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सीएम की पहल: अब महंगे निजी स्कूलों में पढ़ेंगे गरीब बच्चे

April 11, 2016

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पहल से उत्तर प्रदेश के एक लाख से ज्यादा गरीब बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ सकेंगे। शिक्षा किसी भी व्यक्ति एवं समाज के समग्र विकास तथा सशक्तिकरण के लिए आधारभूत मौलिक अधिकार है। इससे समाज का भी विकास होता है। बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा देने के लिए संसद ने वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम पारित किया गया था। इसके तहत छह से लेकर 14 वर्ष के सभी बच्चों के लिए शिक्षा को पूर्णतः मुफ्त एवं अनिवार्य कर दिया गया है। अब यह केंद्र तथा राज्यों के लिए कानूनी बाध्यता है कि मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा सभी बच्चों को सुलभ हो सके। इसके बावजूद निजी स्कूलों की मनमानी और कुछ प्रचार-प्रसार के अभाव में योजनाओं पर पूरा ध्यान नहीं दिया जा सका था। इससे गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री की पहल पर निजी स्कूलों की मनमानी खत्म करने केलिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। वहीं, पिछले साल जहां इस व्यवस्था में 1.21 करोड़ रुपये बजट की व्यवस्था की गई थी, वहीं इस बार चार करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके चलते राज्य सरकार ने चालू सत्र में एक लाख से ज्यादा गरीब बच्चों को महंगे पब्लिक स्कूलों में दाखिला दिलवाने की योजना तैयार की है।

Image Source: yahoo News

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क्या है सीएम की पहल

राज्य सरकार ने इस सत्र में एक लाख से ज्यादा गरीब बच्चों को महंगे पब्लिक स्कूलों में दाखिला दिलवाने की योजना तैयार की है। इस योजना में दाखिला देने वाले स्कूलों को प्रति बच्चा अधिकतम 450 रुपये भुगतान की व्यवस्था है। पिछले वर्षों में देखने में आया है कि गरीब बच्चों को दाखिला देने वाले किन्हीं स्कूलों की फीस अधिकतम सीमा से कम भी होती है। इसलिए एक अनुमान के मुताबिक निर्धारित बजट में एक-डेढ़ लाख बच्चों को योजना का लाभ मिल सकेगा। सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को कहा गया है कि वे निजी स्कूलों में दाखिला लेने के लिए मिले आवेदन पत्रों पर समय रहते नियमानुसार कार्रवाई करें। ऐसा न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

क्या है आरटीआई एक्ट

आरटीई एक्ट में व्यवस्था है कि निजी स्कूल अपने यहां की 25 फीसदी सीटें आवेदन मिलने पर गरीब बच्चों के लिए देंगे। योजना के बारे में ज्यादा प्रचार-प्रसार न होने के कारण पिछले दो-तीन साल में उपलब्ध सीटों के अनुपात में न के बराबर छात्रों को ही दाखिला मिल सका। स्थिति यह है कि निजी स्कूलों में गरीब बच्चों के लिए छह लाख से ज्यादा सीटें हैं, मगर 2013-14 और 2014-15 में महज 54-54 छात्रों को दाखिला मिला। पिछले सत्र में भी यह संख्या 4500 तक ही पहुंच सकी।

एक्ट में बदलाव से मिली सौगात

आरटीई एक्ट के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाने के लिए नियमों में भी ढील दी गई है। पिछले साल तक लागू व्यवस्था के अनुसार, इस योजना में कोई भी बच्चा कक्षा-1 में निजी स्कूल में तभी दाखिला ले सकता था, जब उसके एक किलोमीटर दायरे में स्थित सरकारी स्कूल की कक्षा-1 में 40 से ज्यादा बच्चे हों। अब यह प्रतिबंध खत्म कर दिया गया है। नए नियम के तहत अगर सरकारी स्कूल में छात्र-शिक्षक अनुपात 30 या उससे ज्यादा है तो बच्चे को कक्षा-1 में निजी स्कूल में दाखिला दिलवाया जा सकता है। साथ ही नर्सरी में दाखिले के लिए कोई प्रतिबंध नहीं होगा। यानी, जो भी अभिभावक नर्सरी में अपने बच्चों को निजी स्कूल में दाखिला दिलवाना चाहेंगे, उन्हें योजना का लाभ दिलवाया जाएगा।

स्कूलों में दूर होगी शिक्षकों की कमी

उत्तर प्रदेश ने प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने की कवायद भी तेज कर दी है ताकि बच्चों की शिक्षा में किसी तरह की रुकावट या अड़चन नहीं आए। इस के लिए सरकारी एवं निजी बीटीसी कॉलेजों में बीटीसी 2015-16 सत्र में प्रवेश के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से मई में आवेदन मांगे जाने की तैयारी है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से प्रदेश सरकार से मई में आवेदन मांगे जाने के संबंध में अनुमति मांगी गई है। प्रदेश में इस समय 63 डायट सहित 1034 निजी बीटीसी कॉलेजों में प्रवेश के लिए मई के पहले सप्ताह में आवेदन जारी होने की संभावना है। इसमें 80 हजार से अधिक सीटों पर प्रवेश होगा। प्रवेश मेरिट के आधार पर होगा। प्रदेश सरकार की ओर से संचालित बीटीसी कॉलेजों में सरकारी डायट में कुल 10450 सीटें तथा निजी बीटीसी कॉलेजों में कुल 51700 सीटें उपलब्ध हैं।

स्कूलों में हर महीने गूंजेगा हैप्पी बर्थ-डे टू यू

उत्तर प्रदेश में बच्चों में पढ़ाई के प्रति आकर्षित करने में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अभिनव पहल की हैं। अब प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों में हर माह बच्चों के जन्मदिन मनाए जाएंगे। बच्चों का जन्मदिन स्कूलों में अन्य बच्चे और शिक्षक मिलकर मनाएंगे। यह योजना नए सत्र से शुरू होने जा रही है। परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का जन्मदिन माह में एक निर्धारित तिथि पर मनाया जाएगा। यदि एक साथ कई बच्चों का जन्मदिन उसी तिथि में पड़ता तो उन बच्चों का जन्मदिन शासन द्वारा दिए गए आदेश के आधार पर मनाया जाएगा। कोशिश होगी कि अन्य बच्चों से उन बच्चों को कार्ड या छोटा सा गिफ्ट दिलाया जाए, जिनका बर्थ डे हो।

Image Source: indiaexpress

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अब स्कूलों के पास नो ट्रैफिक जोन

स्कूलों की 100 मीटर परिधि अब नो ट्रैफिक जोन बनने जा रही है। इसके लिए शासन ने जरूरी दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। नो ट्रैफिक जोन बनाने के लिए स्कूल के प्रधानाध्यापक और प्रबंधकों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके प्रति जागरूक करने के लिए स्काउट गाइड छात्रों की भी मदद ली जाएगी। साथ ही स्कूलों में प्रशिक्षण कक्षाएं भी चलाईजाएंगीं। परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए सीएम अखिलेश यादव ने भी चिंता जाहिर की है। सीएम ने इस ओर कदम बढ़ाते हुए स्कूलों के आसपास नो ट्रैफिक जोन घोषित करने की रणनीति बनाई है। परिषदीय के साथ ही गैर सरकारी स्कूल भी इसका लाभ पाएंगें। सड़क सुरक्षा को प्राथमिकताओं में इसको शामिल कर शासन ने कार्ययोजना लागू कर दी है। स्कूलों के 100 मीटर परिधि में नो ट्रैफिक जोन के लिए प्रधानाचार्य से लेकर प्रबंधक तक को जिम्मेदारी उठानी होगी। इसके साथ ही स्कूल के ही एक शिक्षक को यातायात की जानकारी और जागरूकता के लिए नोडल शिक्षक का जिम्मा सौंपा जाएगा। ये शिक्षक अपने स्कूल के बच्चों को यातायात नियमों और परिवन विभाग व यातायात पुलिस के सहयोग के लिए प्रशिक्षित करेंगें।
 
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