सुपरवुमन अकेले ही क्षेत्र में प्रचार करने जा रही हैं। कहते हैं कि आर्मी कर्नल की यह बेटी पहले साए की तरह सीएम अखिलेश के साथ-साथ रहती थी। इस बार वजह चाहे जो भी रही हो यूपी चुनाव में डिंपल यादव ने अकेले प्रचार की कमान संभाली हुई है।  इसके आलावा बीते छह वर्षों में यह पहला मौका होगा, जब वह तीन विधानसभाओं में अकेले दौरा करेंगी। यूं तो कन्नौज संसदीय क्षेत्र पिछले छह वर्षो से उनका अपना निर्वाचन क्षेत्र रहा है। लेकिन यहां आयोजित होने वाली जनसभाओं में वह अखिलेश यादव के साथ ही आती रही हैं। हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान रोड शो में एक मौका आया था, जब वह अकेले ही निकली थी। इसके अलावा वह कई निजी कार्यक्रमों के अलावा सरकार की योजनाओं से संबंधित कार्यक्रमों में शामिल हुई, लेकिन कभी भी बिना मुख्यमंत्री के किसी भी जनसभा को संबोधित नहीं किया था। लेकिन जिस तरह से वह चुनावी जनसभाओं में बढ़े हुए आत्मविश्वास के साथ बोल रही हैं। उससे विपक्षी दलों में बेचैनी बढ़ गयी है।

डिंपल यादव ने दिया पीएम मोदी और मायावती को करारा जवाब

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कन्नौज से सांसद डिम्पल यादव ने बीते दिनों औरैया में जनसभा के के दौरान पीएम मोदी और बसपा सुप्रीमो मायावती पर जमकर प्रहार किया। आमतौर पर सौम्य और शालीन अंदाज में दिखने वाली डिम्पल यादव तेवर में आ गईं। पीएम नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए डिम्पल ने कहा कि मन की बात करने वाले काम की बातें नहीं करते हैं। बसपा और भाजपा दोनों पार्टियां मिली हुई हैं। इसके अलावा मायावती पर पीएम मोदी की सरकार पर डिम्पल ने कहा कि एक सरकार ने हाथियों को लाइन से खड़ा किया तो दूसरी सरकार ने लोगों को लाइन में लगा दिया।  वहीं समाजवादी पार्टी के शासनकाल में बहुत सारे विकास कार्य हुए हैं। लेकिन विरोधी पार्टियां सपा को बेवजह बदनाम कर रही हैं।  वह यहीं नहीं रुकी उन्होंने आगे कहा कि सपा को गुंडों की पार्टी कहकर बदनाम किया जा रहा है जबकि गुंडे खुद भाजपा और बसपा में हैं।

सकारात्मक सोच और बढ़ती सक्रियता

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डिंपल यादव ने बीते 6 महीने में जो राजनीतिक सक्रियता दिखाई है। वह महज एक संयोग नहीं है। क्योंकि यूपी में मौजूदा समय में महिलाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला के तौर पर डिंपल का उदय होना अहम है। प्रदेश की राजनीति पर अगर हम गौर करें तो बीते कई दशक से यूपी के प्रोग्रेसिव महिला लीडर की कमी थी। मायावती रही हैं लेकिन उनकी राजनीति दलितों के इर्द गिर्द घूमती रही है। इसके अलावा अभी तक के सपा के सफर में कोई महिला बहुत अहम भूमिका में नहीं रही है। लंबे समय तक पार्टी मुलायम सिंह यादव के सहारे चलते रही। परिवार से बाहर के जो नेता सपा में बेहद ताकतवर रहे उनमें अमर सिंह और आजम खान का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। जिन नामों का जिक्र यहां किया गया है, उनके बराबर की कोई महिला नेता कभी सपा में नहीं रही। लेकिन अब डिंपल उस कमी को भरती नजर आ रही हैं। कुछ राजनीतिक जानकार यह भी मान रहे हैं कि सपा में डिंपल यादव की अहम भूमिका हो जाने से न सिर्फ पार्टी में महिला नेता की कमी पूरी हो रही है। बल्कि इससे यूपी की महिलाओं को वोट में बदलने में उनकी भूमिका अहम साबित हो रही है।

 

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