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तमाम झंझावातों के बावजूद बढ़ते रहे अखिलेश यादव

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02 February 2017

उत्तर प्रदेश में चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं और इस क्रम में समाजवादी पार्टी आजकल सुर्खियों में हैं। पार्टी के अंदर घमासान जारी है। आए दिन एक नई खबर सुर्खियों में होती है। लेकिन इन तमाम राजनीतिक उठापटक और झ़ंझावातों के बावजूद ‘उम्मीदों के प्रदेश- उत्तर प्रदेश’ में पार्टी के युवा चेहरा अखिलेश यादव अपनी क्षमताओं के कारण काफी लोकप्रिय हैं। ताजा सर्वे के मुतातिब अखिलेश की पहले से कही ज्यादा बढ़ी लोकप्रियता को देखते हुए ऐसा ही कहा जाएगा।

उनका ग्लैमर आमजन में पहले से कही ज्यादा बढ़ा है। सी-वोटर के नए सर्वे में यह बात सामने आई है। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, सपा के पारिवारिक झगड़े के बीच अखिलेश यादव ने लोकप्रियता के मामले में अपने पिता एवं सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और चाचा एवं पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव को पीछे छोड़ दिया है।

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सर्वे बताता है कि इस दो माह में अखिलेश यादव की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। सी-वोटर ने एक सर्वे सितंबर में और दूसरा अक्टूबर के मध्य में किया। सर्वे के नतीजों के मुताबिक, अखिलेश को पसंद करने वाले लोगों की संख्या सितंबर में 77.1 प्रतिशत थी जो अक्टूबर में बढक़र 83.1 प्रतिशत हो गई। इसका मतलब यह कि अखिलेश को चाहने वालों की संख्या छह फीसदी बढ़ गई। इसी तरह, पिता मुलायम सिंह यादव की तुलना में भी अखिलेश अधिक लोकप्रिय नजर आते हैं।

सीएम अखिलेश सपा के पारंपरिक वोटरों की सीमा भी लांघते दिख रहे हैं। मुलायम से तुलना की बात रखे जाने पर भी 55 साल से ज्यादा उम्र वाले 70 फीसद लोग अखिलेश को पसंद करते हैं। सर्वेक्षण जिन लोगों के बीच किया गया, उनमें से 68 फीसद लोगों का मानना है कि अखिलेश पार्टी को गुंडा छवि से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। 63.2 प्रतिशत लोगों का यह भी मानना है कि अखिलेश को उन लोगों को पार्टी में शामिल नहीं करने देना चाहिए जो आपराधिक छवि के हैं।

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आइए, एक नजर डालते हैं अखिलेश यादव के राजनीतिक सफर पर-

  • अखिलेश यादव ने वर्ष 2000 में संसद के तौर पर सीधे राजनीति के मैदान में एंट्री मारी। पिता मुलायम सिंह के बाद कन्नौज लोकसभा की खाली सीट से उपचुनावों में जीत हासिल कर 13वें लोकसभा में चुने गए।
  • 2004 में 14वें लोकसभा के दूसरे कार्यकाल, 2009 में तीसरे कार्यकाल के लिए निर्वाचित हुए।
  • सर्वसम्मति से वर्ष 2011 में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अखिलेश को नियुक्त किया गया।
  • वर्ष 2004-2012 के दौरान पर्यावरण इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट अखिलेश शहरी विकास समिति, विभिन्न विभागों के लिए कंप्यूटर्स के प्रावधानों की समिति, विज्ञान व प्रौद्योगिकी समिति व पर्यावरण व वन विभाग समिति के सदस्य रहे।
  • नवंबर 2011 में उन्होंने अपने बल पर सत्तारूढ़ पार्टी बसपा के खिलाफ तीन दिवसीय राज्यव्यापी आंदोलन का आगाज किया था। जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के आदेश पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन उनकी रिहाई की मांग करते हुए सैंकड़ों समर्थकों ने जेल के बाहर भीड़ लगा दी।
  • उसी साल अखिलेश ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपना अभियान शुरु किया और यूथ आइकन के तौर पर पहचान बनाई। छात्र-छात्राओं को मुफ्त लैपटॉप देने के अपने वादे के साथ साथ उन्होंने पार्टी कार्यालयों में कंप्यूटर्स शुरू कराए। बाहुबलियों की जगह प्रोफेसनल्स को टिकट दिए गए। उन्होंने पुराने साइकिल चिन्ह को नया रूप देते हुए ‘उम्मीदों की साइकिल’ नाम दिया।
  • मार्च 2012 में 38 वर्षीय अखिलेश ने उत्तर प्रदेश के सबसे कम उम्र के युवा मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। इसके तुरंत बाद उत्तर प्रदेश के विधान परिषद में वे निर्वाचित हुए।
  • नए साल 2017 के पहले दिन अखिलेश को समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया और इन्हें चुनने वालों में पुराने नेताओं के साथ तमाम युवा नेता भी शामिल हैं।

उत्तर हमारा

1 Comment

  • amit kumar shukla says:

    The E-Governance implementation in Uttar Pradesh has set a benchmark for other states in India. The improvement that Uttar Pradesh has witnessed through the E-Governance initiatives is worth mentioning. The quality of governance has improved; a fully automated system has been developed to generate e-governance. UP CM Akhilesh Yadav is leaving no stone unturned to bring in the best governance policies. Also, E-Scholarships have been introduced in which the scholarship amount is directly sent to the bank accounts of the beneficiaries. This is one of the major steps.

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