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डायल 100 का काउंटडाउन शुरू, 8 दिन बाद यूपी को मिलेगी अमेरिका जैसी सुविधा

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उत्तरप्रदेश की मोस्ट अवेटेड परियोजना, डायल-100 को शुरू होने में सिर्फ 8 दिन शेष हैं। 19 दिसंबर को परियोजना की शुरुआत सीएम अखिलेश यादव करेंगे। इसके बाद उत्तरप्रदेश में पुलिस का रिस्पांस अमेरिका की तरह हो जाएगा। आपातकालीन स्थिति में फोन करने के फौरन बाद पुलिस आपके पास पहुंचेगी। प्रोजेक्ट को वर्ल्डक्लास बनाने के लिए किस तरह की सुविधाओं का इंतजाम किया गया है आइए एक नजर डालते हैं।

25 हजार प्रशिक्षित कर्मचारी करेंगे काम

इस परियोजना के शुरू हो जाने पर ‘100’ नम्बर डायल करने के 10-15 मिनट के अंदर ही पुलिस पहुंच जाएगी और कॉलर की मदद करेगी। इस परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए इसमें 25,000कर्मचारी लगाए गए हैं, जिन्हें विशेष ट्रेनिंग दी गई है। परियोजना के प्रमुख सूत्रधार वेंकट चेंगावली के मुताबिक,  राज्य के 75 जनपदों में नगरीय तथा ग्रामीण अंचलों में निवास करने वाले सभी नागरिकों को जन सुरक्षा की आपातकालीन सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इसका उद्देश्य लोगों को उच्च स्तर की आकस्मिक जन सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध कराना है। यह परियोजना विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत आपातकालीन सेवा होगी, जो प्रदेश के 75 जिलों, 689 शहरों व कस्बों और 1,07,452 गांवों में निवास करने वाली 22 करोड़ की जनसंख्या को कवर करेगी।

फायर स्टेशन और महिला पॉवर लाइन अटैच

जन सुरक्षा के दृष्टिकोण से संचालित अन्य सभी सेवाएं जैसे फायर सर्विस, राजमार्ग पुलिस, एकीकृत यातायात प्रबन्ध, स्मार्ट सिटी सर्विलांस, महिला पावर लाइन जैसी योजनाओं को भी इसी केन्द्र से एकीकृतकिया जाएगा। शहरी क्षेत्रों के लिए दुपहिया वाहन द्वारा रिस्पॉन्स टाइम 10 मिनट, शहरी क्षेत्र में चार पहिया वाहन द्वारा रिस्पॉन्स टाइम 15 मिनट तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चार पहिया वाहन के लिए 20 मिनट निर्धारित किया गया है।

24 घंटे काम करेगा सेंटर

‘राउण्ड द क्लॉक’ काम करने वाला यह केन्द्र एक विशाल ‘कॉन्टैक्ट सेण्टर’ के रूप में स्थापित किया जाएगा। प्रदेश के किसी भी क्षेत्र से नागरिक अपनी समस्याएं न केवल टेलीफोन के माध्यम से, बल्कि एस0एम0एस0, ई-मेल, सोशल मीडिया के जरिए भी दे सकेंगे। नागरिकों की कॉल्स को महिला कॉल ऑफिसर्स द्वारा रिसीव किया जाएगा, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में पूरी संवेदनशीलता के साथ वार्ता कर उचित सहायता प्रदान की जा सके। नागरिक प्रदेश में बोली जाने वाली सभी आंचलिक भाषाओं, हिन्दी, अंग्रेजी तथा चिन्हित भाषाओं में वार्तालाप कर सकेंगे। दिव्यांगजन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी,ताकि वे अपनी समस्याएं सहज रूप से व्यक्त कर सकें।

सभी कॉल्स की होगी रिकॉर्डिंग

गृह विभाग के सलाहकार वेंकट चेंगावल्ली ने बताया कि इस केन्द्र में आने वाली सभी कॉल्स की रिकॉर्डिंग की जाएगी। इसके अंतर्गत पीड़ित किसी भी घटना की तस्वीरें तथा वीडियो अपलोड कर सकेंगे। स्थानीय थाने द्वारा इन अभिलेखों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। पीड़ित व्यक्ति की मदद के उपरान्त कॉल सेण्टर द्वारा उसकी प्रतिक्रिया भी प्राप्त की जाएगी। उसके संतुष्ट होने के उपरान्त ही केन्द्र द्वारा प्रकरण को बंद किया जाएगा। इस केन्द्र में संकलित सूचनाओं/आंकड़ों का वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण भी किया जाएगा।

– वृजनन्दन चौबे, गेस्ट राइटर

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